फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Organic farming will take care of the soil, health will be healthy

जैविक खेती मृदा का रखेगी ख्याल, सेहत रहेगा खुशहाल

Sat, 05 Dec 2020 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2020 12:06 AM IST
विज्ञापन
Organic farming will take care of the soil, health will be healthy
जैविक खेती - फोटो : SAHARANPUR
जैविक खेती मृदा का रखेगी ख्याल, सेहत रहेगा खुशहाल
विज्ञापन

सहारनपुर। उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग केवल मृदा की उर्वरा ही नहीं खराब कर रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। इस दशा में जैविक खेती बेहतर माध्यम है। जिले में ऐसे कई किसान है जो जैविक खेती कर रहे हैं और दूसरों को भी जागरूक कर रहे हैं।
खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग ने सिर्फ मानव स्वास्थ्य को प्रभावित किया है बल्कि मृदा को भी बीमार बना दिया है। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इनके प्रयोग से मृदा में पोषक तत्वों के साथ जैविक कार्बन कमी आ गई है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इससे किसानों के साथ उपभोक्ताओं में जैविक उत्पादों के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
विज्ञापन

जिले के कई जागरूक किसानों ने जैविक खेती में कदम रखा है। इसमें खाद्यान्न, फलों से लेकर सब्जियां तक शामिल हैं। कई किसान जैविक उत्पादों को प्रोसेस कर बाजार में बेच रहे हैं। जनपद में इस समय एक दर्जन से अधिक किसान जैविक खेती कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

अनुकूल है जैविक खेती
जैविक खेती में न तो रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग होता है और न ही रासायनिक कीटनाशकों का। इसमें भूमि में गोबर की खाद, कम्पोस्ट , बर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए किया जाता है। कीटनाशक के तौर पर नीमास्त्र (जो कि नीम की पत्तियों को उबालकर और निंबोली के तेल से बनता है) इसे अलावा तंबाकू, लाल मिर्च और सड़ी हुई लस्सी के मिश्रण का भी उपयोग कीटनाशकों के रूप में किया जाता है। फसल अवशेष को अपघटित करने के लिए किसान पूसा डी कम्पोजर का प्रयोग किया जाता है।
किसान बोले
- बीमार हुए तो मिली जैविक खेती की सीख
गांव बंदाहेड़ी के किसान महावीर सिंह को जैविक खेती की प्रेरणा चंडीगढ स्थित पीजीआई के डॉक्टरों से मिली। बीमार होने के चलते उन्होंने स्वास्थ्य की जांच चंडीगढ़ में कराई। डाक्टरों ने उन्हें बताया कि उनका खानपान और जीवन शैली उनकी बिमारी के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद उन्होंने 2016 से किसान प्रोड्यूसर कंपनी बनाकर समूह में जैविक खेती करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि वे देशी गेहूं (बंशी प्रजाति), काला गेहूं, धान, उड़द और सरसों के साथ ही सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं। इसके अलावा वे नींबू और अमरूद की भी जैविक बागवानी कर रहे हैं।
किसानों को भी जागरूक कर रहे डॉक्टर महीपाल
केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय में निदेशक पद से सेवानिवृत्ति डॉक्टर महीपाल ने गांव बहादरपुर में जैविक खेती शुरू की। किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। कृपा फाउंडेशन के जरिए वर्ष 2019 में जैविक खेती शुरू की। स्वीटकॉर्न (मीठी मक्का), जौं , काला गेहूं, देशी गेहूं , देशी बासमती, काला धान की जैविक खेती कर रहे हैं। सब्जियों में लौकी ,गाजर, शलजम, चकुंदर , पालक, चना, सरसों, हरा धनिया, मटर, मेथी, आलू , गोभी, टमाटर, प्याज, लहसुन की फसल जैविक विधि से पैदा कर रहे हैं।

जैविक विधि से खेती मानव स्वास्थ्य के साथ ही मृदा स्वास्थ्य के भी अनुकूल है। इसमें कम लागत में उच्च गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न, फल एवं सब्जियां पैदा होती है। यह विधि किसानों के लिए आर्थिक तौर पर भी काफी लाभकारी है। जनपद में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। -- डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र।

जेविक खेती

जेविक खेती- फोटो : SAHARANPUR

जैविक खेती करते डा महीपाल।

जैविक खेती करते डा महीपाल।- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed