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धार्मिक यात्राओं पर हादसों का साया..., कब तक
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:28 AM IST
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हादसे में मौतों पर बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में धार्मिक यात्राओं पर हादसों का काला साया पहले भी कई बार पड़ चुका है। इनमें श्रद्धालुओं को अकाल मौत का शिकार होना पड़ा है। चालाकपुर के दिल दहला देने वाले मंजर ने एकबार फिर पुरानी घटनाओं के जख्म ताजा कर दिए हैं।
साथ ही यह सोचने का भी मजबूर कर दिया कि आखिर कब तक हम इन हादसों के शिकार होते रहेंगे। इन्हें रोकने के लिए गंभीरता से ठोस प्रयास करने की जरूरत है।
अतीत में जाए तो तीन साल पहले बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र के गांव नौरंगपुर से डाट काली माता पर भंडारा देने जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर ट्राली मोहंड से पहले खाई में पलट गई थी।
इस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 15 से ज्यादा घायल हो गए थे। एक साल पूर्व बड़गांव क्षेत्र के गाडेवाला गांव के बागड़ यात्रा के श्रद्धालु चाब लेकर नकुड़ के गांव टाबर जा रहे थे कि इनके छोटे हाथी वाहन को ट्रक ने टक्कर मार दी थी।
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इस हादसे में चार श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा घायल हो गए थे। पिछले साल ही शाकंभरी देवी जा रहे श्रद्धालुओं का पिक अप वाहन गंगोह के दूधला के पास पलट गया था, जिसमें दो श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
चालाकपुर की घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर विवश कर दिया कि आखिर इन हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हम कब सजग होंगे। इन हादसों के लिए कई बार ओवर स्पिडिंग, ज्यादा सवारी बैठना या फिर वाहनों की खस्ताहालत भी जिम्मेदार होती है।
लोगों को चाहिए कि वे यात्रा पर निकलने से पहले वाहन की दशा, प्रशिक्षित चालक का तो ध्यान रखें ही निर्धारित क्षमता से ज्यादा सवारी भी वाहन में न बैठाएं ताकि इन हादसों को टाला जा सके।
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साथ ही यह सोचने का भी मजबूर कर दिया कि आखिर कब तक हम इन हादसों के शिकार होते रहेंगे। इन्हें रोकने के लिए गंभीरता से ठोस प्रयास करने की जरूरत है।
अतीत में जाए तो तीन साल पहले बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र के गांव नौरंगपुर से डाट काली माता पर भंडारा देने जा रहे श्रद्धालुओं की ट्रैक्टर ट्राली मोहंड से पहले खाई में पलट गई थी।
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इस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 15 से ज्यादा घायल हो गए थे। एक साल पूर्व बड़गांव क्षेत्र के गाडेवाला गांव के बागड़ यात्रा के श्रद्धालु चाब लेकर नकुड़ के गांव टाबर जा रहे थे कि इनके छोटे हाथी वाहन को ट्रक ने टक्कर मार दी थी।
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इस हादसे में चार श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा घायल हो गए थे। पिछले साल ही शाकंभरी देवी जा रहे श्रद्धालुओं का पिक अप वाहन गंगोह के दूधला के पास पलट गया था, जिसमें दो श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
चालाकपुर की घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर विवश कर दिया कि आखिर इन हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हम कब सजग होंगे। इन हादसों के लिए कई बार ओवर स्पिडिंग, ज्यादा सवारी बैठना या फिर वाहनों की खस्ताहालत भी जिम्मेदार होती है।
लोगों को चाहिए कि वे यात्रा पर निकलने से पहले वाहन की दशा, प्रशिक्षित चालक का तो ध्यान रखें ही निर्धारित क्षमता से ज्यादा सवारी भी वाहन में न बैठाएं ताकि इन हादसों को टाला जा सके।