फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Police holding charge sheet for 10 years in case of fraud

धोखाधड़ी के मामले में 10 साल तक चार्जशीट दबाए रही पुलिस

Thu, 13 Feb 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Feb 2020 12:30 AM IST
विज्ञापन
Police holding charge sheet for 10 years in case of fraud
सहारनपुर। मल्हीपुर रोड स्थित जेवी जैन कालेज की जमीन को लेकर धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में दर्ज मामले में सीजेएम कोर्ट ने विवेचना में शामिल पुलिस टीम के साथ ही वरिष्ठ पुलिस अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि वर्ष 2010 में दर्ज केस में आरोप पत्र तैयार करने के बावजूद इसमें इतनी देरी क्यों की गई। इसलिए इस लापरवाही में शामिल उपनिरीक्षक से लेकर अन्य स्तर तक के अफसरों पर कार्रवाई कर सूचना दी जाए।
विज्ञापन

इस प्रकरण में वर्ष 2010 में थाना सदर ने इस मामले में जिंदी, फराह फैज पुत्री हाफिज फैज, विनोद वर्मा, मंजू देवी, राखी वर्मा, अशोक कुमार, हरीश चंद्र, राजवीर सिंह, वंदना गुप्ता, अंजू थरेजा, रमेश चंद, राजेंद्र पंवार, मनवीर सिंह, धर्म सिंह, शिव कुमार, कृपालाल, परमबोस चौहान को आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत आरोपी बनाया था। इस मामले में पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। इस पर इन आरोपियों को समन जारी करते हुए 18 फरवरी की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसएसपी को आदेश दिए कि वे इस मामले में शामिल रहे समस्त पुलिस अफसरों के खिलाफ जांच कर विभागीय कार्यवाही करें और एक माह में इस बारे में अवगत कराएं। इस आदेश की एक प्रति डीआईजी, डीजीपी, उत्तर प्रदेश शासन, प्रमुख सचिव गृह को प्रेषित करने को भी कहा गया।
विज्ञापन

आरोप पत्र तैयार करने के बाद भी नहीं किया दाखिल
पत्रावली का अवलोकन करते हुए कोर्ट के संज्ञान में आया कि 10 सितंबर 2010 को ही इन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया गया था, लेकिन इसे न्यायालय में पेश नहीं किया गया। तत्कालीन सीओ द्वितीय चरण सिंह और थानाध्यक्ष विजेंद्र सिंह यादव ने भी विवेचक को आरोप पत्र पेश करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि विधि में किसी भी स्तर पर पुलिस को मनमानी करने की अनुज्ञा प्रदान नहीं की गई है। लगभग 10 साल तक उपनिरीक्षक से लेकर सीओ स्तर तक के अधिकारी इस मनमानी में शामिल रहे। जिन मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनमें आजीवन कारावास में भी दंड है। ऐसे में विवेचक या किसी भी अधिकारी द्वारा अभियुक्तों के खिलाफ गैरजमानती वारंट या धारा 82 के तहत कार्रवाई का कोई अनुरोध न्यायालय से नहीं किया गया। इससे लगता है कि आरोपियों को लाभ पहुंचाने का मौका दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रसूखदार होने का दिया था हवाला
- इस मामले में विवेचना कर रही टीम और पुलिस अफसरों की ओर से कहा गया कि आरोपी पक्ष रसूखदार रहा। इसके साथ शांति भंग की संभावनाओं को देखते हुए आरोप पत्र दाखिल करने में देरी की गई। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या रसूखदारों की स्थिति में प्रक्रिया में इतना विलंब किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed