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मानसिक रूप से मजबूत होंगे पुलिसकर्मी
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सहारनपुर। लंबी ड्यूटी और परिवार से दूर रहने की वजह से अवसाद के शिकंजे में आ रहे पुलिसकर्मियों को मानसिक रूप से मजबूत किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा मानसिक रोग विशेषज्ञों की एक टीम समय-समय पर पुलिसकर्मियों की काउंसिलिंग करेगी। इसके साथ ही एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा, जिसके जरिए कोई पुलिसकर्मी डिप्रेशन में इलाज के लिए मदद ले सकेगा।
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब डिप्रेशन का शिकार होने पर पुलिसकर्मियों ने आत्मघाती कदम उठाने से गुरेज नहीं किया है। विभाग के मुताबिक, वहीं ऐसे भी कई पुलिसकर्मी हैं, जो लंबी ड्यूटी और परिवार से दूर रहने की वजह से अवसाद के शिकंजे में फंसे हैं और उनका इलाज भी लंबे समय तक चला है, जिसकी वजह से इन पुलिसकर्मियों को लंबी छुट्टी भी दी गई है, लेकिन अब शासन के निर्देशानुसार हर सप्ताह सभी पुलिसकर्मियों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए काउंसिलिंग की जाएगी। इसको लेकर डाक्टरों की टीम पुलिसकर्मियों को ऑनलाइन डिप्रेशन से बचाव और दिनचर्या को गुुजारने का तरीका सिखाएंगे। इसके साथ ही ड्यूटी के समय मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखने के बारे में भी बताया जाएगा। इसको लेकर एसएसपी आकाश तोमर के निर्देशन में रूपरेखा तैयार भी कर ली गई है।
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बढ़ रहे डिप्रेशन के रोगी
आधुनिकता के दौर में लोगों की दिनचर्या में आए बदलाव से मानसिक रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। इनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली और डॉ. एजाज अहमद का कहना है कि मानसिक रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। डिप्रेशन से बचाव के लिए इन लोगों को काउंसिलिंग, अपनों के साथ और इलाज की जरूरत है। इसके साथ ही डिप्रेशन के प्रति समाज में जागरूकता की भी बहुत जरूरत है। ताकि कोई भी मानसिक तनाव की वजह से घातक कदम न उठाएं।
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ऐसे करें बचाव
-- आठ से दस घंटे की नींद लें
-- घर में अकेले न रहें और खुद व्यस्त रखें
-- कोई दिक्कत है तो परिवार के सदस्यों से बात करें
-- मनोरंजन के लिए घूमने जाएं या संगीत सुने
-- किसी भी तरह के नशे से दूर रहें
-- स्थिति खराब है तो चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं
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यह हैं डिप्रेशन के लक्षण
-- नींद न आना, अकेले रहने का मन करना
-- घबराहट होना, भूख न लगना
-- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
-- मन में खुदकशी के विचार आना
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अवसाद की वजह से मौत को लगाया गले
-- देवबंद क्षेत्र में सिपाही ने गोली मारकर आत्महत्या की
-- मल्हीपुर रोड पर रहने वाले यातायात सिपाही ने फांसी लगाई
-- चिलकाना रोड निवासी रिटायर पुलिसकर्मी ने खुद को गोली मारी
- घंटाघर स्थित एक होटल में लटका मिला था उत्तराखंड के सिपाही का शव
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मिलेगा आराम का पर्याप्त समय और छुट्टी
मानसिक तनाव से पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए हर बिंदु पर प्लान तैयार किया गया है। एसएसपी आकाश तोमर का कहना है कि पुलिसकर्मियों की हर संभव मदद की जाएगी। निर्धारित समय में ही उनसे ड्यूटी कराई जाएगी। आराम करने का समय पर्याप्त दिया जाएगा और परिवार से मिलने के लिए छुट्टी भी दी जाएगी। रोस्टर बनाकर पुलिसकर्मियों से काम कराएंगे, जिससे काम का दबाव पुलिसकर्मियों पर न पड़े। इन सभी बिंदुओं पर प्लान बनाया गया है।
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ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब डिप्रेशन का शिकार होने पर पुलिसकर्मियों ने आत्मघाती कदम उठाने से गुरेज नहीं किया है। विभाग के मुताबिक, वहीं ऐसे भी कई पुलिसकर्मी हैं, जो लंबी ड्यूटी और परिवार से दूर रहने की वजह से अवसाद के शिकंजे में फंसे हैं और उनका इलाज भी लंबे समय तक चला है, जिसकी वजह से इन पुलिसकर्मियों को लंबी छुट्टी भी दी गई है, लेकिन अब शासन के निर्देशानुसार हर सप्ताह सभी पुलिसकर्मियों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए काउंसिलिंग की जाएगी। इसको लेकर डाक्टरों की टीम पुलिसकर्मियों को ऑनलाइन डिप्रेशन से बचाव और दिनचर्या को गुुजारने का तरीका सिखाएंगे। इसके साथ ही ड्यूटी के समय मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखने के बारे में भी बताया जाएगा। इसको लेकर एसएसपी आकाश तोमर के निर्देशन में रूपरेखा तैयार भी कर ली गई है।
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बढ़ रहे डिप्रेशन के रोगी
आधुनिकता के दौर में लोगों की दिनचर्या में आए बदलाव से मानसिक रोगियों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। इनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली और डॉ. एजाज अहमद का कहना है कि मानसिक रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। डिप्रेशन से बचाव के लिए इन लोगों को काउंसिलिंग, अपनों के साथ और इलाज की जरूरत है। इसके साथ ही डिप्रेशन के प्रति समाज में जागरूकता की भी बहुत जरूरत है। ताकि कोई भी मानसिक तनाव की वजह से घातक कदम न उठाएं।
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ऐसे करें बचाव
-- आठ से दस घंटे की नींद लें
-- घर में अकेले न रहें और खुद व्यस्त रखें
-- कोई दिक्कत है तो परिवार के सदस्यों से बात करें
-- मनोरंजन के लिए घूमने जाएं या संगीत सुने
-- किसी भी तरह के नशे से दूर रहें
-- स्थिति खराब है तो चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं
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यह हैं डिप्रेशन के लक्षण
-- नींद न आना, अकेले रहने का मन करना
-- घबराहट होना, भूख न लगना
-- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
-- मन में खुदकशी के विचार आना
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अवसाद की वजह से मौत को लगाया गले
-- देवबंद क्षेत्र में सिपाही ने गोली मारकर आत्महत्या की
-- मल्हीपुर रोड पर रहने वाले यातायात सिपाही ने फांसी लगाई
-- चिलकाना रोड निवासी रिटायर पुलिसकर्मी ने खुद को गोली मारी
- घंटाघर स्थित एक होटल में लटका मिला था उत्तराखंड के सिपाही का शव
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मिलेगा आराम का पर्याप्त समय और छुट्टी
मानसिक तनाव से पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए हर बिंदु पर प्लान तैयार किया गया है। एसएसपी आकाश तोमर का कहना है कि पुलिसकर्मियों की हर संभव मदद की जाएगी। निर्धारित समय में ही उनसे ड्यूटी कराई जाएगी। आराम करने का समय पर्याप्त दिया जाएगा और परिवार से मिलने के लिए छुट्टी भी दी जाएगी। रोस्टर बनाकर पुलिसकर्मियों से काम कराएंगे, जिससे काम का दबाव पुलिसकर्मियों पर न पड़े। इन सभी बिंदुओं पर प्लान बनाया गया है।