{"_id":"587686394f1c1b7840ba828a","slug":"over-the-past-year-no-development-in-the-city","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीते साल दर साल, शहर नहीं चला विकास की चाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीते साल दर साल, शहर नहीं चला विकास की चाल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 12 Jan 2017 01:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लकड़ी पर बारीक नक्काशी की जादुई कारीगरी से सहारनपुर पूरी दुनिया में बेशक अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन विकास के तराजू पर पलड़ा हल्का ही रह गया। विकास के लिए मुद्दे तो लगातार उछलते रहे, वक्त बीतता चला गया, लेकिन मनमाफिक विकास नहीं हुआ और न ही समस्याओं का समाधान ही हो सका।
मंडल होने के बावजूद सहारनपुर की समस्याओं की लगातार अनदेखी ही की जाती रही है। हालांकि वर्तमान विधायक ने ढाई साल के कार्यकाल में कोशिश की और विधानसभा में सहारनपुर के मुद्दों को उठाया। मगर, बड़े मुद्दे तो अभी तक जस की तस बने हुए हैं।
सहारनपुर को नगर निगम बने हुए सात बरस बीत गए, लेकिन अभी तक मेयर से महरूम रहे सहारनपुर को विकास की राह दिखाने वाला कोई नहीं आया। परिसीमन कर आसपास के गांवों को तो नगर निगम ने अपनी जद में ले लिया, लेकिन अभी तक शहर ही संभल नहीं पाया। आज भी एक चौथाई शहर ऐसा है, जहां नगर निगम का पानी तक नहीं पहुंच पाया। शहर की मलिन बस्तियां अधिकारियों के स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहीं हैं।
विज्ञापन
स्मार्ट सिटी बनने का ख्वाब देख रहे सहारनपुर अभी तक शहर की सड़कों पर लगे कूड़े के ढेर तक नहीं हटा पाया है। शहर के बीचोंबीच कोर्ट रोड पुल के दोनों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जबकि इस स्थान का विशेष रूप से सौंदर्यीकरण कराया जाना चाहिए था। इस पुल से होकर न सिर्फ बड़े अधिकारी, बल्कि जनप्रतिनिधि एवं मंत्री तक गुजरते हैं, लेकिन जब भी इस पुल से होकर गुजरते हैं, सभी आंखें और नाक बंद कर लेते हैं।
जबकि, इसके नजदीक बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। रेलवे स्टेशन एवं घंटाघर जाने का मुख्य मार्ग है। सिर्फ इतना ही नहीं दिल्ली रोड पर सड़क किनारे एवं अधिकारियों के आवास के पीछे कूड़े के ढेर से इतनी दुर्गंध उठ रही है कि हाईवे से लोगों का निकलना तक मुश्किल हो चुका है, लोग कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी के कान तक आवाज नहीं पहुंची।
हाईवे को जोड़ती कोर्ट रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़क की हालत ही शहर की हालत को बयां कर रही है। यहां कोई भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसमें गड्ढे न हों और दुर्घटनाएं न हो रही हो। जाम के झाम से शहर को आज तक मुक्ति नहीं मिल पाई, प्राईवेट हो या रोडवेज बस स्टैंड, सड़क पर ही चल रहा है।
शहर का जिला अस्पताल पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। इस अस्पताल में किसी भी गंभीर बीमारी अथवा दुर्घटना के लिए पहुंचने पर उसका उपचार करने की बजाय रेफर करने को ही प्राथमिकता दी जा रही है। कभी दवा न होने का बहाना बनाया जा रहा है तो कभी चिकित्सक न होने का। वर्ष 2012 में भाजपा के राघवलखन पाल शर्मा ने कांग्रेस के सलीम इंजीनियर को शिकस्त दी थी।
