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लोस चुनाव में लोगों ने नफरत की राजनीति को किया खारिज : मदनी
Sun, 23 Jun 2024 03:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 23 Jun 2024 03:31 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने छत्तीसगढ़ और अलीगढ़ में हुई माॅब लिंचिंग की घटनाओं पर गहरा दुख जताया। उन्होंने घटनाओं पर गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में देश के अधिकतर लोगों ने सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति को खारिज कर दिया है, लेकिन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अलीगढ़ और छत्तीसगढ़ की घटनाएं इसका प्रमाण हैं।
शनिवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वर्षों से जो जहर संप्रदायवादियों ने लोगों के जहन में भरा है वह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, उसके परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में बदमाशों ने दरिंदगी और क्रूरता का प्रदर्शन करके मानवता के दामन को दागदार कर दिया है।
मौलाना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बावजूद इस प्रकार की दुखद घटनाओं का सिलसिला रुक नहीं रहा है। अब भी इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं के होने से साफ है कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें कानून का कोई भय नहीं है। मौलाना मदनी ने कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा सामाजिक नहीं, एक राजनीतिक समस्या है और इसे राजनीतिक रूप से ही हल किया जा सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दल इसके खिलाफ खुलकर मैदान में आएं और भीड़ द्वारा हिंसा के खिलाफ कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालें। मौलाना मदनी ने मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरे लोग इससे सबक ले सकें।
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शनिवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वर्षों से जो जहर संप्रदायवादियों ने लोगों के जहन में भरा है वह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, उसके परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में बदमाशों ने दरिंदगी और क्रूरता का प्रदर्शन करके मानवता के दामन को दागदार कर दिया है।
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मौलाना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बावजूद इस प्रकार की दुखद घटनाओं का सिलसिला रुक नहीं रहा है। अब भी इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं के होने से साफ है कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें कानून का कोई भय नहीं है। मौलाना मदनी ने कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा सामाजिक नहीं, एक राजनीतिक समस्या है और इसे राजनीतिक रूप से ही हल किया जा सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दल इसके खिलाफ खुलकर मैदान में आएं और भीड़ द्वारा हिंसा के खिलाफ कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालें। मौलाना मदनी ने मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरे लोग इससे सबक ले सकें।
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