फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Sabke Ram: Students of Darul Uloom study Shri Ramcharitmanas, Urdu translation was done in 1321 pages in 1921

सबके राम: दारुल उलूम में अनुपम पल की गवाह बनेगी उर्दू की रामायण, रामचरित मानस का भी अध्ययन करते हैं छात्र

Mon, 15 Jan 2024 04:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 15 Jan 2024 04:56 PM IST
सार

Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के देवबंद स्थित दारुल उलूम के छात्र श्रीरामचरितमानस का अध्ययन करते हैं। इस रामचरितमानस का वर्ष 1921 में 1321 पेज में उर्दू अनुवाद किया गया था। यहां मौजूद ऐतिहासिक अनुवादित रामायण अब लाइब्रेरी की शोभा बढ़ा रही है। 

विज्ञापन
Sabke Ram: Students of Darul Uloom study Shri Ramcharitmanas, Urdu translation was done in 1321 pages in 1921
उर्दू की रामचरितमानस, रामायण - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अयोध्या में पांच सौ वर्ष बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। 21वीं सदी में 22 जनवरी इस अनुपम पल की गवाह बनेगी। जिसके लिए पूरे देश त्योहारी बना हुआ है। वहीं, एशिया के सबसे बड़े इस्लामिक मदरसे दारुल उलूम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित हिंदू ग्रंथ रामायण को संग्रहीत कर रखा गया है। जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। खास बात है कि यह रामायण उर्दू भाषा में है। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम के पुस्तकालय में हिंदू ग्रंथ रामायण बेहद संभाल कर रखी गई है। दारुल उलूम के छात्र इसका अध्ययन भी करते हैं।

विज्ञापन


पुस्तकालय के इंचार्ज मौलाना शफीक ने बताया कि श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16वीं सदी में रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसका उर्दू अनुवाद 1321 पेज में सन 1921 में महर्षि स्वामी शिव बरत लाल जी बर्मन (एमए) ने किया था।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: कोहरे की मार: रेलों का संचालन प्रभावित, पांच रद्द, शताब्दी सहित 18 ट्रेनें देरी से पहुंचीं, यात्री परेशान

विज्ञापन
विज्ञापन

Sabke Ram: Students of Darul Uloom study Shri Ramcharitmanas, Urdu translation was done in 1321 pages in 1921
देववंद दारुल उलूम - फोटो : अमर उजाला

इसे जेएस संत सिंह एंड संस ने लुहारी दरवाजा लाहौर से प्रकाशित किया था, जबकि महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित आदि काव्य रामायण का 272 पेज में उर्दू अनुवाद सन 1949 में कीर्तन कलानिधि बानी भूषण नाटिया आचार्य महा कवि श्री शिव नारायण तसकीन ने किया था। मौलाना शफीक ने बताया रामायण वाल्मिकी के उर्दू अनुवाद का प्रकाशन गेलाराम एंड संस द्वारा दिल्ली से किया गया गया था। यह इसका द्वितीय संस्करण है।
 

Sabke Ram: Students of Darul Uloom study Shri Ramcharitmanas, Urdu translation was done in 1321 pages in 1921
दारुल उलूम - फोटो : Amar Ujala

धर्म ग्रंथों को केमिकल लगाकर किया गया है संग्रहीत
दारुल उलूम के पुस्तकालय के शोकेस में तुलसीदास रामायण और वाल्मिकी रामायण को बहुत ही संभाल कर रखा गया है। अधिक पुरानी होने के कारण दोनों रामायण के पन्ने बेहद कमजोर पड़ चुके हैं और इनका रंग तक बदल चुका है। खराब न हो इसलिए इन्हें केमिकल लगाकर संग्रहीत किया गया है।

Sabke Ram: Students of Darul Uloom study Shri Ramcharitmanas, Urdu translation was done in 1321 pages in 1921
दारुल उलूम की लाइब्रेरी में ऐतिहासिक पुस्तकों को देखते अपर जिला जज सुरेश चंद भारती - फोटो : DEVBAND

ऐतिहासिक जखीरा, सुरक्षा भी ऐसी
दोनों रामायण की महत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की इन्हें शोकेस से बाहर निकालकर देखने के लिए संस्था के किसी बड़े जिम्मेदार की लिखित अनुमति लेना जरूरी है। उसके बिना इन धर्म ग्रन्थों को केवल दूर से ही निहारा जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed