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स्कूलों में नहीं बिजली कनेक्शन, पसीने में सीख रहे ककहरा
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तीतरो के फतेहचंदपुर में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते बच्चें
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। इस बार अप्रैल में ही जून जैसी झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है। सरकार परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुविधा मुहैया कराने के दावे करती है, लेकिन हकीकत इससे उलट है। अमर उजाला ने जनपद के परिषदीय विद्यालयों का हाल जाना, तो पाया कि बहुत से स्कूलों में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। जहां हैं भी वहां स्कूल समय में बत्ती गुल रहती है ऐसे में छतों पर टंगे पंखे केवल शोपीस बने हैं। बच्चे पसीने में लथपथ होकर ही ककहरा सीख रहे हैं। स्कूलों में इनवर्टर की भी व्यवस्था नहीं है।
शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने परिषदीय विद्यालयों में पहुंच बिजली, पेयजल सुविधाओं की पड़ताल की। सुबह दस बजे बड़गांव क्षेत्र के गांव खुदाबक्शपुर माजरा स्थित प्राथमिक स्कूल में बिजली गुल थी और पंखे बंद पड़े थे। कक्ष के एक हिस्से में पंखा था तो दूसरे में कुंडा खाली पड़ा था। गांव बड़ूली के प्राथमिक विद्यालय, नयागांव के उच्च प्राथमिक स्कूल में भी बत्ती गुल थी। शिमलाना के प्राथमिक स्कूल में बिजली खराब पड़ी थी। इन सब स्कूलों में बच्चे प्रचंड गर्मी में धूप से तपते कमरों में बैठे मिले। ग्राम प्रधान काका राणा का कहना था कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। वे जल्द ही बिजली लाइन का फाल्ट दूर करा देंगे। साढे़ ग्यारह बजे महेशपुर के प्राथमिक व जूनियर दोनों स्कूलों में भी बिना बिजली के पंखे बंद पड़े थे। ज्यादातर जगह पाया गया कि स्कूल टाइम के दौरान बिजली कट के चलते बिना पंखों के ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
नागल ब्लाक के गांवों पठोड़ी और मीरपुर मोहनपुर के प्राथमिक स्कूलों में कक्षों में पंखे तो लटके मिले, लेकिन यहां बिजली कनेक्शन ही नहीं थे। ऐसे में बच्चों को प्रचंड गर्मी में ही शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पठोड़ी में 88 बच्चे और मीरपुर में 130 बच्चे अध्य्यनरत हैं। पठोड़ी में तो फर्नीचर के अभाव में एक कक्ष में बच्चे टाट-पट्टी पर ही बैठकर पढ़ते मिले। प्रधानाध्यापक नीरज मलिक ने बताया कि कुछ फर्नीचर टूट गया है जिसे दुबारा बनवाया जा रहा है। उनका और मीरपुर के प्रधानाध्यापक सुदेश कुमार का कहना था कि बिजली कनेक्शन के लिए वे कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
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बिजली नहीं तो पेड़ों के नीचे बैठ कर पढ़ते है विद्यार्थी
देवबंद क्षेत्र के स्कूलों में पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली जाने की दशा में इनवर्टर की कोई व्यवस्था नहीं है।
तीतरो क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहचन्दपुर में 163 बच्चें पंजीकृत हैं। स्कूल में बिजली कनेक्शन नहीं है। ऐसे में कक्षों में लगे पंखे शोपीस बने हैं। बिजली के अभाव में बच्चों को छायादार पेड़ों के नीचे बैठाकर शिक्षण कार्य पूरा कराया जाता है।
स्कूल के हैंडपंप का पानी दूषित, घर से बोतल में पानी लाते है बच्चे
