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Saharanpur News: खत्म हो चुके आदेश के आधार पर नहीं चल सकती पुनरीक्षण कार्यवाही
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- बोर्ड के 22 मई 2026 के आदेश पर हाईकोर्ट ने जताई आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। राजस्व विवाद के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे आदेश के आधार पर की गई पुनरीक्षण कार्यवाही पर सवाल उठाया है, जो पहले ही निरस्त किया जा चुका था। अदालत ने पुनरीक्षण के स्तर पर पहली बार पेश किए गए साक्ष्यों को आधार बनाने के अधिकार क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
मामला सदर क्षेत्र के खसरा संख्या 115, 116 और 117 से जुड़ा है। इन जमीनों को जनता रोड पर कृषि भूमि के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर विवाद चल रहा था। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने 26/28 अक्टूबर 2020 को आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ राजस्व बोर्ड में पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की गईं। याची नितिन कुमार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का उक्त आदेश राजस्व बोर्ड के 28 जून 2022 के आदेश से पहले ही निरस्त किया जा चुका था। बोर्ड ने मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए संबंधित अधिकारी के पास वापस भेज दिया था।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि 22 मई 2026 को जब राजस्व बोर्ड ने इस पुनरीक्षण पर फैसला किया, तब चुनौती दिया गया मूल आदेश प्रभावी नहीं था। वह पहले ही निरस्त हो चुका था और प्रकरण नए सिरे से निर्णय के लिए लंबित था। मामले में यह बिंदु भी सामने आया कि पुनरीक्षण के दौरान कुछ साक्ष्य पहली बार रिकॉर्ड पर लाए गए और बोर्ड ने उन पर विचार किया। याची पक्ष ने इसे पुनरीक्षण प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। हाईकोर्ट ने इस पहलू को भी मामले की वैधानिकता परखने के लिए महत्वपूर्ण माना है।
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सहारनपुर। राजस्व विवाद के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे आदेश के आधार पर की गई पुनरीक्षण कार्यवाही पर सवाल उठाया है, जो पहले ही निरस्त किया जा चुका था। अदालत ने पुनरीक्षण के स्तर पर पहली बार पेश किए गए साक्ष्यों को आधार बनाने के अधिकार क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
मामला सदर क्षेत्र के खसरा संख्या 115, 116 और 117 से जुड़ा है। इन जमीनों को जनता रोड पर कृषि भूमि के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर विवाद चल रहा था। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने 26/28 अक्टूबर 2020 को आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ राजस्व बोर्ड में पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की गईं। याची नितिन कुमार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का उक्त आदेश राजस्व बोर्ड के 28 जून 2022 के आदेश से पहले ही निरस्त किया जा चुका था। बोर्ड ने मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए संबंधित अधिकारी के पास वापस भेज दिया था।
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हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि 22 मई 2026 को जब राजस्व बोर्ड ने इस पुनरीक्षण पर फैसला किया, तब चुनौती दिया गया मूल आदेश प्रभावी नहीं था। वह पहले ही निरस्त हो चुका था और प्रकरण नए सिरे से निर्णय के लिए लंबित था। मामले में यह बिंदु भी सामने आया कि पुनरीक्षण के दौरान कुछ साक्ष्य पहली बार रिकॉर्ड पर लाए गए और बोर्ड ने उन पर विचार किया। याची पक्ष ने इसे पुनरीक्षण प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। हाईकोर्ट ने इस पहलू को भी मामले की वैधानिकता परखने के लिए महत्वपूर्ण माना है।
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