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बुखार से तीन महिलाओं सहित चार की मौत
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देवबंद के रणसूरा में बुखार का प्रकोप
देवबंद। रणसूरा गांव में बुखार का प्रकोप चरम पर है। पिछले एक पखवाड़े के भीतर बुखार से तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 100 से अधिक लोग बीमार हैं। जिनका अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
ग्रामीण विनोद की पत्नी निर्मला (68), स्व. महीपाल की पत्नी उषा (74), सूरजभान की पत्नी भारती (54) व 75 वर्षीय पलटू की विगत 15 दिन के भीतर बुखार से मौत हो गई है, जबकि राहुल पुत्र सूरजभान, सुदेश त्यागी पत्नी स्व. मांगेराम, अमित पुत्र मंजू व भारत पुत्र बबलू समेत करीब 100 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। नामित सभासद दीपक त्यागी ने बताया कि गांव की पश्चिम दिशा से गुजर रहे शीलाखाला में उत्तराखंड की फैक्ट्रियों का गंदा पानी आता है। जिस कारण हैंडपंपों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है। दूसरे गांव में सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल है। इन्हीं सब समस्याओं के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। उनका कहना है कि हर घर में एक-दो बुखार पीड़ित है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों में अधिकांश में डेंगू के लक्षण मिल रहे हैं, क्योंकि बुखार आने पर प्लेटलेट्स गिर रही है।
-गांव में तीन बार भेजी टीमें, सामान्य बुखार के मिले मरीज
देवबंद सीएचसी प्रभारी अजय कुमार त्यागी ने बताया कि रणसूरा गांव में तीन-चार बार स्वास्थ्य टीमों को भेजा गया। हर बार चार-पांच मरीज ही सामान्य बुखार के मिलते हैं। झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने के चलते ग्रामीण सामान्य बुखार को भी डेंगू बता रहे हैं। जबकि जांच में अभी तक वायरल ही आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गांव में फॉगिंग व एंटीलार्वा का छिड़काव भी कराया जा चुका है।
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साफ-सफाई पर विशेष ध्यान
बुखार का प्रकोप बढ़ने के चलते वह तीन बार गांव की नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव करा चुके हैं। गली मोहल्लों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
-फारूख, ग्राम प्रधान
हमने रणसूरा गांव में स्वास्थ्य टीमें भेजी है। टीम ने बुखार पीड़ितों की जांच कर उन्हें दवाइयां दी है। गांव में जिनकी मौत हुई, उनकी उम्र अधिक और उन्हें हार्ट की समस्या थी। बुखार से कोई मौत नहीं हुई है।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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देवबंद। रणसूरा गांव में बुखार का प्रकोप चरम पर है। पिछले एक पखवाड़े के भीतर बुखार से तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 100 से अधिक लोग बीमार हैं। जिनका अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
ग्रामीण विनोद की पत्नी निर्मला (68), स्व. महीपाल की पत्नी उषा (74), सूरजभान की पत्नी भारती (54) व 75 वर्षीय पलटू की विगत 15 दिन के भीतर बुखार से मौत हो गई है, जबकि राहुल पुत्र सूरजभान, सुदेश त्यागी पत्नी स्व. मांगेराम, अमित पुत्र मंजू व भारत पुत्र बबलू समेत करीब 100 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। नामित सभासद दीपक त्यागी ने बताया कि गांव की पश्चिम दिशा से गुजर रहे शीलाखाला में उत्तराखंड की फैक्ट्रियों का गंदा पानी आता है। जिस कारण हैंडपंपों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है। दूसरे गांव में सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल है। इन्हीं सब समस्याओं के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। उनका कहना है कि हर घर में एक-दो बुखार पीड़ित है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों में अधिकांश में डेंगू के लक्षण मिल रहे हैं, क्योंकि बुखार आने पर प्लेटलेट्स गिर रही है।
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-गांव में तीन बार भेजी टीमें, सामान्य बुखार के मिले मरीज
देवबंद सीएचसी प्रभारी अजय कुमार त्यागी ने बताया कि रणसूरा गांव में तीन-चार बार स्वास्थ्य टीमों को भेजा गया। हर बार चार-पांच मरीज ही सामान्य बुखार के मिलते हैं। झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने के चलते ग्रामीण सामान्य बुखार को भी डेंगू बता रहे हैं। जबकि जांच में अभी तक वायरल ही आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गांव में फॉगिंग व एंटीलार्वा का छिड़काव भी कराया जा चुका है।
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साफ-सफाई पर विशेष ध्यान
बुखार का प्रकोप बढ़ने के चलते वह तीन बार गांव की नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव करा चुके हैं। गली मोहल्लों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
-फारूख, ग्राम प्रधान
हमने रणसूरा गांव में स्वास्थ्य टीमें भेजी है। टीम ने बुखार पीड़ितों की जांच कर उन्हें दवाइयां दी है। गांव में जिनकी मौत हुई, उनकी उम्र अधिक और उन्हें हार्ट की समस्या थी। बुखार से कोई मौत नहीं हुई है।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी