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Saharanpur News: जागरुकता से शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में आई कमी
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सहारनपुर। चिकित्सा सुविधाओं में आए सुधार और जागरुकता के चलते शिशु मृत्यु दर एवं जन्म के दौरान महिलाओं की होने वाली मौत में कमी आई है। जननी एवं नवजात बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रयास कुछ परिणाम लाते दिख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं को इसका कारण मान रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 मातृ मुत्य दर 41 थी। वहीं, शिशु मुत्यु दर 293 थी। अब यह संख्या वर्ष 2022 में 36 और 181 तक रह गई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सरकार के मातृत्व सुरक्षा संबंधी कार्यक्रमों जैसे जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, निशुल्क दवाई, जांच, एंबुलेंस सुविधाएं और संस्थागत प्रसूति, टीकाकरण, पोषण स्तनपान के लिए जागरूकता के चलते मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। शिशु मृत्यु दर में एक वर्ष तक की आयु के एक हजार बच्चों पर हुई मौत और मातृ मृत्यु दर में प्रसूति के एक साल के अंदर एक लाख माताओं पर हुई मृत्यु को शामिल किया जाता है।
आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की मदद से शिशु मातृ मृत्यु दर कम करने के प्रयास हैं। विभाग का लक्ष्य मृत्यु दर को कम कर एक अंक में लाना है। माता और बच्चे दोनों को विशेषज्ञ की देखरेख में चिकित्सा सहायता दी गई।
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- डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 मातृ मुत्य दर 41 थी। वहीं, शिशु मुत्यु दर 293 थी। अब यह संख्या वर्ष 2022 में 36 और 181 तक रह गई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सरकार के मातृत्व सुरक्षा संबंधी कार्यक्रमों जैसे जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, निशुल्क दवाई, जांच, एंबुलेंस सुविधाएं और संस्थागत प्रसूति, टीकाकरण, पोषण स्तनपान के लिए जागरूकता के चलते मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। शिशु मृत्यु दर में एक वर्ष तक की आयु के एक हजार बच्चों पर हुई मौत और मातृ मृत्यु दर में प्रसूति के एक साल के अंदर एक लाख माताओं पर हुई मृत्यु को शामिल किया जाता है।
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आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की मदद से शिशु मातृ मृत्यु दर कम करने के प्रयास हैं। विभाग का लक्ष्य मृत्यु दर को कम कर एक अंक में लाना है। माता और बच्चे दोनों को विशेषज्ञ की देखरेख में चिकित्सा सहायता दी गई।
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- डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी