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दलहन, तिलहन की तरह बढ़ाया जाए गेहूं की फसल का एमएसपी

Tue, 22 Sep 2020 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2020 11:36 PM IST
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Pulses should be increased like oilseeds, MSP of wheat crop
हाजी अब्बास चौधरी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। केंद्र सरकार ने रबी की फसलों का एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया है, जिसे किसानों ने फसल की लागत और महंगाई को देखते हुए नाकाफी बताया है। किसानों ने कहा गेहूं के एमएसपी में 50 रुपये की बढ़ोत्तरी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। गेहूं की फसलों का एमएसपी भी दल और तिलहन फसलों की तरह बढ़ाया जाना चाहिए।
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गेहूं में 250 रुपये प्रति क्विंटल हो बढ़ोत्तरी
देवबंद। भारतीय किसान संघ के प्रदेश संयोजक श्यामवीर त्यागी ने कहा गेहूं के एमएसपी में सिर्फ 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की, जबकि सरसों, चना और मसूर की तरह गेहूं में भी 250 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी की जानी चाहिए थी। इस घोषणा से किसानों को यह डर है कि कहीं सरकार समर्थन मूल्य को समाप्त ही न कर दें। प्रगतिशील किसान चौधरी रामस्वरूप, चौधरी पहल सिंह और महेंद्र सिंह ने कहा जहां सरकार ने गन्ने के एफआरपी में मामूली बढ़ोतरी कर किसानों के साथ छलावा किया, वहीं गेहूं के एमएसपी में 50 रुपये की बढ़ोतरी बहुत कम है। गंझेड़ी के किसान मोहम्मद इस्तखार, महबूब त्यागी और इकराम अंसारी ने कहा कृषि विधेयकों के बाद मंडी व्यवस्था सहित एमएसपी और फसलों की सरकारी खरीद बंद हो जाएगी।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य बेहद कम - ठा. कुशल
छुटमलपुर। क्षेत्र के गांव बेहड़ा संदल सिंह के किसान ठाकुर कुशल पाल सिंह का कहना है कि लागत को देखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य बेहद कम है। खाद, बीज, पानी, जुताई आदि सभी की लागत बढ़ी है। इससे किसानों की दशा में कोई सुधार होने वाला नहीं है। गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में कम से कम सौ रुपये की बढ़ोतरी जरूरी थी।
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किसानों के साथ छलावा किया - अरुण
नागल। क्षेत्र के किसान गांव बढेड़ी कोली निवासी अरुण नोसरान ने बताया कि पिछले दिनों में बिजली के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। खाद पर भी रेट बढ़े हैं, डीजल भी महंगा हो गया है। मजदूरी भी पिछले साल की अपेक्षा बढ़ी है। सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में केवल रुपये 50 बढ़ाकर किसानों के साथ छलावा किया है।
गेहूं पर बढ़ोतरी नाकाफी - सईद
साढ़ौली कदीम। क्षेत्र के गांव सलेमपुर गदा निवासी किसान सईद रावत का कहना है कि गेहूं पर बढ़ोतरी नाकाफी है। सरकार खरीद की व्यवस्था में सुधार करें। पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह मंडी व्यवस्था कर किसान को फसल बेचने की छूट दे। डीजल, खाद एवं खरपतवार नाशक की कीमतों में लगातार भारी बढ़ोतरी हो रही है। उसी को ध्यान रख अनाज की कीमतों में भी वृद्धि की जानी चाहिए।
एमएसपी 50 रुपये बढ़ाना ऊंट के मुंह में जीरे के समान - हाजी अब्बास
नानौता। क्षेत्र के किसान हाजी अब्बास चौधरी ने कहा कि सरकार द्वारा एमएसपी 50 रुपये बढ़ाना ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। किसानों को उनकी फसल की लागत के हिसाब से कम से कम 200 रुपये एमएसपी बढ़ाकर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देश में किसान की आर्थिक स्थिति पहले ही दयनीय है। एमएसपी में नाममात्र की बढ़ोतरी किसान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

लागत के हिसाब से समर्थन मूल्य बहुत कम - सुधीर जैन
चिलकाना। क्षेत्र के किसान सुधीर कुमार जैन ने कहा लागत के हिसाब से समर्थन मूल्य बहुत कम है। गेहूं का समर्थन मूल्य कम से कम 250 रुपये बढ़ाया जाना चाहिए था। फसलों का मूल्य कम होने से किसान साहूकारों के चंगुल में फंसता जा रहा है। कृषि प्रधान देश होने के बावजूद किसानों की दशा खराब है।

अरुण नोसरान

अरुण नोसरान- फोटो : SAHARANPUR

शईद रावत

शईद रावत- फोटो : SAHARANPUR

सुधीर कुमार जैन

सुधीर कुमार जैन- फोटो : SAHARANPUR

ठा कुशलपाल सिंह

ठा कुशलपाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

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