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11 सितंबर को पुलिस की अग्निपरीक्षा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 07 Sep 2016 01:17 AM IST
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पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में रविवार 11 सितंबर को बसपा सुप्रीमो मायावती सहारनपुर में महारैली करने पहुंच रही हैं। इसी दिन एतिहासिक मेला गुघाल भी शुरू हो रहा है।
रैली में पहुंचने वाली भारी भीड़ और मेले में निशान चढ़ाने के लिए पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को संभाल पाना प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा।
आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो प्रदेशभर में रैलियां कर रही हैं। इसी क्रम में 11 सितंबर को वह सहारनपुर में रैली करने पहुंच रही हैं। रैली में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाखों कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
इसीलिए बसपा ने इस रैली को महारैली का नाम दिया है। बसपा की रैली के ही दिन ही ऐतिहासिक मेला गुघाल शुरू हो रहा है। परंपरा के अनुरूप प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु म्हाड़ी पर निशान चढ़ाने जाते हैं।
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श्रद्धालुओं में पहले दिन निशान चढ़ाने का क्रेज अधिक रहता है। इसके लिए मध्य रात्रि दो बजे से ही म्हाड़ी पर श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो जाती है, जो दिनभर लगी रहती है। यानी करीब एक लाख लोग पहले दिन निशान चढ़ाने जाने की संभावना इस बार भी है।
खास बात यह है कि निशान चढ़ाने वालों में सबसे अधिक संख्या दलित समाज के श्रद्धालुओं की होती है। ऐसे में एक तरफ महारैली में पहुंचने वाली भीड़ और दूसरी ओर निशान चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं को एक साथ संभाल पाना प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती रहेगा।
इस दिन रैली मेले को और मेला रैली को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन भी समस्या से अच्छी तरह वाकिफ है। इसी लिए प्रशासन दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था कर लिए जाने की बात कह रहा है।
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रैली में पहुंचने वाली भारी भीड़ और मेले में निशान चढ़ाने के लिए पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को संभाल पाना प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा।
आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर बसपा सुप्रीमो प्रदेशभर में रैलियां कर रही हैं। इसी क्रम में 11 सितंबर को वह सहारनपुर में रैली करने पहुंच रही हैं। रैली में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाखों कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
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इसीलिए बसपा ने इस रैली को महारैली का नाम दिया है। बसपा की रैली के ही दिन ही ऐतिहासिक मेला गुघाल शुरू हो रहा है। परंपरा के अनुरूप प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु म्हाड़ी पर निशान चढ़ाने जाते हैं।
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श्रद्धालुओं में पहले दिन निशान चढ़ाने का क्रेज अधिक रहता है। इसके लिए मध्य रात्रि दो बजे से ही म्हाड़ी पर श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो जाती है, जो दिनभर लगी रहती है। यानी करीब एक लाख लोग पहले दिन निशान चढ़ाने जाने की संभावना इस बार भी है।
खास बात यह है कि निशान चढ़ाने वालों में सबसे अधिक संख्या दलित समाज के श्रद्धालुओं की होती है। ऐसे में एक तरफ महारैली में पहुंचने वाली भीड़ और दूसरी ओर निशान चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं को एक साथ संभाल पाना प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौती रहेगा।
इस दिन रैली मेले को और मेला रैली को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन भी समस्या से अच्छी तरह वाकिफ है। इसी लिए प्रशासन दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था कर लिए जाने की बात कह रहा है।