{"_id":"5fda55e68ebc3e3d5a44e22a","slug":"questions-are-being-raised-on-the-sewer-line-being-put-in-the-city-saharanpur-news-mrt5159395162","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में डाली जा रही सीवर लाइन पर उठ रहे सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में डाली जा रही सीवर लाइन पर उठ रहे सवाल
विज्ञापन
आवास विकास में सीवर पाईप लाइन डालते कर्मी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। शहर में अमृत योजना के तहत सीवर लाइन डालने का कार्य चल रहा है। कई ऐसी कॉलोनियां हैं, जहां पहले से लाइन है, वहां दोबारा लाइन डाल दी गई है। दोहरे सीवर लाइन पर कई पार्षद सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा स्मार्ट सिटी योजना के तहत एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) क्षेत्र में लाइन डालना शुरू किया गया है। इसमें नगर निगम और जल निगम के बीच टकराव की स्थिति है। एबीडी क्षेत्र में भी कई वार्ड ऐसे हैं, जहां पहले से और चौड़ी लाइन डली है, लेकिन अब वहां आठ इंच तक की लाइन डालने की तैयारी है। मामले में पार्षदों ने महापौर और नगरायुक्त से लेकर मंडलायुक्त तक से शिकायत की है। फिलहाल जल निगम की आपत्ति के बाद काम रुकवा दिया गया है। पेश है इसकी पड़ताल करती रिपोर्ट।
167 करोड़ रुपये की हैं योजनाएं
अमृत योजना के तहत दिल्ली रोड की मिशन कंपाउंड, चंद्रनगर, आवास विकास, हकीकतनगर समेत कई कॉलोनियों में सीवर लाइन डाली जा रही है, जो करीब अंतिम चरण में है। योजना के तहत कुल 59 किलोमीटर की लाइन डाली जानी है, जिसका बजट 82 करोड़ रुपये का है। उधर, एबीडी क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत करीब 100 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है, जिसका बजट करीब 85 करोड़ रुपये का है।
एसटीपी तैयार नहीं, डाली जा रही लाइन
नमामि गंगे योजना के तहत शहर में 90 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) का एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्वीकृत है। इसके लिए करीब 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए। नगर निगम ने मल्हीपुर रोड पर बादशाहपुर (रामनगर) के पास जमीन देखी है। करीब दो वर्ष से एसटीपी की तैयारी चल रही है, नगर निगम अभी तक जमीन नहीं खरीद सका है। एसटीपी बनाने का मकसद शहर भर की सीवर लाइन को एसटीपी से जोड़ा जाएगा, जिसके पास सीवर के पानी को ट्रीट करने के बाद ढमोला नदी में छोड़ा जाएगा, लेकिन एसटीपी की डीपीआर पर आपत्ति लगी हुई है। जमीन भी अभी तक खरीदी नहीं जा सकी है। ऐसे में सवाल यह भी है कि नई सीवर लाइनों को कहां छोड़ा जाएगा। सीवर नदी में सीधे डालने पर एनजीटी की मनाही है।
विज्ञापन
कहीं दोहरा तो कहीं कम चौड़ा पाइप
अमृत योजना के तहत मिशन कंपाउंड, आवास विकास समेत कई कॉलोनियों में सीवर लाइन डाली गई है, जबकि इन क्षेत्रों में पहले से सीवर लाइन डली है। पार्षदों का आरोप है कि सरकारी विभाग मिलकर सरकारी धन बर्बाद कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में पहले से 12 इंच या उससे चौड़ी लाइन डली है। वहां अब आठ इंच की लाइन डाली जा रही है। आशंका है कि कम चौड़ी लाइन जल्दी चोक होगी, जिससे समस्या बढ़ेगी।
योजनाबद्ध तरीके से नहीं हो रहे कार्य
नगर निगम कई कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से नहीं कर रहा है। इससे धन की बर्बादी हो रही है। स्मार्ट सिटी में सहारनपुर का चयन 19 जनवरी 2018 को हुआ था, जिसे तीन साल होने जा रहे हैं। यानी तीन साल से एबीडी क्षेत्र निर्धारित है, जिसमें स्मार्ट सिटी के तहत सीवर, सड़क और नालियां बनाई जानी हैं। नगर निगम ने इस सबको नजरअंदाज करते हुए अलग से सीवर, सड़क और नालियों के करोड़ों रुपये के टेंडर कर कार्य शुरू कर दिए। अब जब जल निगम को स्मार्ट सिटी के तहत सीवर, सड़क का ठेका मिला है तो जल निगम ने निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर निर्माण रुकवा दिया है।
समस्याएं अधिक होने की वजह से संबंधित पार्षदों का दबाव था। ऐसे में नगर निगम को एबीडी क्षेत्र में अपने पैसे से कार्य कराने पड़े। जल निगम की तरफ से पत्र आने के बाद कार्य रोक दिए गए हैं। अब स्मार्ट सिटी के तहत ही कार्य होंगे।
आलोक श्रीवास्तव, एक्सईएन, निर्माण विभाग, नगर निगम।
