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17 साल से ओलंपिक में नहीं पहुंचा जिले का कोई खिलाड़ी

Wed, 28 Jul 2021 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 11:51 PM IST
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No player from the district reached the Olympics for 17 years
सहारनपुर। पड़ोसी जनपद मेरठ से पांच खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं। बुलंदशहर और बागपत जैसे कम सुविधाओं वाले शहरों से भी प्रतिभाएं ओलंपिक में लगातार पहुंच रही हैं, लेकिन सहारनपुर में बीते 17 साल से कोई खिलाड़ी ओलंपिक तक नहीं पहुंच सका है। वर्ष 2004 में जूडो खिलाड़ी अकरम शाह एथेंस ओलंपिक में पहुंचे थे, जिनको नौवां स्थान मिला था। ओलंपिक में पहुंचने वाले वह सहारनपुर के इकलौते खिलाड़ी हैं। खेलों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होना इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। इस संबंध में खिलाड़ियों, खेल संघों और खेल अधिकारियों से बात की गई। पेश है जनपद में खेल सुविधाओं पर आधारित रिपोर्ट...
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कई साल से नहीं मिले प्रशिक्षक
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैराकी, जूडो, टेबिल टेनिस, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, बास्केटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वॉलीबाल, हॉकी की सुविधा है, लेकिन वहां हॉकी कोच पांच साल से नहीं है। तीन साल से टेबिल टेनिस कोच नहीं है। बैडमिंटन के लिए भी प्रशिक्षक अभी तक नहीं मिला है। डेढ़ साल पहले क्रिकेट कोच का ट्रांसफर हुआ, जिसके बाद नया कोच नहीं मिला। कुश्ती कोच दो साल से नहीं है। भारोत्तोलन कोच तीन साल से नहीं है। बास्केटबॉल और वॉलीबाल कोच नहीं हैं। वर्तमान में केवल जूडो, कबड्डी और एथलेटिक्स के कोच हैं।
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इन खेलों के लिए कहां जाएं
जनपद में कुश्ती, तीरंदाजी और शूटिंग के प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है। कई बार शूटिंग रेंज बनाने की मांग उठी। कुश्ती कोच मिला, मगर अखाड़ा या अलग से प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं हुई। ऐसे में खिलाड़ियों को प्राइवेट एकेडमी में जाना पड़ता है या फिर शहर छोड़कर अन्य शहर में जा रहे हैं।
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खिलाड़ियों की बात
अंतरराष्ट्रीय धावक रामशरण का कहना है कि ओलंपिक तक पहुंचने के लिए माहौल बेहद जरूरी है, जो सहारनपुर में नहीं है। कई खेलों के लिए प्रशिक्षक तक नहीं होना भी खिलाड़ियों के पिछड़ने की एक वजह है। राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकार को गोद लेना चाहिए।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक विजेता एथलीट प्रिंस कुमार का कहना है कि ज्यादातर खिलाड़ी गरीब घरों से आते हैं, जिनके पास डाइट तक के पैसे नहीं होते। वह किराया खर्च कर स्टेडियम पहुंचते हैं। उनकी मांग है कि सरकार को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए अलग से रहने, खाने और प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।
खेल संघों का पक्ष
-- जिला ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एवं नगर विधायक संजय गर्ग का कहना है कि सरकार के स्तर से सुविधाएं देने में लापरवाही बरती जा रही है। स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण दस साल से लटका है। सिंथेटिक ट्रैक भी दो साल से लटका हुआ है। खेलों के लिए माहौल बने इसके लिए समय-समय पर जिला ओलंपिक संघ द्वारा प्रतियोगिताएं कराई गई हैं।
जिला एथलेटिक्स संघ सहित अनेक खेल संघों में महत्वपूर्ण पद संभाल रहे डॉ. एके गुप्ता का कहना है कि एसोसिएशन अपने स्तर से खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के हरसंभव प्रयास करती है। मगर कहीं ना कहीं शासन स्तर से सुविधाओं में कमी है, जिनमें प्रशिक्षक ना होना भी शामिल है।

खेलों के लिए अच्छा माहौल हो, हमारी हमेशा यही कोशिश रही है। खेल संघों का भी लगातार सहयोग मिलता रहा है। स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनने जा रहा है, जो जल्द तैयार होगा। प्रयास हैं कि जनपद में ज्यादा से ज्यादा खेलों के प्रशिक्षकों की तैनाती हो जाए। खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंचें इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
- प्रेम कुमार, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।
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