फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Politics Heats Up Over Case Against MP; Issue to be Raised in Lok Sabha

Saharanpur News: सांसद पर मुकदमे को लेकर सियासत गरम, लोकसभा में उठेगा मुद्दा

Sat, 23 May 2026 01:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sat, 23 May 2026 01:02 AM IST
विज्ञापन
Politics Heats Up Over Case Against MP; Issue to be Raised in Lok Sabha
सहारनपुर। कैराना सांसद इकरा हसन पर दर्ज मुकदमे को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सांसद ने मामले को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए साफ कहा है कि वह किसी भी दबाव में आने वाली नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। इस पूरे प्रकरण को लोकसभा में उठाया जाएगा।
विज्ञापन

सांसद इकरा हसन ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूरे मामले की जानकारी ली है। उन्होंने एफआईआर की प्रति भी मांगी है। इकरा हसन ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। अगर प्रशासन को लगता है कि इस तरह के मुकदमों से वह डर जाएंगी या चुप बैठ जाएंगी, तो यह उनकी गलतफहमी है। वह पीड़ितों की आवाज उठाती रहेंगी। इस पूरे प्रकरण को लोकसभा में उठाया जाएगा, इसके साथ ही लखनऊ में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की जाएगी। बता दें, कि 19 मई को सपा सांसद इकरा हसन शामली के जसाला गांव में मोनू कश्यप हत्याकांड के मामले में मृतक की मां के साथ डीआइजी से मिलने पहुंचीं थीं। बाहर निकलने पर आरोप लगा कि उन्होंने समर्थकों के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था बिगाड़ी है। पुलिस ने सांसद समेत सात नामजद और 20-25 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन


इन धाराओं में है प्राथमिकी दर्ज
भारतीय न्याय संहिता की धारा-126 (2) इस धारा में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को एक महीने की सजा और जुर्माना हो सकता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा-132 के तहत लोक सेवकों को कर्तव्यों का पालन करने से रोकने या डराने के उद्देश्य से उन पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने से संबंधित है। इसमें दो साल तक की सजा हो सकती है। इसी तरह भारतीय न्याय संहिता की धारा-191 (2) दंगे से संबंधित है। दोषी पाए जाने पर दो साल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा-221 के तहत सरकारी कार्य में बाधा डालना। दोषी पाए जाने पर तीन माह की सजा और जुर्माना हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गरीबों की आवाज उठाना गुनाह नहीं
वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता फरहाद आलम गाडा ने भी पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सांसद इकरा हसन पीड़ितों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं, लेकिन प्रशासन ने मदद करने के बजाय उनके साथ ही सख्त रवैया अपनाया।

उधर, सपा नेता टिंकू अरोड़ा ने भी सांसद पर दर्ज मुकदमे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के दौरान विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। मृतक परिवार को न्याय दिलाने की मांग करने वालों पर ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed