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Saharanpur News: न बिल, न काम, लिखे गए सिर्फ नाम...हो गया करोड़ों का भुगतान
Thu, 24 Sep 2026 01:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:30 AM IST
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सहारनपुर। विकास कार्यों में पारदर्शिता और खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जिला पंचायत के दर्ज आंकड़े शक के घेरे में हैं। जुलाई में दर्ज दो बड़े भुगतानों में न तो संबंधित बिल अपलोड किया गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि आखिर किस स्थान पर कौन सा विकास कार्य कराया गया। विकास कार्य के विवरण वाली जगह कई लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। दोनों भुगतानों की कुल राशि करीब 2.11 करोड़ से अधिक बैठती है। हालांकि जिला पंचायत का दावा है कि बिलों में कोई गड़बड़ी नहीं है।
यह है ई-स्वराज पोर्टल
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। पोर्टल पर कार्यों की योजना, उनकी भौतिक एवं वित्तीय प्रगति और वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड अपलोड किया जाता है। पोर्टल का उद्देश्य ही कार्यों और खर्च की निगरानी तथा जवाबदेही तय करना है।
पहला भुगतान 1.33 करोड़ से अधिक का
जुलाई माह में 1,33,56,855 रुपये का एक वाउचर पोर्टल पर दर्ज है। इसमें विकास कार्य के नाम पर सुरेंद्र कुमार, धर्मवीर, मुनेश कुमार, पहल सिंह, योगेश कुमार, कंवरपाल सिंह, अजय चौधरी और मसूद अख्तर के नाम दर्ज हैं, लेकिन इन नामों के सामने विकास कार्य क्या कराया गया, इसका विवरण नहीं है। इस भुगतान से संबंधित बिल भी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। ऐसे में यह भुगतान सवालों के घेरे में है।
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77.67 लाख के भुगतान में भी वही कहानी
इसी तरह जुलाई में ही 77,67,353 रुपये का एक और भुगतान दर्ज किया गया है। इसमें भी बिल अपलोड नहीं किया गया। विकास कार्य के स्थान पर मांगेराम, अमित कुमार, बलबीर, विकास, राकेश और योगेश कुमार के नाम लिखे गए हैं। किस सड़क, नाली, भवन, पुलिया या अन्य कार्य पर यह रकम खर्च हुई, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं है।
नाम लिखने से कैसे हुआ विकास कार्य का हिसाब
सवाल यह है कि यदि रकम वास्तव में विकास कार्यों पर खर्च हुई तो कार्य का नाम, स्थान, स्वीकृत लागत और उसकी प्रगति का विवरण पोर्टल पर क्यों नहीं है। यदि ये नाम भुगतान पाने वाले व्यक्ति हैं तो उन्हें विकास कार्य के विवरण की जगह क्यों दर्ज किया गया। अब इन दोनों भुगतानों के मूल बिल, स्वीकृति, कार्यस्थल और मौके पर हुए काम का सत्यापन ही स्पष्ट कर सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में यह महज गड़बड़ी है, या तकनीकी वजह है या फिर भुगतान में कोई अनियमितता हुई है।
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कुछ विकास कार्यों के भुगतान चेक के माध्यम से किए जाते हैं। यह वही भुगतान है। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में कोई गड़बड़ी नहीं है।
- चंद्रबीर सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत
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यह है ई-स्वराज पोर्टल
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पंचायती राज संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। पोर्टल पर कार्यों की योजना, उनकी भौतिक एवं वित्तीय प्रगति और वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड अपलोड किया जाता है। पोर्टल का उद्देश्य ही कार्यों और खर्च की निगरानी तथा जवाबदेही तय करना है।
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पहला भुगतान 1.33 करोड़ से अधिक का
जुलाई माह में 1,33,56,855 रुपये का एक वाउचर पोर्टल पर दर्ज है। इसमें विकास कार्य के नाम पर सुरेंद्र कुमार, धर्मवीर, मुनेश कुमार, पहल सिंह, योगेश कुमार, कंवरपाल सिंह, अजय चौधरी और मसूद अख्तर के नाम दर्ज हैं, लेकिन इन नामों के सामने विकास कार्य क्या कराया गया, इसका विवरण नहीं है। इस भुगतान से संबंधित बिल भी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। ऐसे में यह भुगतान सवालों के घेरे में है।
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77.67 लाख के भुगतान में भी वही कहानी
इसी तरह जुलाई में ही 77,67,353 रुपये का एक और भुगतान दर्ज किया गया है। इसमें भी बिल अपलोड नहीं किया गया। विकास कार्य के स्थान पर मांगेराम, अमित कुमार, बलबीर, विकास, राकेश और योगेश कुमार के नाम लिखे गए हैं। किस सड़क, नाली, भवन, पुलिया या अन्य कार्य पर यह रकम खर्च हुई, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं है।
नाम लिखने से कैसे हुआ विकास कार्य का हिसाब
सवाल यह है कि यदि रकम वास्तव में विकास कार्यों पर खर्च हुई तो कार्य का नाम, स्थान, स्वीकृत लागत और उसकी प्रगति का विवरण पोर्टल पर क्यों नहीं है। यदि ये नाम भुगतान पाने वाले व्यक्ति हैं तो उन्हें विकास कार्य के विवरण की जगह क्यों दर्ज किया गया। अब इन दोनों भुगतानों के मूल बिल, स्वीकृति, कार्यस्थल और मौके पर हुए काम का सत्यापन ही स्पष्ट कर सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में यह महज गड़बड़ी है, या तकनीकी वजह है या फिर भुगतान में कोई अनियमितता हुई है।
कुछ विकास कार्यों के भुगतान चेक के माध्यम से किए जाते हैं। यह वही भुगतान है। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में कोई गड़बड़ी नहीं है।
- चंद्रबीर सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत