फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Principles of the body given new equations signals

निकाय की रणनीति ने दिए नए समीकरणों के संकेत

Sat, 02 Dec 2017 12:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sat, 02 Dec 2017 12:42 AM IST
विज्ञापन
Principles of the body given new equations signals
मतगणना करते हुए कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में विधानसभा चुनाव के ठीक बाद हुए निकाय चुनाव में राजनीतिक दलों की रणनीति से जिले की सियासत में नए समीकरण के संकेत मिल रहे हैं। इस चुनाव में भले ही बसपा नगर निगम के मेयर की दौड़ में पिछड़ गई, मगर भाजपा को रोकने के लिए मुस्लिमों ने बसपा के फार्मूले को अमल किया।
विज्ञापन


यही कारण है कि निकायों में बसपा सभी दलों से आगे रही। शहरी इलाके में भाजपा की जीत के पीछे हिन्दू मतों की एकजुटता बड़ा कारण रहा है। हालांकि कांग्रेस की मजबूती ने इमरान मसूद की मुस्लिमों की पकड़ को साबित किया है।
विज्ञापन


मगर, गठबंधन की गांठ खुलते ही सपा और कांग्रेस की सियासी जमीन कमजोर हो गई है। जबकि भाजपा को रोकने में जुटे मुसलमानों ने नए विकल्प के संकेत दिए हैं। ऐसे में दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में नए समीकरणों से इनकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


करीब आठ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में सहारनपुर में भाजपा का विजय रथ धीमा पड़ गया था। उस वक्त गठबंधन ने सात में तीन सीटों पर कब्जा जमा लिया था, जबकि पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा की रथ पूरी रफ्तार में था। विधानसभा चुनाव के ठीक बाद सहारनपुर हिंसा ने सरकार की किरकिरी कराई और सियासी जमीन कमजोर हो रही बसपा को संजीवनी मिल गई।

सहारनपुर हिंसा के बाद से ही विपक्षी राजनीतिक दल दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावनाएं तलाशने में जुट गई थी। हिंसा में दलितों के बीच मजबूत बनकर उभरी भीम आर्मी के जरिए कांग्रेस यहां सेंधमारी करना चाहती थी।

उधर, बसपा किसी कीमत पर दलितों में फाड़ नहीं होने की कवायद में रही। यही कारण है कि बसपा सुप्रीमो मायावती सड़क मार्ग से सहारनपुर पहुंची और दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर ही राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। ऐसे मेें दलितों की सहानुभूति पूरी तरह से फिर से बसपा के साथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। 

विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने पूरे जोर के साथ गठबंधन का साथ दिया, मगर वे प्रदेश की सत्ता से भाजपा को नहीं रोक पाए। ऐसे में बसपा के गढ़ में मुस्लिमों के साथ आने से पार्टी को मजबूती मिली है, मगर यह कांग्रेस और सपा के लिए अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते हैं।

यही कारण है कि मुस्लिम मतों के जरिए विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में रही कांग्रेस को केवल तीन और सपा को एक निकाय में जीत मिली। जबकि छह निकायों में बसपा ने अपना परचम लहराया। इसके पीछे सीधे तौर कांग्रेस और सपा के बेस वोट बैंक मुस्लिमों केे बसपा के पाले में जाना माना जा रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव के रिहर्सल के रुप में देखे जा रहे निकाय चुनाव में बसपा का फार्मूला काफी हद तक सकरात्मक संकेत दे गया। 


मेरठ नगर निगम में जीत और सहारनपुर में मिली मामूली हार से मुसलमान ज्यादा एकजुट हो सकते हैं। यहां बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में करीब चार लाख मत हासिल करने वाले पूर्व विधायक इमरान मसूद उनके हीरो के रुप में उभरे। मगर, निकाय चुनाव में बसपा से 11 में छह निकायों पर मुस्लिम चेहरों को तवज्जों देकर अपने फार्मूले का लिटमस टेस्ट कर लिया है। ऐसे में आने वाले समय में सहारनपुर सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश में नए समीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed