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आम ही नहीं खास भी तरस गए पेयजल के लिए
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कोठड़ी बहलोलपुर में खराब पड़ा हैडपंप
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर/बेहट। नगर विधायक के मोहल्ले के लोग एक तरफ जहां इस भीषण गर्मी में पेयजल के लिए तरस गए वहीं शिवालिक की तलहटी में बसे घाड़ इलाके के लोगों को आज भी शुद्ध पेयजल का इंतजार है। लोगों का कहना है कि जब शहर विधायक के मोहल्ले में ही लोगों को पेयजल मुहैय्या नहीं हो पा रहा है तो अन्य क्षेत्रों को क्या हाल होगा। सरकारी संसाधनों पर निर्भर घाड़ क्षेत्र में दावे कुछ भी रहे हों, लेकिन हकीकत यही है कि सरकार की तमाम योजनाएं भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। नगर विधायक के मोहल्ले में तो वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई, यह अलग बात है कि लोगों को बाल्टी में पानी भरकर घरों में ले जाना पड़ा। वहीं घाड़ क्षेत्र में पेयजल परियोजनाओं की बदहाल व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन खूब हुए, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई।
पाइपलाइन फटने से विधायक के मोहल्ले में बंद हुई पानी की आपूर्ति
सहारनपुर। पेयजल की पाइपलाइन फटने की वजह से महानगर के गोविंदनगर मोहल्ले में पेयजल व्यवस्था ठप हो गई। खास बात यह है कि गोविंद नगर, नगर विधायक राजीव गुंबर का मोहल्ला है। पानी की आपूर्ति के लिए नगर निगम ने पानी का टैंकर भेजा, जिससे पानी लेने के लिए लोग बाल्टियां लेकर इंतजार में खड़े रहे।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत घंटाघर से एसएएम इंटर कॉलेज तक सीवर की बड़ी लाइन डालने का कार्य चल रहा है। जेसीबी से हो रही सड़कों की खोदाई में पेयजल की पाइपलाइन टूट गई। इसकी वजह से गोविंदनगर और आसपास के मोहल्लों में रविवार की रात से पानी की आपूर्ति बंद हो गई। भीषण गर्मी में पानी की अधिक जरूरत है। ऐसे में बिना पानी के लोग परेशान हो गए। सोमवार की सुबह घरों में पानी नहीं आने से लोग स्नान करने के साथ ही भोजन आदि तक नहीं बना सके। ऐेसे में नगर निगम अधिकारियों ने पानी का टैंकर भेजकर पानी की पूर्ति करने का प्रयास किया। टैंकर से पानी लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। जिन घरों में सबमर्सिबल की सुविधा है वहां के लोगों को कम परेशानी हुई। जल कल विभाग के महाप्रबंधक मनोज कुमार आर्य का कहना है कि सीवर लाइन डालने की वजह से पेयजल की पाइप प्रभावित हुई है, जिसे दुरुस्त कराया जा रहा है। पानी की किल्लत ना रहे। इसके लिए पानी के टैंकर भेजे गए हैं।
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घाड़ क्षेत्र के लोग प्राकृतिक स्रोतों से लाते हैं पेयजल
कोठड़ी बहलोलपुर में आज तक जल की परियोजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है। गांव के किसान संजय के निजी ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति होती है। ट्यूबवेल का बिजली बिल सभी ग्रामीण मिलकर चुकाते हैं। इसी गांव का मजरा तुलसी की आबादी 600 है। बरसाती नदी में आने वाली बाढ़ में पाइपलाइन बह जाने से यहां के लोगों को पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती। मजबूरी में यहां के लोगों को सरकारी हैंडपंप में विद्युत मोटर डालकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। बिजली गुल हो जाए तो तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाले प्राकृतिक जल स्रोत से पानी लाना पड़ता है।
20 साल से इंद्रपुर तालड़ा को नहीं मिला पेयजल परियोजना से पानी
घाड़ क्षेत्र का गांव इंद्रपुर तालड़ा 20 साल से पेयजल की आपूर्ति को तरस रहा है। यहां पूरे गांव को एक सरकारी हैंडपंप में विद्युत मोटर डालकर ग्राम पंचायत स्तर से बनाए गए वाटर टैंक को भरकर पानी की आपूर्ति कराई जाती है। यदि बिजली चली जाए तो ग्रामीणों को जंगल में कई किमी पैदल चलना पड़ता है। पूर्व प्रधान चाणूराम ने बताया कि 40 साल पुरानी पाइप लाइन जर्जर व क्षतिग्रस्त होने के कारण इस गांव में न तो प्राकृतिक स्रोत और न ही 2007 में लगाए गए ट्यूबवेल से जल की आपूर्ति हो पा रही है।
गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है 12 हजार की आबादी
रामपुर, बड़कलां, हैदरपुर हिंदूवाला, हबीबपुर तपोवन व मोहम्मदपुर झाझरा उर्फ डाडल समेत छह गांवों की करीब 12 हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। सरकारी संसाधनों की बदहाल व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। इस क्षेत्र को चार दशक पुरानी रामपुर-बड़कलां पेयजल समूह योजना से पानी की आपूर्ति कराई जाती थी, उसकी पाइप लाइनें जर्जर व क्षतिग्रस्त हालत में हैं। दूसरे 15 साल पहले रामपुर में स्थापित की गई पेयजल परियोजना आज तक अधर में लटकी है।
आजादी के बाद से नहीं हुआ समस्या का समाधान
आजादी से आज तक घाड़ क्षेत्र में पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो सका। सरकार की तमाम योजनाएं भी विफल साबित हुईं। इसका एक बड़ा कारण सरकारी संसाधनों की बदहाली है। उन्होंने घाड़ मजदूर मोर्चा के बैनर तले कई आंदोलन किए हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका। -- चाणूराम, पूर्व प्रधान रामपुर बड़कलां व घाड़ मजदूर मोर्चा के सह संयोजक
करना पड़ता है बूंद-बूंद पानी एकत्र
रात-दिन जाग कर परिवार और मवेशियों के लिए बूंद-बूंद पानी घड़ों व बाल्टियों में एकत्र करना पड़ता है। पेयजल परियोजनाओं की पाइप लाइन से बूंद-बूंद करके पानी निकलता है। यदि बिजली दो-चार दिन के लिए चली जाए तो पानी बिल्कुल भी नहीं मिल पाता है। --कमलेश, निवासी गांव बड़कलां
प्रत्येक गांव में पहुंचे योजना का लाभ
समस्या के समाधान के लिए सरकार को चाहिए कि प्रत्येक गांव में पेयजल परियोजनाएं स्थापित कराकर नई पाइप लाइनें डलवाई जाए, जब तक सरकार इस योजना पर काम नहीं करेगी, तब तक समस्या का समाधान मुश्किल है। --ताहिर चौधरी, पूर्व प्रधान कोटडी बहलोलपुर
- शिवालिक के घाड़ क्षेत्र में पानी की किल्लत रहती है, इसके लिए अनेक परियोजनाएं चलाई गई है। बिजली आपूर्ति बंद होने से पानी की समस्या बन जाती है। जहां संसाधन कम है और हैंडपंप खराब है, वहां उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
- विजय कुमार
मुख्य विकास अधिकारी
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पाइपलाइन फटने से विधायक के मोहल्ले में बंद हुई पानी की आपूर्ति
सहारनपुर। पेयजल की पाइपलाइन फटने की वजह से महानगर के गोविंदनगर मोहल्ले में पेयजल व्यवस्था ठप हो गई। खास बात यह है कि गोविंद नगर, नगर विधायक राजीव गुंबर का मोहल्ला है। पानी की आपूर्ति के लिए नगर निगम ने पानी का टैंकर भेजा, जिससे पानी लेने के लिए लोग बाल्टियां लेकर इंतजार में खड़े रहे।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत घंटाघर से एसएएम इंटर कॉलेज तक सीवर की बड़ी लाइन डालने का कार्य चल रहा है। जेसीबी से हो रही सड़कों की खोदाई में पेयजल की पाइपलाइन टूट गई। इसकी वजह से गोविंदनगर और आसपास के मोहल्लों में रविवार की रात से पानी की आपूर्ति बंद हो गई। भीषण गर्मी में पानी की अधिक जरूरत है। ऐसे में बिना पानी के लोग परेशान हो गए। सोमवार की सुबह घरों में पानी नहीं आने से लोग स्नान करने के साथ ही भोजन आदि तक नहीं बना सके। ऐेसे में नगर निगम अधिकारियों ने पानी का टैंकर भेजकर पानी की पूर्ति करने का प्रयास किया। टैंकर से पानी लेने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। जिन घरों में सबमर्सिबल की सुविधा है वहां के लोगों को कम परेशानी हुई। जल कल विभाग के महाप्रबंधक मनोज कुमार आर्य का कहना है कि सीवर लाइन डालने की वजह से पेयजल की पाइप प्रभावित हुई है, जिसे दुरुस्त कराया जा रहा है। पानी की किल्लत ना रहे। इसके लिए पानी के टैंकर भेजे गए हैं।
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घाड़ क्षेत्र के लोग प्राकृतिक स्रोतों से लाते हैं पेयजल
कोठड़ी बहलोलपुर में आज तक जल की परियोजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है। गांव के किसान संजय के निजी ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति होती है। ट्यूबवेल का बिजली बिल सभी ग्रामीण मिलकर चुकाते हैं। इसी गांव का मजरा तुलसी की आबादी 600 है। बरसाती नदी में आने वाली बाढ़ में पाइपलाइन बह जाने से यहां के लोगों को पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती। मजबूरी में यहां के लोगों को सरकारी हैंडपंप में विद्युत मोटर डालकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। बिजली गुल हो जाए तो तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाले प्राकृतिक जल स्रोत से पानी लाना पड़ता है।
20 साल से इंद्रपुर तालड़ा को नहीं मिला पेयजल परियोजना से पानी
घाड़ क्षेत्र का गांव इंद्रपुर तालड़ा 20 साल से पेयजल की आपूर्ति को तरस रहा है। यहां पूरे गांव को एक सरकारी हैंडपंप में विद्युत मोटर डालकर ग्राम पंचायत स्तर से बनाए गए वाटर टैंक को भरकर पानी की आपूर्ति कराई जाती है। यदि बिजली चली जाए तो ग्रामीणों को जंगल में कई किमी पैदल चलना पड़ता है। पूर्व प्रधान चाणूराम ने बताया कि 40 साल पुरानी पाइप लाइन जर्जर व क्षतिग्रस्त होने के कारण इस गांव में न तो प्राकृतिक स्रोत और न ही 2007 में लगाए गए ट्यूबवेल से जल की आपूर्ति हो पा रही है।
गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है 12 हजार की आबादी
रामपुर, बड़कलां, हैदरपुर हिंदूवाला, हबीबपुर तपोवन व मोहम्मदपुर झाझरा उर्फ डाडल समेत छह गांवों की करीब 12 हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। सरकारी संसाधनों की बदहाल व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। इस क्षेत्र को चार दशक पुरानी रामपुर-बड़कलां पेयजल समूह योजना से पानी की आपूर्ति कराई जाती थी, उसकी पाइप लाइनें जर्जर व क्षतिग्रस्त हालत में हैं। दूसरे 15 साल पहले रामपुर में स्थापित की गई पेयजल परियोजना आज तक अधर में लटकी है।
आजादी के बाद से नहीं हुआ समस्या का समाधान
आजादी से आज तक घाड़ क्षेत्र में पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो सका। सरकार की तमाम योजनाएं भी विफल साबित हुईं। इसका एक बड़ा कारण सरकारी संसाधनों की बदहाली है। उन्होंने घाड़ मजदूर मोर्चा के बैनर तले कई आंदोलन किए हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका। -- चाणूराम, पूर्व प्रधान रामपुर बड़कलां व घाड़ मजदूर मोर्चा के सह संयोजक
करना पड़ता है बूंद-बूंद पानी एकत्र
रात-दिन जाग कर परिवार और मवेशियों के लिए बूंद-बूंद पानी घड़ों व बाल्टियों में एकत्र करना पड़ता है। पेयजल परियोजनाओं की पाइप लाइन से बूंद-बूंद करके पानी निकलता है। यदि बिजली दो-चार दिन के लिए चली जाए तो पानी बिल्कुल भी नहीं मिल पाता है। --कमलेश, निवासी गांव बड़कलां
प्रत्येक गांव में पहुंचे योजना का लाभ
समस्या के समाधान के लिए सरकार को चाहिए कि प्रत्येक गांव में पेयजल परियोजनाएं स्थापित कराकर नई पाइप लाइनें डलवाई जाए, जब तक सरकार इस योजना पर काम नहीं करेगी, तब तक समस्या का समाधान मुश्किल है। --ताहिर चौधरी, पूर्व प्रधान कोटडी बहलोलपुर
- शिवालिक के घाड़ क्षेत्र में पानी की किल्लत रहती है, इसके लिए अनेक परियोजनाएं चलाई गई है। बिजली आपूर्ति बंद होने से पानी की समस्या बन जाती है। जहां संसाधन कम है और हैंडपंप खराब है, वहां उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
- विजय कुमार
मुख्य विकास अधिकारी

रामपुर बड़कलां में खराब पड़ा हैडपंप- फोटो : SAHARANPUR

कोठड़ी बहलोलपुर में पाइप लाइन के पास पानी आने के इंतजार में रखे गए घड़े व बाल्टियां- फोटो : SAHARANPUR

घाड़ क्षेत्र के गांव बड़कलां में पाइप लाइन से पानी भरती महिला।- फोटो : SAHARANPUR

भाजपा नगर विधायक राजीव गुंबर का क्षेत्र गोविन्द नगर में रात से पानी ना होने पर टैंकर से पानी लेते ?- फोटो : SAHARANPUR

भाजपा नगर विधायक राजीव गुंबर का क्षेत्र गोविन्द नगर में रात से पानी ना होने से दुसरी कॉलोनी से पा?- फोटो : SAHARANPUR

स्मार्ट सिटी का देहरादून रोड पर कार्य चलने के दौरान फटा पाइप से बहता पानी- फोटो : SAHARANPUR