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Saharanpur News: जिपं से रिकॉर्ड गायब, कासगंज और मेरठ में मिलीं फाइलें

Sun, 29 Jun 2025 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sun, 29 Jun 2025 12:41 AM IST
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Records missing from Zila Parishad, files found in Kasganj and Meerut
सहारनपुर। जिला पंचायत एक बार फिर सुर्खियों में है। जिला पंचायत कार्यालय का सरकारी रिकॉर्ड ही गायब कर दिया गया। मामले की छानबीन हुई तो पता चला कि रिकॉर्ड की कुछ फाइलें कासगंज में तत्कालीन अधिकारी के पास मिली तो कुछ फाइलें मेरठ में एक कर्मचारी के घर पर। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड को वहां किस उद्देश्य ले जाया गया और ऐसा करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं।
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जिला पंचायत में पिछले सप्ताह नए अपर मुख्य अधिकारी ने चार्ज संभाला है। उनसे पहले यहां पर करीब 300 से ज्यादा टेंडर की फाइलों के वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो रहे थे, जिस वजह से तत्कालीन अधिकारी के खिलाफ जिला पंचायत सदस्यों ने विरोध-प्रदर्शन भी किया था। अब काफी हद तक अधर में लटके वर्क ऑर्डर पूरे भी हो गए हैं। हाल ही में पता चला कि तत्कालीन अधिकारी के समय की कुछ सरकारी फाइलें भी रिकॉर्ड से गायब है। मामले की छानबीन शुरू की गई। तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी से भी संपर्क किया गया, जो फिलहाल कासगंज में कार्यरत है।
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पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड की करीब 30 फाइलें तत्कालीन अधिकारी के पास है। ऐसे में यहां से कासगंज एक कर्मचारी को भेजकर फाइलें मंगाई गई। अन्य 17 फाइलें मेरठ में एक कर्मचारी के पास मिली। तब मेरठ से उन फाइलों को लाया गया। इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि जो सरकारी फाइलें जिला पंचायत के कार्यालय में होनी चाहिए थी कि इतनी दूर दूसरे जिलों में क्यों ले जाई गई। इसके पीछे क्या मकसद था। इसकी भी छानबीन की जा रही है।
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लापरवाही या साजिश
हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड की जो 47 फाइलें कासगंज और मेरठ में मिली है उनमें अधिकर उन टेंडर की फाइल थी, जिनसे जिला पंचायत अध्यक्ष के वार्ड में विकास कार्य होने थे। सवाल यह है कि विकास कार्यों को अटकाने के उद्देश्य से तो यह सब नहीं किया गया। बता दें, कि इससे पहले करीब 250 फाइलों से दस्तावेज भी गायब और कुछ फटे हुए मिले थे, जो अब पूरे किए गए हैं। इन सभी मामलों को देखकर इसे लापरवाही तो नहीं कहा जा सकता।

रिकॉर्ड की कुछ फाइलें नहीं मिल रही थी। करीब 30 फाइलें कासगंज में तत्कालीन अधिकारी के पास से मंगाई गई और 17 फाइलें मेरठ में एक कर्मचारी के यहां से मंगाई गई। अब पूरा रिकॉर्ड ठीक कर लिया गया है।
- चौधरी मांगेराम, अध्यक्ष जिला पंचायत
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