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Saharanpur News: रजबहे पर कब्जे होते रहे, सिंचाई विभाग के अधिकारी सोते रहे
Sat, 18 Nov 2023 11:26 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 18 Nov 2023 11:26 PM IST
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- शकलापुरी मार्ग के साथ नूर बस्ती, गढ़ी मलूक से होते हुए कंपनी बाग में आता था रजबहा
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कंपनी बाग की सिंचाई के लिए अंग्रेजों द्वारा तैयार किए गए रजबहे को सरकारी और गैर सरकारी कब्जे लील गए। रजबहे पर करीब दो किलोमीटर तक सड़कों, मार्केट, मकान आदि का निर्माण कर लिया गया है। करीब दो दशक से रजबहे की जमीन पर कब्जे होते रहे और सिंचाई विभाग के अधिकारी सोते रहे। वर्तमान में भी रजबहे पर कब्जे होने का सिलसिला जारी है।
बेहट रोड स्थित कुष्ठ आश्रम की बगल से गांव शकलापुरी को जाने वाले मार्ग के साथ-साथ एक रजबहा कंपनी बाग तक पहुंचता था। कंपनी बाग तक आने के कारण लोग इसे कंपनी नहर के नाम से भी जानते हैं। इस रजबहे से कंपनी बाग की सिंचाई के साथ ही रजबहे के आसपास के किसान अपने खेतों और बागों की सिंचाई भी करते थे। लेकिन शहरीकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी इस रजबहे को खा गई।
गढ़ी मलूक में महाराज सिंह कॉलेज के कोने से नूर बस्ती होते हुए कुष्ठ आश्रम तक रजबहे को पाटकर सड़क बना दी गई। गढ़ी मलूक में रजबहे की भूमि पर मकान तक बना लिए गए। कुष्ठ आश्रम से पहले भी रजबहे की भूमि पर दुकानें तैयार कर दी गई। इसके बाद कुष्ठ आश्रम द्वारा बनाई गई दुकानों के पगड़ीधारकों ने टीनशेड निकालकर रजबहे की भूमि पर कब्जे कर लिए। इससे आगे कुछ लोगों ने मार्केट और मकान रजबहे की भूमि पर बनाए हुए हैं। कुटिया का मंदिर तक रजबहा पूरी तरह कब्जे में है। जिसको पुन: खोदा जाना मुश्किल है। उससे आगे भी लोग लगातार रजबहे पर कब्जे कर रहे हैं।
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- दो दशक से सूखी है कंपनी बाग की झील
रजबहे पर कब्जे के बाद से कंपनी बाग की सिंचाई बिजली के नलकूपों से की जाती है। सिंचाई पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की बिजली खर्च हो रही है। वहीं दो दशक से कंपनी बाग की झीलें भी सूखी पड़ी हैं, जिनका मतलब ही खत्म हो गया है। पहले दोनों झीलों में 12 महीने पानी रहता था, लोग झीलों का आनंद देते थे।
- शकलापुरी की ओर से कंपनी बाग तक आने वाले रजबहे पर शहरी क्षेत्र में काफी पहले से कब्जे हैं, जिनको अब हटाया जाना बेहद मुश्किल है। लेकिन जहां तक संभव है विभाग रजबहे की भूमि को बचाए हुए है। प्रत्येक वर्ष इसकी सफाई भी कराई जाती है। प्रयास यही है कि कोई नया कब्जा ना हो। - अभिमन्यु सिंह रॉय, अधिशासी अभियंता, अपर खंड पूर्वी यमुना नहर।
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सहारनपुर। कंपनी बाग की सिंचाई के लिए अंग्रेजों द्वारा तैयार किए गए रजबहे को सरकारी और गैर सरकारी कब्जे लील गए। रजबहे पर करीब दो किलोमीटर तक सड़कों, मार्केट, मकान आदि का निर्माण कर लिया गया है। करीब दो दशक से रजबहे की जमीन पर कब्जे होते रहे और सिंचाई विभाग के अधिकारी सोते रहे। वर्तमान में भी रजबहे पर कब्जे होने का सिलसिला जारी है।
बेहट रोड स्थित कुष्ठ आश्रम की बगल से गांव शकलापुरी को जाने वाले मार्ग के साथ-साथ एक रजबहा कंपनी बाग तक पहुंचता था। कंपनी बाग तक आने के कारण लोग इसे कंपनी नहर के नाम से भी जानते हैं। इस रजबहे से कंपनी बाग की सिंचाई के साथ ही रजबहे के आसपास के किसान अपने खेतों और बागों की सिंचाई भी करते थे। लेकिन शहरीकरण और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी इस रजबहे को खा गई।
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गढ़ी मलूक में महाराज सिंह कॉलेज के कोने से नूर बस्ती होते हुए कुष्ठ आश्रम तक रजबहे को पाटकर सड़क बना दी गई। गढ़ी मलूक में रजबहे की भूमि पर मकान तक बना लिए गए। कुष्ठ आश्रम से पहले भी रजबहे की भूमि पर दुकानें तैयार कर दी गई। इसके बाद कुष्ठ आश्रम द्वारा बनाई गई दुकानों के पगड़ीधारकों ने टीनशेड निकालकर रजबहे की भूमि पर कब्जे कर लिए। इससे आगे कुछ लोगों ने मार्केट और मकान रजबहे की भूमि पर बनाए हुए हैं। कुटिया का मंदिर तक रजबहा पूरी तरह कब्जे में है। जिसको पुन: खोदा जाना मुश्किल है। उससे आगे भी लोग लगातार रजबहे पर कब्जे कर रहे हैं।
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- दो दशक से सूखी है कंपनी बाग की झील
रजबहे पर कब्जे के बाद से कंपनी बाग की सिंचाई बिजली के नलकूपों से की जाती है। सिंचाई पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की बिजली खर्च हो रही है। वहीं दो दशक से कंपनी बाग की झीलें भी सूखी पड़ी हैं, जिनका मतलब ही खत्म हो गया है। पहले दोनों झीलों में 12 महीने पानी रहता था, लोग झीलों का आनंद देते थे।
- शकलापुरी की ओर से कंपनी बाग तक आने वाले रजबहे पर शहरी क्षेत्र में काफी पहले से कब्जे हैं, जिनको अब हटाया जाना बेहद मुश्किल है। लेकिन जहां तक संभव है विभाग रजबहे की भूमि को बचाए हुए है। प्रत्येक वर्ष इसकी सफाई भी कराई जाती है। प्रयास यही है कि कोई नया कब्जा ना हो। - अभिमन्यु सिंह रॉय, अधिशासी अभियंता, अपर खंड पूर्वी यमुना नहर।