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धार्मिक कार्यक्रमों में जिम्मेदारी को समझे लोग
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पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को लेकर हुए लॉकडाउन और अब अनलॉक 04 में 100 लोगों की मौजूदगी में धार्मिक आयोजन की अनुमति का धर्म गुरुओं ने स्वागत किया।
लॉकडाउन 04 में 21 सितंबर से 100 लोगों की मौजूदगी में धार्मिक कार्यक्रम हो सकेंगे। इसको लेकर नायब शहरकाजी नदीम अख्तर ने कहा मुस्लिम समाज के दो बड़े त्योहार ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा तो लॉकडाउन में निकले। सिर्फ पांच-पांच लोगों ही मस्जिदों में नमाज अदा करने की अनुमति रही, जिस कारण पांच से ज्यादा लोग मस्जिदों नहीं जा सके। इस बार ईदगाह में भी नमाज नहीं हुई। अब देर से ही सही सरकार ने 100 लोगों की अनुमति दी, इसका स्वागत है, लेकिन लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। ऐसा कोई काम न करें, जिससे खुद को या दूसरे को तकलीफ पहुंचे।
जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलवी फरीद ने भी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए लोगों से अपील की कि धार्मिक कार्यक्रम में सामाजिक दूरी का पालन करें। बेहट रोड स्थित श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज ने कहा सरकार ने अनुमति तो दे दी, लेकिन कोरोना महामारी की अभी तक कोई दवाई नहीं आई है, इसलिए धार्मिक कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा जाए। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करें। अगर किसी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण की आशंका है, तो वह कार्यक्रम न शामिल होने न जाए और अपनी जिम्मेदारी को समझे।
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प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष और तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय ने कहा कोरोना से जारी जंग में सबका कर्तव्य सरकार की गाइड लाइन का पालन करें। धार्मिक कार्यक्रम पूरी सावधानी के साथ ही आयोजित किए जाएं। ब्रह्मपुरी कॉलोनी निवासी आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने भी लोगों से सरकार के निर्देश का पालन करने अपील की। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के पूरे इंतजाम होने पर ही धार्मिक कार्यक्रम किए जाए। लोगों की संख्या 100 से ज्यादा न होने दें और शारीरिक दूरी का खास ध्यान रखा जाए।
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लॉकडाउन 04 में 21 सितंबर से 100 लोगों की मौजूदगी में धार्मिक कार्यक्रम हो सकेंगे। इसको लेकर नायब शहरकाजी नदीम अख्तर ने कहा मुस्लिम समाज के दो बड़े त्योहार ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा तो लॉकडाउन में निकले। सिर्फ पांच-पांच लोगों ही मस्जिदों में नमाज अदा करने की अनुमति रही, जिस कारण पांच से ज्यादा लोग मस्जिदों नहीं जा सके। इस बार ईदगाह में भी नमाज नहीं हुई। अब देर से ही सही सरकार ने 100 लोगों की अनुमति दी, इसका स्वागत है, लेकिन लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। ऐसा कोई काम न करें, जिससे खुद को या दूसरे को तकलीफ पहुंचे।
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जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलवी फरीद ने भी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए लोगों से अपील की कि धार्मिक कार्यक्रम में सामाजिक दूरी का पालन करें। बेहट रोड स्थित श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज ने कहा सरकार ने अनुमति तो दे दी, लेकिन कोरोना महामारी की अभी तक कोई दवाई नहीं आई है, इसलिए धार्मिक कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा जाए। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करें। अगर किसी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण की आशंका है, तो वह कार्यक्रम न शामिल होने न जाए और अपनी जिम्मेदारी को समझे।
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प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष और तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय ने कहा कोरोना से जारी जंग में सबका कर्तव्य सरकार की गाइड लाइन का पालन करें। धार्मिक कार्यक्रम पूरी सावधानी के साथ ही आयोजित किए जाएं। ब्रह्मपुरी कॉलोनी निवासी आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने भी लोगों से सरकार के निर्देश का पालन करने अपील की। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के पूरे इंतजाम होने पर ही धार्मिक कार्यक्रम किए जाए। लोगों की संख्या 100 से ज्यादा न होने दें और शारीरिक दूरी का खास ध्यान रखा जाए।

काजी नदीम अख्तर- फोटो : SAHARANPUR

रोहित वशिष्ठ- फोटो : SAHARANPUR

मौलवी फरीद- फोटो : SAHARANPUR

अतुल जोशी जी- फोटो : SAHARANPUR