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22 माह तक बिना वेतन के ही काम करते रहे परियोजना अधिकारी
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22 माह तक बिना वेतन के ही काम करते रहे परियोजना अधिकारी
सहारनपुर। डूडा सहारनपुर में परियोजना अधिकारी बनकर 22 माह 12 दिन नौकरी करने वाले डॉ. अनुज प्रताप सिंह सूडा में अभी तक अपनी सर्विस बुक और एलपीजी जमा नहीं करा सके थे। जिसकी वजह से उन्हें अभी तक एक भी माह का वेतन नहीं मिला। यह जानकारी डूडा के लोगों से मिली है।
डूडा के लोगों ने बताया कि चूंकि डॉ. अनुज प्रताप सिंह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज में संविदा पर पढ़ाते थे। ऐसे में उनके पास कोई सर्विस बुक नहीं थी। ना ही उनके पास एलपीजी थी। प्रतिनियुक्ति पर सहारनपुर में तैनाती होते ही उनसे सर्विस बुक और एलपीजी जमा कराने को कहा गया था, लेकिन वह टाल मटोल करते रहे। जिसकी वजह से उनका वेतन नहीं निकल पाया। सूडा के अधिकारियों को उन पर तभी शक हो गया था। सूडा के अधिकारियों ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर इसकी जानकारी भी लेनी चाही थी, लेकिन उसके बाद कोरोना संक्रमण आ गया। तीन माह के संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चीजें पूरी तरह बंद हो गईं। इसके बाद कुछ समय के लिए माहौल सामान्य हुआ, लेकिन फिर दूसरी लहर आ गई। ऐसे में मामला लटकता चला गया। बीते एक साल से सूडा के अधिकारी मामले में लगेे थे। दावा किया जा रहा है कि डॉ. अनुज बिना वेतन के ही 22 माह तक काम करते रहे।
3,600 आवेदकों की पात्रता की जांच
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महानगर में अभी तक करीब 18,000 आवास बनकर तैयार होना बताया गया है। यह आवास 2014 से अभी तक बने हैं। डॉ. अनुज प्रताप सिंह के परियोजना अधिकारी रहने के कार्यकाल में 3,600 नए आवासों की डीपीआर बनकर तैयार हो गई थी। शासन से स्वीकृति मिल गई है। विभाग से जानकारी मिली है कि जिला अधिकारी के द्वारा इन 3,600 लोगों की पात्रता की जांच कराई जा रही है, जो नगर निगम के अधिकारी कर रहे हैं। इसके अलावा डॉ. अनुज प्रताप के कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए बजट की मांग की गई थी, लेकिन कोरोना की वजह से बजट नहीं मिल सका। अब दूसरी लहर के बाद 2.5 करोड़ रुपया मिला है, लेकिन आचार संहिता की वजह से उसका उपयोग नहीं हो सका है।
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सहारनपुर। डूडा सहारनपुर में परियोजना अधिकारी बनकर 22 माह 12 दिन नौकरी करने वाले डॉ. अनुज प्रताप सिंह सूडा में अभी तक अपनी सर्विस बुक और एलपीजी जमा नहीं करा सके थे। जिसकी वजह से उन्हें अभी तक एक भी माह का वेतन नहीं मिला। यह जानकारी डूडा के लोगों से मिली है।
डूडा के लोगों ने बताया कि चूंकि डॉ. अनुज प्रताप सिंह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज में संविदा पर पढ़ाते थे। ऐसे में उनके पास कोई सर्विस बुक नहीं थी। ना ही उनके पास एलपीजी थी। प्रतिनियुक्ति पर सहारनपुर में तैनाती होते ही उनसे सर्विस बुक और एलपीजी जमा कराने को कहा गया था, लेकिन वह टाल मटोल करते रहे। जिसकी वजह से उनका वेतन नहीं निकल पाया। सूडा के अधिकारियों को उन पर तभी शक हो गया था। सूडा के अधिकारियों ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर इसकी जानकारी भी लेनी चाही थी, लेकिन उसके बाद कोरोना संक्रमण आ गया। तीन माह के संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चीजें पूरी तरह बंद हो गईं। इसके बाद कुछ समय के लिए माहौल सामान्य हुआ, लेकिन फिर दूसरी लहर आ गई। ऐसे में मामला लटकता चला गया। बीते एक साल से सूडा के अधिकारी मामले में लगेे थे। दावा किया जा रहा है कि डॉ. अनुज बिना वेतन के ही 22 माह तक काम करते रहे।
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3,600 आवेदकों की पात्रता की जांच
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत महानगर में अभी तक करीब 18,000 आवास बनकर तैयार होना बताया गया है। यह आवास 2014 से अभी तक बने हैं। डॉ. अनुज प्रताप सिंह के परियोजना अधिकारी रहने के कार्यकाल में 3,600 नए आवासों की डीपीआर बनकर तैयार हो गई थी। शासन से स्वीकृति मिल गई है। विभाग से जानकारी मिली है कि जिला अधिकारी के द्वारा इन 3,600 लोगों की पात्रता की जांच कराई जा रही है, जो नगर निगम के अधिकारी कर रहे हैं। इसके अलावा डॉ. अनुज प्रताप के कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए बजट की मांग की गई थी, लेकिन कोरोना की वजह से बजट नहीं मिल सका। अब दूसरी लहर के बाद 2.5 करोड़ रुपया मिला है, लेकिन आचार संहिता की वजह से उसका उपयोग नहीं हो सका है।
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