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लक्षणों के आधार पर इलाज करा रहे मरीज

Tue, 11 May 2021 11:25 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 May 2021 11:25 PM IST
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Patients being treated on the basis of symptoms
सहारनपुर। कोरोना मरीजों के इलाज में जांच रिपोर्ट का खासा महत्व है। मगर बड़ी संख्या में मरीजों की जांच रिपोर्ट समय से नहीं आने के चलते मरीज लक्षणों के आधार पर इलाज करा रहे हैं। लखनऊ नमूने भेजने के बाद भी व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं है।
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कोरोना की जांच आरटी-पीसीआर और एंटीजन किट के माध्यम से हो रही है। एंटीजन किट से 10 से 15 मिनट में पता चल जाता है कि मरीज पॉजिटिव है या निगेटिव। मगर आरटी-पीसीआर जांच में काफी लेटलतीफी है। अधिकारियों का कहना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में बनी लैब में आरटी-पीसीआर जांच की क्षमता एक दिन में 1500 की है, जबकि नमूने प्रतिदिन दो हजार से अधिक लिए जा रहे हैं। हालाकि कुछ नमूनों को जांच के लिए लखनऊ भी भेज रहा है, मगर उसके बाद भी अनेक मरीजों की जांच रिपोर्ट आने में पांच से दस दिन या भी कई मरीजों की रिपोर्ट आने में दस दिन से अधिक का समय लग रहा है।
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जलालाबाद निवासी ज्ञानेंद्र में कोरोना के लक्षण थे, जिनको एसबीडी जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। आरटी-पीसीआर जांच के लिए नमूना भेजा गया था। एचआरसीटी थोरेक्स में सीटी नंबर 14 आया था। ऐसे में डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किए बिना लक्षणों के आधार पर इलाज किया, जिससे ज्ञानेंद्र की हालत में काफी सुधार आया, मगर 12 दिन बाद आई जांच रिपोर्ट निगेटिव निकली। इसी प्रकार दराकोटतला निवासी बिट्टू में भी सभी लक्षण थे। आरटी-पीसीआर जांच के लिए आईएमए भवन में नमूना दिया था, मगर रिपोर्ट 13 दिन बाद निगेटिव आई। इससे पहले बिट्टू लक्षणों के आधार पर इलाज करा चुका था, जिसमें उसे 90 फीसदी आराम भी मिला। शिक्षक नेता राजकुमार चौधरी ने 26 अप्रैल को आरटी-पीसीआर जांच के लिए नमूना दिया था, जिनकी रिपोर्ट सात मई को आई। रिपोर्ट आने से पहले उनकी हालत खरबा हो चुकी थी। गनीमत रही कि चिकित्सकों ने लक्षणों के आधार पर सही इलाज किया, जिससे उनकी जान बच सकी।
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नमूने अधिक होने और जांच की क्षमता कम होने की वजह से रिपोर्ट आने में देरी हो रही थी, मगर अब राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में आरटी-पीसीआर जांच की क्षमता बढ़ा दी गई है। इसके बाद हमें नमूने बाहर भेजने की जरूरत नहीं है। कोशिश यही है कि तमाम जांच यहीं पर हों और समय से रिपोर्ट आए।
शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी।
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