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संसाधन हैं कम, मरीजों का निकल रहा दम

Thu, 29 Apr 2021 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:55 PM IST
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Resources are low, patients are getting out of power
सहारनपुर। कोरोना काल में मरीजों की संख्या इस कदर बढ़ी है कि एसबीडी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक और संसाधन कम पड़ रहे हैं। दस बेड के वार्ड में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। जिनमें से 120 से अधिक मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। इतने मरीजों को संभालना चिकित्सकों के लिए मुश्किल हो रहा है। आलम यह है कि कई मरीजों को लिटाने के लिए बेंच तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
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अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को इमरजेंसी वार्ड का दौरा किया। वार्ड के भीतर दस में से छह मरीजों को ऑक्सीजन लगी मिली। चूंकि मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। ऐसे में कई मरीजों को बरामदे में बेंच पर लिटाया था। बरामदे में भी पांच मरीज ऑक्सीजन पर थे। भीषण गर्मी में तीमारदार ऑक्सीजन लगे मरीजों को हाथ के पंखे से हवा करते दिखे। कई मरीज स्ट्रेचर पर पड़े इलाज का इंतजार कर रहे थे। वहीं, एक वृद्ध फर्श पर बैठकर ऑक्सीजन स्तर जांचने की मांग कर रहा था। बगल में शेखपुरा निवासी 45 वर्षीय महिला का शव स्ट्रेचर पर पड़ा था। एक वृद्धा और अन्य तीमारदार विलाप कर रहे थे। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को कभी वार्ड के भीतर तो कभी बेंच पर पड़े मरीज के तीमारदार को आवाज लगाते दिख रहे थे।
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इसलिए है चिकित्सकों की कमी
चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मिल रहे हैं। हाल ही में एसबीडी जिला अस्पताल के छह चिकित्सक संक्रमित आने की वजह से होम आइसोलेशन में हैं। पहले से ही अस्पताल में कुल 61 पदों के सापेक्ष 29 चिकित्सक कार्यरत हैं। यही वजह है कि संकट के दौर में चिकित्सक कम पड़ रहे हैं। उधर, सीएमएस ने संसाधनों की कमी के संबंध में दो दिन पहले ही सीएमओ को ऑक्सीजन के लिए पत्र लिखा है। एंबुलेंस के समय में भी सुधार की मांग की है।
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एक चिकित्सक की रहती है ड्यूटी
इमरजेंसी वार्ड में छह-छह घंटे के लिए डॉक्टर तैनात किए जाते हैं। उनकी ड्यूटी सुबह आठ से दोपहर दो, दोपहर दो से रात आठ बजे, रात आठ से दो बजे तथा रात के दो बजे से सुबह के आठ बजे तक ड्यूटी रहती है। इसके अलावा स्टाफ रहता है। इसीलिए एक दिन में 300 तक मरीजों के पहुंचने तथा 120 से अधिक मरीजों को भर्ती करना उनके लिए चुनौती बन रहा है।
ऑक्सीजन के लिए बनाई टीम
एसबीडी जिला अस्पताल में सर्जन डॉ. नरेश सैनी को ऑक्सीजन के लिए नोडल बनाया है। इसके अलावा एक टीम बनाई जा रही है, जो ऑक्सीजन की व्यवस्था संभालेगी। किस मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है और किसको नहीं यह देखने के बाद ही टीम ऑक्सीजन की उपलब्धता पर भी नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर अस्पताल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराएगी।
रैन बसेरा बन सकता है विकल्प
इमरजेंसी में मात्र दस बेड की व्यवस्था है। ऐसे में कई मरीजों को बरामदे में बेंच पर लिटाया है, जबकि कई मरीजों को बेंच भी नहीं मिल रही है। ऐसे में इमरजेंसी वार्ड के ठीक बाहर बना रैन बसेरा वार्ड का काम कर सकता है। इसमें करीब 20 बेड मौजूद हैं।

ओपीडी बंद होने तथा कोरोना संक्रमण बढ़ने से मरीजों का सारा भार इमरजेंसी वार्ड पर आ गया। हमारे कई चिकित्सक कोरोना संक्रमित होने की वजह से होम आइसोलेशन में हैं। इसके बावजूद हम मौजूदा चिकित्सकों और स्टाफ से व्यवस्था को संभाले हैं। कोशिश यही है कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।-डॉ. केवी सिंह, नोडल अधिकारी, इमरजेंसी वार्ड
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