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सब्र के बदले मिलती है जन्नत
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मोलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि रमजान का मुबारक महीना गुनाहों से तौबा करने का बेहतरीन मौका है। यह महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है। रोजा रखकर अगर कोई व्यक्ति गलत कमाई के पैसे से इफ्तार करता है तो उसका रोजा अल्लाह की बारगाह में कुबूल नहीं होता है। इसीलिए रोजेदारों को चाहिए कि वह जीवन भर हर ऐसी कमाई से बचने की पूरी फिक्र करें, जिस कमाई का स्त्रोत हराम बताया गया हो।
सवाल- मोहल्ला नूरबस्ती निवासी हाजी मुनव्वर ने पूछा कि रमजान के आखिरी दस दिनो में शब-ए-कदर (रमजान में इबादत की खास रातें) कौन-कौन सी होती हैं। हमें यह रातें कैसे गुजारनी चाहिए।
जवाब-शब-ए-कदर रमजान के आखिरी अशरे में आने वाली बड़ी मुबारक रातें हैं। 21,23,25,27 व 29 वीं शब में पूरी रात अल्लाह की इबादत में गुजारकर अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए।
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सवाल- मोहल्ला नूरबस्ती निवासी हाजी मुनव्वर ने पूछा कि रमजान के आखिरी दस दिनो में शब-ए-कदर (रमजान में इबादत की खास रातें) कौन-कौन सी होती हैं। हमें यह रातें कैसे गुजारनी चाहिए।
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जवाब-शब-ए-कदर रमजान के आखिरी अशरे में आने वाली बड़ी मुबारक रातें हैं। 21,23,25,27 व 29 वीं शब में पूरी रात अल्लाह की इबादत में गुजारकर अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए।
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