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Saharanpur News: आम के पुराने बागों का करें जीर्णोद्धार, बढ़ेगी फलत
Wed, 18 Oct 2023 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 18 Oct 2023 12:24 AM IST
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सहारनपुर। पुराने बागों की फलत को बढ़ाने के लिए जीर्णोद्धार तकनीकी कारगर साबित हो रही है। इससे न सिर्फ आम के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है, बल्कि कीटों एवं रोगों के प्रकोप में भी कमी आ जाती है।
जनपद में आम का रकबा 25 हजार हेक्टेयर से अधिक है। इनमें बड़े क्षेत्रफल में आम के पुराने बाग भी हैं। 40 वर्ष के बाद आम पेड़ बड़े होने के चलते बाग सघन हो जाते हैं। इसे देखते हुए उद्यान विभाग बागवानों को पुराने बागों के जीर्णोद्धार कराने पर जोर दे रहा है। उद्यान विभाग फल पट्टी विकास योजना और राष्ट्रीय औद्यानिक विकास मिशन के तहत बागवानों को पुराने आम के बागों के जीर्णोद्धार पर अनुदान भी दे रहा है।
जीर्णोद्धार प्रकिया में आम के 40 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों की मुख्य शाखाओं को छोड़कर अन्य शाखाओं को आठ से दी फीट की ऊंचाई से काट दिया जाता है। पेड़ों की कटी हुई शाखाओं पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का पेस्ट लगाया जाता है। इससे कटी हुई शाखाओं को किसी रोगाणु के प्रकोप से बचाने में मदद मिलती है। इन कटी हुई शाखाओं से नई शाखाएं निकलती हैं।
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बागवानों को पुराने आम के बागों का जीर्णोद्धार कराना चाहिए। इससे बागों की न सिर्फ आयु बढ़ जाती है, बल्कि उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हो जाती है। इसके लिए उद्यान विभाग बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दे रहा है। एक बागवान को अधिकतम दो हेक्टेयर आम के बाग पर ही अनुदान दिया जाएगा।
-- - गमपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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जनपद में आम का रकबा 25 हजार हेक्टेयर से अधिक है। इनमें बड़े क्षेत्रफल में आम के पुराने बाग भी हैं। 40 वर्ष के बाद आम पेड़ बड़े होने के चलते बाग सघन हो जाते हैं। इसे देखते हुए उद्यान विभाग बागवानों को पुराने बागों के जीर्णोद्धार कराने पर जोर दे रहा है। उद्यान विभाग फल पट्टी विकास योजना और राष्ट्रीय औद्यानिक विकास मिशन के तहत बागवानों को पुराने आम के बागों के जीर्णोद्धार पर अनुदान भी दे रहा है।
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जीर्णोद्धार प्रकिया में आम के 40 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों की मुख्य शाखाओं को छोड़कर अन्य शाखाओं को आठ से दी फीट की ऊंचाई से काट दिया जाता है। पेड़ों की कटी हुई शाखाओं पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का पेस्ट लगाया जाता है। इससे कटी हुई शाखाओं को किसी रोगाणु के प्रकोप से बचाने में मदद मिलती है। इन कटी हुई शाखाओं से नई शाखाएं निकलती हैं।
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बागवानों को पुराने आम के बागों का जीर्णोद्धार कराना चाहिए। इससे बागों की न सिर्फ आयु बढ़ जाती है, बल्कि उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हो जाती है। इसके लिए उद्यान विभाग बागवानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दे रहा है। एक बागवान को अधिकतम दो हेक्टेयर आम के बाग पर ही अनुदान दिया जाएगा।