इसके बाद लोकसभा चुनाव में राघव के सांसद चुने जाने से खाली हुई सीट पर हुए चुनाव में राजीव गुंबर ने सपा के संजय गर्ग को हराकर इस सीट पर भाजपा का कब्जा कायम रखा। इस सीट पर सपा ने संजय गर्ग को प्रत्याशी बनाया है और बसपा ने ब्राह्मण कार्ड खेल मुकेश दीक्षित को मैदान में उतारा है। भाजपा से राजीव गुंबर का दावा मजबूत है। कांग्रेस यहां पंजाबी और मुस्लिम प्रत्याशी को लेकर पशोपेश में है।
अपनी हालत पर आंसू बहा रहीं ढमोला और पांवधोई
शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली ढमोला एवं पांवधोई नदियां आज अपनी हालत पर आंसू बहा रहीं हैं। लोगों ने ढमोला और पांवधोई के लिए जमकर आवाज उठाई, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता एवं जनप्रतिनिधियों की नकारात्मकता ने दोनों ही नदियों को नाले में तब्दील कर दिया। ढमोला तो अब अपने अस्तित्व के लिए ही संघर्ष कर रही है।
शहर विधान सभा का जातीय अर्थशास्त्र
शहर सीट पर सर्वाधिक मुस्लिम मतदाता हैं। यहां करीब सवा लाख मुस्लिम और एक लाख के करीब पंजाबी मत हैं। इसके अलावा करीब 50 हजार वैश्य और जैन मतदाता हैं। ब्राह्मण-त्यागी भी 20 हजार के करीब हैं। 15 हजार दलित वोटर है। इसके अलावा अन्य जातियां भी यहां हैं।
कब मिलेगी शहर को 24 घंटे बिजली
शहर को 24 घंटे बिजली की सप्लाई के दावे कई बार किए जा चुके हैं। विद्युत निगम के सलाहकार कृपाल सिंह भी सहारनपुर आकर 24 घंटे सप्लाई की घोषणा कर गए, लेकिन आज तक लोगों के घरों तक 15-16 घंटे से अधिक बिजली नहीं पहुंच पाई। बेशक कागजों में शहर को बिजली 24 घंटे ही दी जा रही है।
सहारनपुर विधानसभा पर एक नजर
कुल मतदाता ः 3,92,760
पुरुष मतदाता ः 2,10,098
महिला मतदाता ः 1,82,625
थर्ड जेंडर ः 37
मतदान केंद्र ः 96
मतदेय स्थल ः 384
ढाई साल के कार्यकाल में सबसे ज्यादा काम मोहल्लों में गलियों और सड़कों के निर्माण पर फोकस रखा। छोटी सी अवधि में जितना बन पाया उतना काम किया है और आगे मैने विकास की योजनाएं तैयार कर रखी हैं। केन्द्र सरकार की मदद से रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं, नई ट्रेनों का संचालन सहित अन्य काम कराए। विधानसभा में शहर की कई समस्याओं को जोरशोर से उठाया है। इन्हीं कामों के दम पर दोबारा जनता के बीच में जाऊंगा।
- राजीव गुंबर, विधायक।
विज्ञापन
मंडल होने के बावजूद सहारनपुर की समस्याओं की लगातार अनदेखी ही की जाती रही है। हालांकि वर्तमान विधायक ने ढाई साल के कार्यकाल में कोशिश की और विधानसभा में सहारनपुर के मुद्दों को उठाया। मगर, बड़े मुद्दे तो अभी तक जस की तस बने हुए हैं।
विज्ञापन
सहारनपुर को नगर निगम बने हुए सात बरस बीत गए, लेकिन अभी तक मेयर से महरूम रहे सहारनपुर को विकास की राह दिखाने वाला कोई नहीं आया। परिसीमन कर आसपास के गांवों को तो नगर निगम ने अपनी जद में ले लिया, लेकिन अभी तक शहर ही संभल नहीं पाया। आज भी एक चौथाई शहर ऐसा है, जहां नगर निगम का पानी तक नहीं पहुंच पाया। शहर की मलिन बस्तियां अधिकारियों के स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहीं हैं।
विज्ञापन
स्मार्ट सिटी बनने का ख्वाब देख रहे सहारनपुर अभी तक शहर की सड़कों पर लगे कूड़े के ढेर तक नहीं हटा पाया है। शहर के बीचोंबीच कोर्ट रोड पुल के दोनों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जबकि इस स्थान का विशेष रूप से सौंदर्यीकरण कराया जाना चाहिए था। इस पुल से होकर न सिर्फ बड़े अधिकारी, बल्कि जनप्रतिनिधि एवं मंत्री तक गुजरते हैं, लेकिन जब भी इस पुल से होकर गुजरते हैं, सभी आंखें और नाक बंद कर लेते हैं।