ब्लॉक साढ़ोली कदीम क्षेत्र के गांव बेलका माफी के प्राथमिक विद्यालय में लगे हैंडपंप का पानी दूषित हो चुका है। हैंडपंप से पीला और बदबूदार पानी निकलता है। विद्यालय में पढ़ने वाले 30 छात्रों को घर से बोतल में पानी लाना पड़ता है। इंचार्ज अध्यापक दीपक कौशिक ने बताया कि इस संबंध में विभाग को लिखित में अवगत कराया जा चुका है।
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शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने परिषदीय विद्यालयों में पहुंच बिजली, पेयजल सुविधाओं की पड़ताल की। सुबह दस बजे बड़गांव क्षेत्र के गांव खुदाबक्शपुर माजरा स्थित प्राथमिक स्कूल में बिजली गुल थी और पंखे बंद पड़े थे। कक्ष के एक हिस्से में पंखा था तो दूसरे में कुंडा खाली पड़ा था। गांव बड़ूली के प्राथमिक विद्यालय, नयागांव के उच्च प्राथमिक स्कूल में भी बत्ती गुल थी। शिमलाना के प्राथमिक स्कूल में बिजली खराब पड़ी थी। इन सब स्कूलों में बच्चे प्रचंड गर्मी में धूप से तपते कमरों में बैठे मिले। ग्राम प्रधान काका राणा का कहना था कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। वे जल्द ही बिजली लाइन का फाल्ट दूर करा देंगे। साढे़ ग्यारह बजे महेशपुर के प्राथमिक व जूनियर दोनों स्कूलों में भी बिना बिजली के पंखे बंद पड़े थे। ज्यादातर जगह पाया गया कि स्कूल टाइम के दौरान बिजली कट के चलते बिना पंखों के ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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नागल ब्लाक के गांवों पठोड़ी और मीरपुर मोहनपुर के प्राथमिक स्कूलों में कक्षों में पंखे तो लटके मिले, लेकिन यहां बिजली कनेक्शन ही नहीं थे। ऐसे में बच्चों को प्रचंड गर्मी में ही शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पठोड़ी में 88 बच्चे और मीरपुर में 130 बच्चे अध्य्यनरत हैं। पठोड़ी में तो फर्नीचर के अभाव में एक कक्ष में बच्चे टाट-पट्टी पर ही बैठकर पढ़ते मिले। प्रधानाध्यापक नीरज मलिक ने बताया कि कुछ फर्नीचर टूट गया है जिसे दुबारा बनवाया जा रहा है। उनका और मीरपुर के प्रधानाध्यापक सुदेश कुमार का कहना था कि बिजली कनेक्शन के लिए वे कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
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बिजली नहीं तो पेड़ों के नीचे बैठ कर पढ़ते है विद्यार्थी
देवबंद क्षेत्र के स्कूलों में पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली जाने की दशा में इनवर्टर की कोई व्यवस्था नहीं है।
तीतरो क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहचन्दपुर में 163 बच्चें पंजीकृत हैं। स्कूल में बिजली कनेक्शन नहीं है। ऐसे में कक्षों में लगे पंखे शोपीस बने हैं। बिजली के अभाव में बच्चों को छायादार पेड़ों के नीचे बैठाकर शिक्षण कार्य पूरा कराया जाता है।
स्कूल के हैंडपंप का पानी दूषित, घर से बोतल में पानी लाते है बच्चे
ब्लॉक साढ़ोली कदीम क्षेत्र के गांव बेलका माफी के प्राथमिक विद्यालय में लगे हैंडपंप का पानी दूषित हो चुका है। हैंडपंप से पीला और बदबूदार पानी निकलता है। विद्यालय में पढ़ने वाले 30 छात्रों को घर से बोतल में पानी लाना पड़ता है। इंचार्ज अध्यापक दीपक कौशिक ने बताया कि इस संबंध में विभाग को लिखित में अवगत कराया जा चुका है।

नागल के पठोडी में नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करते बच्चें- फोटो : SAHARANPUR

खुदाबक्सपुर माजरा के प्राथमिक स्कूल के कक्ष में टंगा पंखा और दूसरी तरफ खाली पड़ा कुंडा- फोटो : SAHARANPUR