{"_id":"65ea0edf2216ebd0f20ed954","slug":"nine-year-old-fatwa-is-not-leaving-darul-uloom-behind-saharanpur-news-c-30-1-smrt1051-119692-2024-03-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: दारुल उलूम का पीछा नहीं छोड़ रहा नौ वर्ष पुराना फतवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: दारुल उलूम का पीछा नहीं छोड़ रहा नौ वर्ष पुराना फतवा
विज्ञापन
- गजवा-ए-हिंद को लेकर जारी किया था फतवा
- विवादों में घिरा दारुल उलूम फिर सुर्खियों में
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। इस्लामी तालीम को लेकर विश्व विख्यात देवबंद दारुल उलूम नौ वर्ष पुराने गजवा-ए-हिंद के फतवे को लेकर विवादों में घिरा है। यह फतवा दारुल उलूम का पीछा नहीं छोड़ रहा है। वहीं, इस मामले को राजनीतिक दल चुनाव में मुद्दा भी बना सकते हैं।
फतवे को लेकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने पुलिस-प्रशासन द्वारा एक सप्ताह पूर्व आयोग को भेजी गई रिपोर्ट पर आपत्ति जताई तो मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब देखना है कि एनसीपीसीआर के आदेश के बाद पुलिस-प्रशासन दोबारा क्या रिपोर्ट भेजता है। दारुल उलूम पर कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन दारुल उलूम भी स्पष्ट कर चुका है कि यह फतवा पुराना है, मौजूदा समय से इसका कोई मतलब नहीं है। यदि इस प्रकरण में एफआइआर हुई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। यह प्रकरण न केवल दारुल उलूम को सुर्खियों में लेकर आया है, बल्कि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की भी नींद उड़ी हुई है कि क्या करें।
-- --
विवादों से रहा है पुराना नाता
देवबंद दारुल उलूम का विवादों से पुराना नाता है। देवबंद में पकड़े गए कई संदिग्धों के तार भी कई बार दारुल उलूम से जुड़े हैं, लेकिन दारुल उलूम प्रबंधन ने हमेशा आरोपों को नकारा है, लेकिन राजनीतिक दलों ने इस मामलों को हमेशा मुद्दा बनाया है। चुनाव के दौरान अक्सर राजनीतिक दलों की रैलियों में भी देवबंद और दारुल उलूम को लेकर बयानबाजी की है। कई बार हुई बयानबाजी को लेकर दारुल उलूम प्रबंधन ने भी जवाब दिया है।
विज्ञापन
--
अब हो सकती है कभी भी कार्रवाई
आयोग द्वारा पुलिस-प्रशासन द्वारा आपत्ति जताने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में अब कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि, आयोग ने भी कार्रवाई के आदेश दिए थे। फतवे को लेकर रिपोर्ट दर्ज हो सकती है। फिलहाल पुलिस-प्रशासन दोबारा मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में लगा है।
विज्ञापन
- विवादों में घिरा दारुल उलूम फिर सुर्खियों में
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। इस्लामी तालीम को लेकर विश्व विख्यात देवबंद दारुल उलूम नौ वर्ष पुराने गजवा-ए-हिंद के फतवे को लेकर विवादों में घिरा है। यह फतवा दारुल उलूम का पीछा नहीं छोड़ रहा है। वहीं, इस मामले को राजनीतिक दल चुनाव में मुद्दा भी बना सकते हैं।
फतवे को लेकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने पुलिस-प्रशासन द्वारा एक सप्ताह पूर्व आयोग को भेजी गई रिपोर्ट पर आपत्ति जताई तो मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब देखना है कि एनसीपीसीआर के आदेश के बाद पुलिस-प्रशासन दोबारा क्या रिपोर्ट भेजता है। दारुल उलूम पर कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन दारुल उलूम भी स्पष्ट कर चुका है कि यह फतवा पुराना है, मौजूदा समय से इसका कोई मतलब नहीं है। यदि इस प्रकरण में एफआइआर हुई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। यह प्रकरण न केवल दारुल उलूम को सुर्खियों में लेकर आया है, बल्कि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की भी नींद उड़ी हुई है कि क्या करें।
विज्ञापन
विवादों से रहा है पुराना नाता
देवबंद दारुल उलूम का विवादों से पुराना नाता है। देवबंद में पकड़े गए कई संदिग्धों के तार भी कई बार दारुल उलूम से जुड़े हैं, लेकिन दारुल उलूम प्रबंधन ने हमेशा आरोपों को नकारा है, लेकिन राजनीतिक दलों ने इस मामलों को हमेशा मुद्दा बनाया है। चुनाव के दौरान अक्सर राजनीतिक दलों की रैलियों में भी देवबंद और दारुल उलूम को लेकर बयानबाजी की है। कई बार हुई बयानबाजी को लेकर दारुल उलूम प्रबंधन ने भी जवाब दिया है।
विज्ञापन
अब हो सकती है कभी भी कार्रवाई
आयोग द्वारा पुलिस-प्रशासन द्वारा आपत्ति जताने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में अब कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि, आयोग ने भी कार्रवाई के आदेश दिए थे। फतवे को लेकर रिपोर्ट दर्ज हो सकती है। फिलहाल पुलिस-प्रशासन दोबारा मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने में लगा है।