जबकि, इसके नजदीक बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। रेलवे स्टेशन एवं घंटाघर जाने का मुख्य मार्ग है। सिर्फ इतना ही नहीं दिल्ली रोड पर सड़क किनारे एवं अधिकारियों के आवास के पीछे कूड़े के ढेर से इतनी दुर्गंध उठ रही है कि हाईवे से लोगों का निकलना तक मुश्किल हो चुका है, लोग कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी के कान तक आवाज नहीं पहुंची।
हाईवे को जोड़ती कोर्ट रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़क की हालत ही शहर की हालत को बयां कर रही है। यहां कोई भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसमें गड्ढे न हों और दुर्घटनाएं न हो रही हो। जाम के झाम से शहर को आज तक मुक्ति नहीं मिल पाई, प्राईवेट हो या रोडवेज बस स्टैंड, सड़क पर ही चल रहा है।
शहर का जिला अस्पताल पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। इस अस्पताल में किसी भी गंभीर बीमारी अथवा दुर्घटना के लिए पहुंचने पर उसका उपचार करने की बजाय रेफर करने को ही प्राथमिकता दी जा रही है। कभी दवा न होने का बहाना बनाया जा रहा है तो कभी चिकित्सक न होने का। वर्ष 2012 में भाजपा के राघवलखन पाल शर्मा ने कांग्रेस के सलीम इंजीनियर को शिकस्त दी थी।
इसके बाद लोकसभा चुनाव में राघव के सांसद चुने जाने से खाली हुई सीट पर हुए चुनाव में राजीव गुंबर ने सपा के संजय गर्ग को हराकर इस सीट पर भाजपा का कब्जा कायम रखा। इस सीट पर सपा ने संजय गर्ग को प्रत्याशी बनाया है और बसपा ने ब्राह्मण कार्ड खेल मुकेश दीक्षित को मैदान में उतारा है। भाजपा से राजीव गुंबर का दावा मजबूत है। कांग्रेस यहां पंजाबी और मुस्लिम प्रत्याशी को लेकर पशोपेश में है।
अपनी हालत पर आंसू बहा रहीं ढमोला और पांवधोई
शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली ढमोला एवं पांवधोई नदियां आज अपनी हालत पर आंसू बहा रहीं हैं। लोगों ने ढमोला और पांवधोई के लिए जमकर आवाज उठाई, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता एवं जनप्रतिनिधियों की नकारात्मकता ने दोनों ही नदियों को नाले में तब्दील कर दिया। ढमोला तो अब अपने अस्तित्व के लिए ही संघर्ष कर रही है।
शहर विधान सभा का जातीय अर्थशास्त्र
शहर सीट पर सर्वाधिक मुस्लिम मतदाता हैं। यहां करीब सवा लाख मुस्लिम और एक लाख के करीब पंजाबी मत हैं। इसके अलावा करीब 50 हजार वैश्य और जैन मतदाता हैं। ब्राह्मण-त्यागी भी 20 हजार के करीब हैं। 15 हजार दलित वोटर है। इसके अलावा अन्य जातियां भी यहां हैं।
कब मिलेगी शहर को 24 घंटे बिजली
शहर को 24 घंटे बिजली की सप्लाई के दावे कई बार किए जा चुके हैं। विद्युत निगम के सलाहकार कृपाल सिंह भी सहारनपुर आकर 24 घंटे सप्लाई की घोषणा कर गए, लेकिन आज तक लोगों के घरों तक 15-16 घंटे से अधिक बिजली नहीं पहुंच पाई। बेशक कागजों में शहर को बिजली 24 घंटे ही दी जा रही है।
सहारनपुर विधानसभा पर एक नजर
कुल मतदाता ः 3,92,760
पुरुष मतदाता ः 2,10,098
महिला मतदाता ः 1,82,625
थर्ड जेंडर ः 37
मतदान केंद्र ः 96
मतदेय स्थल ः 384
ढाई साल के कार्यकाल में सबसे ज्यादा काम मोहल्लों में गलियों और सड़कों के निर्माण पर फोकस रखा। छोटी सी अवधि में जितना बन पाया उतना काम किया है और आगे मैने विकास की योजनाएं तैयार कर रखी हैं। केन्द्र सरकार की मदद से रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं, नई ट्रेनों का संचालन सहित अन्य काम कराए। विधानसभा में शहर की कई समस्याओं को जोरशोर से उठाया है। इन्हीं कामों के दम पर दोबारा जनता के बीच में जाऊंगा।
- राजीव गुंबर, विधायक।