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Saharanpur News: गेहूं की फसल पर दिखा पीला रतुआ का प्रकोप
Fri, 24 Feb 2023 11:04 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Feb 2023 11:04 PM IST
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सहारनपुर। जनपद में कई स्थानों पर गेहूं की फसल पर पीला रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दिए हैं। यह रोग तेजी से फैलता है, जिसका सीधा असर गेहूं की उत्पादकता पर पड़ता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ.आईके कुशवाहा ने बताया कि जनपद के गांव बिडवी में निरीक्षण के दौरान कई किसानों की फसल पर पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दिए। किसान रामेश्वर की गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का प्रकोप अधिक पाया गया। उन्होंने कहा कि किसान गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग और पोषक तत्वों की कमी के अंतर को पहचान नहीं पाते। इससे पीला रतुआ रोग तेजी से बढ़ जाता है। इस रोग में गेहूं पत्तों पर पीले या संतरी रंग की धारियां दिखाई देती हैं। रोग ग्रसित पत्तियों पर हल्दी के रंग का पाउडर दिखाई देता है, जबकि पोषक तत्वों की कमी में ऐसा नहीं होता है। इस रोग की आशंका गेहूं की प्रजाति एचडी 2967 , एचडी 2851, डब्लूएच 711 आदि में रहती है।
उन्होंने बताया कि इस रोग पर नियंत्रण के लिए 20 लीटर गोमूत्र ,चार किलोग्राम नीम की पत्ती , 500 ग्राम लहसुन का काढ़ा बनाकर 200 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा 200 मिलीलीटर प्रॉपिकॉनाजॉल या टेबुकोनाजॉल या ऑक्सीस्ट्रोबन प्लस टैबूकोनाजोल या ट्राईफ्लेक्सी स्ट्रॉपिंग प्लस टेबुकोनाजॉल का छिड़काव को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना मुफीद रहता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ.आईके कुशवाहा ने बताया कि जनपद के गांव बिडवी में निरीक्षण के दौरान कई किसानों की फसल पर पीला रतुआ के लक्षण दिखाई दिए। किसान रामेश्वर की गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का प्रकोप अधिक पाया गया। उन्होंने कहा कि किसान गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग और पोषक तत्वों की कमी के अंतर को पहचान नहीं पाते। इससे पीला रतुआ रोग तेजी से बढ़ जाता है। इस रोग में गेहूं पत्तों पर पीले या संतरी रंग की धारियां दिखाई देती हैं। रोग ग्रसित पत्तियों पर हल्दी के रंग का पाउडर दिखाई देता है, जबकि पोषक तत्वों की कमी में ऐसा नहीं होता है। इस रोग की आशंका गेहूं की प्रजाति एचडी 2967 , एचडी 2851, डब्लूएच 711 आदि में रहती है।
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उन्होंने बताया कि इस रोग पर नियंत्रण के लिए 20 लीटर गोमूत्र ,चार किलोग्राम नीम की पत्ती , 500 ग्राम लहसुन का काढ़ा बनाकर 200 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा 200 मिलीलीटर प्रॉपिकॉनाजॉल या टेबुकोनाजॉल या ऑक्सीस्ट्रोबन प्लस टैबूकोनाजोल या ट्राईफ्लेक्सी स्ट्रॉपिंग प्लस टेबुकोनाजॉल का छिड़काव को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना मुफीद रहता है।
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