एबीडी क्षेत्र में सीवर और छोटी सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम को मिली है। ऐसे में नगर निगम के निर्माण विभाग को पत्र लिखकर उनके द्वारा कराए जा रहे कार्य रुकवाए गए हैं। दोबारा सीवर लाइन डालने की बात करें तो ऐसा केवल उन जगहों पर हुआ है जहां पुरानी लाइन का लेवल नीचे चला गया है या फिर वह खराब हो चुकी है। रही बात कम चौड़ाई का पाइप डालने की तो जल निगम कंप्यूटराइज्ड डिजाइन कराकर ही पाइप डलवा रहा है। एसटीपी के लिए जमीन के प्रस्ताव लिए गए हैं।
वेदपाल सिंह, सहायक अभियंता, जल निगम।
विज्ञापन
167 करोड़ रुपये की हैं योजनाएं
अमृत योजना के तहत दिल्ली रोड की मिशन कंपाउंड, चंद्रनगर, आवास विकास, हकीकतनगर समेत कई कॉलोनियों में सीवर लाइन डाली जा रही है, जो करीब अंतिम चरण में है। योजना के तहत कुल 59 किलोमीटर की लाइन डाली जानी है, जिसका बजट 82 करोड़ रुपये का है। उधर, एबीडी क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के तहत करीब 100 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है, जिसका बजट करीब 85 करोड़ रुपये का है।
विज्ञापन
एसटीपी तैयार नहीं, डाली जा रही लाइन
नमामि गंगे योजना के तहत शहर में 90 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) का एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्वीकृत है। इसके लिए करीब 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए। नगर निगम ने मल्हीपुर रोड पर बादशाहपुर (रामनगर) के पास जमीन देखी है। करीब दो वर्ष से एसटीपी की तैयारी चल रही है, नगर निगम अभी तक जमीन नहीं खरीद सका है। एसटीपी बनाने का मकसद शहर भर की सीवर लाइन को एसटीपी से जोड़ा जाएगा, जिसके पास सीवर के पानी को ट्रीट करने के बाद ढमोला नदी में छोड़ा जाएगा, लेकिन एसटीपी की डीपीआर पर आपत्ति लगी हुई है। जमीन भी अभी तक खरीदी नहीं जा सकी है। ऐसे में सवाल यह भी है कि नई सीवर लाइनों को कहां छोड़ा जाएगा। सीवर नदी में सीधे डालने पर एनजीटी की मनाही है।
विज्ञापन
कहीं दोहरा तो कहीं कम चौड़ा पाइप
अमृत योजना के तहत मिशन कंपाउंड, आवास विकास समेत कई कॉलोनियों में सीवर लाइन डाली गई है, जबकि इन क्षेत्रों में पहले से सीवर लाइन डली है। पार्षदों का आरोप है कि सरकारी विभाग मिलकर सरकारी धन बर्बाद कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में पहले से 12 इंच या उससे चौड़ी लाइन डली है। वहां अब आठ इंच की लाइन डाली जा रही है। आशंका है कि कम चौड़ी लाइन जल्दी चोक होगी, जिससे समस्या बढ़ेगी।
योजनाबद्ध तरीके से नहीं हो रहे कार्य
नगर निगम कई कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से नहीं कर रहा है। इससे धन की बर्बादी हो रही है। स्मार्ट सिटी में सहारनपुर का चयन 19 जनवरी 2018 को हुआ था, जिसे तीन साल होने जा रहे हैं। यानी तीन साल से एबीडी क्षेत्र निर्धारित है, जिसमें स्मार्ट सिटी के तहत सीवर, सड़क और नालियां बनाई जानी हैं। नगर निगम ने इस सबको नजरअंदाज करते हुए अलग से सीवर, सड़क और नालियों के करोड़ों रुपये के टेंडर कर कार्य शुरू कर दिए। अब जब जल निगम को स्मार्ट सिटी के तहत सीवर, सड़क का ठेका मिला है तो जल निगम ने निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर निर्माण रुकवा दिया है।
समस्याएं अधिक होने की वजह से संबंधित पार्षदों का दबाव था। ऐसे में नगर निगम को एबीडी क्षेत्र में अपने पैसे से कार्य कराने पड़े। जल निगम की तरफ से पत्र आने के बाद कार्य रोक दिए गए हैं। अब स्मार्ट सिटी के तहत ही कार्य होंगे।
आलोक श्रीवास्तव, एक्सईएन, निर्माण विभाग, नगर निगम।
एबीडी क्षेत्र में सीवर और छोटी सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी जल निगम को मिली है। ऐसे में नगर निगम के निर्माण विभाग को पत्र लिखकर उनके द्वारा कराए जा रहे कार्य रुकवाए गए हैं। दोबारा सीवर लाइन डालने की बात करें तो ऐसा केवल उन जगहों पर हुआ है जहां पुरानी लाइन का लेवल नीचे चला गया है या फिर वह खराब हो चुकी है। रही बात कम चौड़ाई का पाइप डालने की तो जल निगम कंप्यूटराइज्ड डिजाइन कराकर ही पाइप डलवा रहा है। एसटीपी के लिए जमीन के प्रस्ताव लिए गए हैं।
वेदपाल सिंह, सहायक अभियंता, जल निगम।

आवास विकास में सीवर पाईप लाइन का डाला गया सामान- फोटो : SAHARANPUR