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नई प्रजातियों से कोशा 0238 को रिप्लेस करने की तैयारी
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सहारनपुर। लाल सड़न रोग के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए गन्ना विभाग किसानों और शुगर मिलों के लिए लाभकारी गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति को नई प्रजातियों से रिप्लेस करने की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए मंडल में नवीनतम अगेती प्रजातियों कोलक-14201 और सीओएस -13235 प्रजातियों की भी 74.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधशालाएं बनाई गई हैं। अगले सीजन में इस पौधशालाओं से किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
मंडल में करीब 3.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। इसमें गन्ना प्रजाति सीओ-0238 का क्षेत्रफल 90 फीसदी से अधिक है। बढ़िया उत्पादन के चलते यह प्रजाति किसानों और अच्छी शुगर रिकवरी के चलते चीनी मिलों को काफी पसंद है, लेकिन पिछले कुछ समय से गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति रोग की चपेट में है। पूर्वी एवं मध्य उत्तर प्रदेश में इस प्रजाति में लाल सड़न का प्रकोप बढ़ने से किसानों के साथ गन्ना विभाग भी परेशान है। अब गन्ना विभाग इस प्रजाति को बदलने की तैयारी में जुट गया है। इसके स्थान पर नवीनतम अगेती प्रजातियों की बुआई पर फोकस रहेगा। इनमें मुख्यतया कोलक- 1402, कोशा एस- 13235 सहित अन्य उन्नतशील प्रजातियां शामिल हैं।
नई प्रजातियों की खासियत
सीओ- 0238 को नवीनतम गन्ना प्रजातियों से रिप्लेस किया जाएगा। नई प्रजातियां न सिर्फ अगेती हैं बल्कि उत्पादन और चीनी परता में भी बेहतर हैं। इन प्रजातियों में तुुलनात्मक रूप से रोग प्रतिरोधी क्षमता अधिक और लाल सड़न रोग से मुक्त हैं। इसके अलावा इन प्रजातियों में चीनी परता, पौधे और पेड़ी का उत्पादन भी बढ़िया है। इसके चलते किसानों में ये प्रजातियां जल्द ही लोकप्रिय होने की उम्मीद है।
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गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति में लाल सड़न आदि रोग के बढ़ने के चलते इसे नवीनतम गन्ना प्रजातियों से रिप्लेस कराया जाएगा। इसके लिए अन्य नई प्रजातियों के साथ ही मंडल में कोलक-14201 प्रजाति की साढे़ पांच हेक्टेयर और सीओएस -13235 प्रजाति की 69 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधशालाएं तैयार की हैं। आगामी सीजन में पौधशालाओं से किसानों को बीज का वितरण किया जाएगा। जिससे आने वाले समय में इन प्रजातियों का क्षेत्रफल बढ सकेगा। --- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।
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मंडल में करीब 3.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। इसमें गन्ना प्रजाति सीओ-0238 का क्षेत्रफल 90 फीसदी से अधिक है। बढ़िया उत्पादन के चलते यह प्रजाति किसानों और अच्छी शुगर रिकवरी के चलते चीनी मिलों को काफी पसंद है, लेकिन पिछले कुछ समय से गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति रोग की चपेट में है। पूर्वी एवं मध्य उत्तर प्रदेश में इस प्रजाति में लाल सड़न का प्रकोप बढ़ने से किसानों के साथ गन्ना विभाग भी परेशान है। अब गन्ना विभाग इस प्रजाति को बदलने की तैयारी में जुट गया है। इसके स्थान पर नवीनतम अगेती प्रजातियों की बुआई पर फोकस रहेगा। इनमें मुख्यतया कोलक- 1402, कोशा एस- 13235 सहित अन्य उन्नतशील प्रजातियां शामिल हैं।
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नई प्रजातियों की खासियत
सीओ- 0238 को नवीनतम गन्ना प्रजातियों से रिप्लेस किया जाएगा। नई प्रजातियां न सिर्फ अगेती हैं बल्कि उत्पादन और चीनी परता में भी बेहतर हैं। इन प्रजातियों में तुुलनात्मक रूप से रोग प्रतिरोधी क्षमता अधिक और लाल सड़न रोग से मुक्त हैं। इसके अलावा इन प्रजातियों में चीनी परता, पौधे और पेड़ी का उत्पादन भी बढ़िया है। इसके चलते किसानों में ये प्रजातियां जल्द ही लोकप्रिय होने की उम्मीद है।
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गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति में लाल सड़न आदि रोग के बढ़ने के चलते इसे नवीनतम गन्ना प्रजातियों से रिप्लेस कराया जाएगा। इसके लिए अन्य नई प्रजातियों के साथ ही मंडल में कोलक-14201 प्रजाति की साढे़ पांच हेक्टेयर और सीओएस -13235 प्रजाति की 69 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधशालाएं तैयार की हैं। आगामी सीजन में पौधशालाओं से किसानों को बीज का वितरण किया जाएगा। जिससे आने वाले समय में इन प्रजातियों का क्षेत्रफल बढ सकेगा। --- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।