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मोहर्रम पर अकीदतमंदों ने जंजीरों में बंधी छुरियों से शरीर को जख्मी किया
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 10 Oct 2016 03:44 PM IST
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मातमी जुलूस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में मोहर्रम की 7 तारीख को हजरत इमाम कासिम अलैहिस्सलाम की याद में मोहर्रम का मातमी जुलूस पूरी अकीदत से निकाला गया। अकीदतमंदों ने जंजीरों में बंधी छुरियों से शरीर को जख्मी किया।
करबला के शहीद हजरत कासिम अलैहिस्सलामकी याद में 7 मोहर्रम का जुलूस मातमी माहौल में पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस मोहल्ला जाफर नवाज स्थित बड़ी इमाम बारगाह से शुरू होकर आर्य कन्या इंटर कॉलेज, मटिया महल, मोरगंज, भगत सिंह चौक, बड़तला यादगार, दीनानाथ
बाजार, पुराना बाजार, सराफा बाजार, मोहल्ला मुत्रीबान, नखासा बाजार होता हुआ छोटी दमाम बारगाह अंसारियान पहुंचकर कुछ देर रुकने के बाद जुलूस वापस चला। जो बड़तला अंसारियान, मोहल्ला संज्ञान, गौरी शंकर बाजार, मस्जिद शेख फारुख, नया बाजार, जामा मस्जिद कला, पुल सब्जी
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मंडी होता हुआ बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में अकीदतमंदों ने जंजीरों में बंधी छुरियों, कमाह एवं हाथ से अपने शरीर को जख्मी किया। या हुसैन की सदाएं हवा में गूंज रही थी।
जुलूस में सबसे पीछे जुलजना चल रहा था। जिसकी लगाम ख्वाजा हसन मोहम्मद, कैसर अब्बास, मुनीर अब्बास ने पकड़ रखी थी। संचालन बड़ी इमामबारगाह के प्रबंधक डॉक्टर अथर अब्बास जैदी ने किया।
अंजुमने इमामिया में नौहा पढ़ने वालों में मिर्जा अयाज, मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मिर्जा मुम्ताज, शौजब रजा रहे। अंजुमने अकबरिया में नौहा पढ़ने वालों सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, रहबर जैदी, सन्नी आब्दी, मानू आब्दी, अदनान, गयाज जैदी, शबीह हैदर शामिल रहे।
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करबला के शहीद हजरत कासिम अलैहिस्सलामकी याद में 7 मोहर्रम का जुलूस मातमी माहौल में पूरी अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस मोहल्ला जाफर नवाज स्थित बड़ी इमाम बारगाह से शुरू होकर आर्य कन्या इंटर कॉलेज, मटिया महल, मोरगंज, भगत सिंह चौक, बड़तला यादगार, दीनानाथ
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बाजार, पुराना बाजार, सराफा बाजार, मोहल्ला मुत्रीबान, नखासा बाजार होता हुआ छोटी दमाम बारगाह अंसारियान पहुंचकर कुछ देर रुकने के बाद जुलूस वापस चला। जो बड़तला अंसारियान, मोहल्ला संज्ञान, गौरी शंकर बाजार, मस्जिद शेख फारुख, नया बाजार, जामा मस्जिद कला, पुल सब्जी
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मंडी होता हुआ बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में अकीदतमंदों ने जंजीरों में बंधी छुरियों, कमाह एवं हाथ से अपने शरीर को जख्मी किया। या हुसैन की सदाएं हवा में गूंज रही थी।
जुलूस में सबसे पीछे जुलजना चल रहा था। जिसकी लगाम ख्वाजा हसन मोहम्मद, कैसर अब्बास, मुनीर अब्बास ने पकड़ रखी थी। संचालन बड़ी इमामबारगाह के प्रबंधक डॉक्टर अथर अब्बास जैदी ने किया।
अंजुमने इमामिया में नौहा पढ़ने वालों में मिर्जा अयाज, मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मिर्जा मुम्ताज, शौजब रजा रहे। अंजुमने अकबरिया में नौहा पढ़ने वालों सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, रहबर जैदी, सन्नी आब्दी, मानू आब्दी, अदनान, गयाज जैदी, शबीह हैदर शामिल रहे।