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Saharanpur News: ऐ दुनिया वालों सुन लो सब, मैं खुद का भाग्य विधाता हूं

Fri, 27 Jan 2023 11:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 27 Jan 2023 11:53 PM IST
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O people of the world, listen everyone, I am the creator of my own destiny
सहारनपुर। निज भाषा में मैं गीत लिखूं, निज बोली में मैं गाता हूं, ऐ दुनिया वालों सुन लो सब, मैं खुद का भाग्य विधाता हूं। इन पंक्तियों को सुनाकर नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने खूब वाहवाही लूटी। मौका था बसंत पंचमी के अवसर पर दिल्ली रोड स्थित इंद्रलोक कॉलोनी में काव्य संध्या कार्यक्रम का।
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साहित्यिक संस्था विभावरी के तत्वावधान में डॉ. संदीप मिश्रा की अध्यक्षता और डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा के संचालन में काव्य संध्या हुई। डॉ. संदीप व संस्था अध्यक्ष बालेश्वर जैन ने मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कवि आरपी सारस्वत द्वारा बृजभाषा में पढ़ा कि मइया मो पै किरपा कर दो, मैं ओइ्म लिखी-पढ़ी जाऊंगो, रचि लूंगो दो-चारि गीत तो, जग में नाम कमाऊंगो। डॉ. वीरेंद्र आजम ने कहा, कुछ इस तरह का वरदान दो-वरदान दो, मां मुझको भी वरदान दो, स्वर कोकिल बन सकूं मां ऐसा कोई सुर गान दो। नरेंद्र मस्ताना ने सुनाया, आया बसंत आया बसंत, भू का कण-कण मुस्काया है, दहका पलाश चटकी कलियां, मन का पंछी हर्षाया है। सुरेश सपन ने कविता, पतझर में ही रिश्तों की पहचान हुई, सावन में तो हर कोई हरियाला था। पीएन मधुकर ने पढ़ा, तिरंगे की जय हो, जय हो तिरंगे की, तिरंगा भारत की शान है, वीरो की जान है। हरिराम पथिक ने सुनाया, विश्व पटल पर सज रहा, अपना हिन्दुस्तान, हम अनेक में एक हैं, यही अमिट पहचान।
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डॉ. मोनिका शर्मा ने, धड़कता अगर तुम में हिन्दुस्तान नहीं, तुम में जिंदा होने का कोई प्रमाण नहीं। डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने, सरस से गीत हैं कोई हमें कब गुनगुनाता है, हैं मंदिर प्यार के-सच के, इधर अब कौन आता है। डॉ. कमाल सहारनपुरी ने कहा, किसी की आंख से आंसू टपकता छोड़ आया हूं, किसी को याद में अपनी तड़फता छोड़ आया हूं। नीरज सैनी, डॉ. पंकज सैनी, धीरज सैनी, दीप्ति सैनी, रमा सैनी, रिषभ सिंह, विनीत जैन, वीणा सारस्वत, तनुश्री आदि ने भी कविता पाठ किया।
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