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यमुना नदी पर बनाया नया रेलवे ब्रिज, ट्रैक बिछाने की तैयारी
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डीएफसी के लिए यमुना नदी के ऊपर बनाया गया नया ब्रिज
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर/सरसावा। माल ढुलाई के लिए रेल मंत्रालय की महत्वपूर्ण तथा देश की पहली वृहद परियोजना डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) की निर्माण संस्थाएं जल्द से जल्द कॉरिडोर संचालन करने की प्रतिबद्धता जताते हुए बड़ी संरचनाओं के निर्माण में लगी हैं। इसी कड़ी में फ्रेट कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से यमुना नदी के ऊपर एक और रेलवे ब्रिज बनाया गया है। जिस पर अब सिर्फ रेलवे ट्रैक बिछाने की देरी है। रेलवे ट्रैक के बिछाने के साथ ही लुधियाना से सहारनपुर के न्यू पिलखनी रेलवे स्टेशन के यार्ड में मालगाड़ी से सीधा माल उतारा जाएगा।
रेल मंत्रालय द्वारा माल ढुलाई के लिए विशेष रूप से निर्मित किए जा रहे लुधियाना के साहनेवाल स्थान से कोलकाता तक 1856 किलोमीटर लंबे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में विशेष मालवाहक गलियारे की अंबाला डिवीजन का निर्माण कार्य बेहद तेजी के साथ चल रहा है। अंबाला डिवीजन के हिस्से में फ्रेट कॉरिडोर का 175 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक आता है। इसमें अंबाला से लेकर यमुनानगर तक विशेष मालवाहक गलियारा तैयार कर दिया गया है। 175 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक के हिस्से के सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले सरसावा स्थित यमुना नदी के ऊपर भी रेलवे ब्रिज पूरी तरह बनकर तैयार है, जिस पर अब रेलवे ट्रैक बिछाने की देरी है।
डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़े कनिष्ठ परियोजना प्रबंधक उधम सिंह सोलंकी ने बताया कि अंबाला से लेकर यमुनानगर तक रेलवे ट्रैक बिछाकर पूरी तरह तैयार कर दिया गया है। यमुनानगर के समीप नहर के ऊपर एक छोटा ब्रिज निर्माणाधीन है जिसके जल्दी पूरा होने की आशा है। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से यमुना ब्रिज को तो पूरी तरह से तैयार कर भी दिया गया है।
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42 करोड़ में बना ब्रिज, चार साल में तैयार हुआ
2018 में आरंभ हुए ब्रिज का निर्माण चार साल के कठिन परिश्रम के उपरांत पूरा हो गया है। यमुना नदी के ऊपर बने 427 मीटर लंबे इस ब्रिज को बनाने में 2900 टन स्टील तथा करीब 42 करोड़ रुपये की लागत आई है।
फाउंडेशन तैयार, सिर्फ ट्रैक बिछाने की देरी
कनिष्ठ परियोजना प्रबंधक उधम सिंह सोलंकी ने बताया कि यमुनानगर में नहर के ऊपर पुल बनने के साथ ही न्यू पिलखनी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दिया जाएगा। ट्रैक के लिए फाउंडेशन पूरी तरह तैयार हो चुकी है सिर्फ ट्रैक बिछाने की देरी है। जिसे जल्द बिछाया जाएगा। इसके बाद मालगाड़ी का सीधा संचालन आरंभ हो जाएगा। अभी तक मालगाड़ी को सामान्य रेलवे ट्रैक से लाकर न्यू पिलखनी यार्ड के ट्रैक पर लाया जा रहा है।
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रेल मंत्रालय द्वारा माल ढुलाई के लिए विशेष रूप से निर्मित किए जा रहे लुधियाना के साहनेवाल स्थान से कोलकाता तक 1856 किलोमीटर लंबे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में विशेष मालवाहक गलियारे की अंबाला डिवीजन का निर्माण कार्य बेहद तेजी के साथ चल रहा है। अंबाला डिवीजन के हिस्से में फ्रेट कॉरिडोर का 175 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक आता है। इसमें अंबाला से लेकर यमुनानगर तक विशेष मालवाहक गलियारा तैयार कर दिया गया है। 175 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक के हिस्से के सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले सरसावा स्थित यमुना नदी के ऊपर भी रेलवे ब्रिज पूरी तरह बनकर तैयार है, जिस पर अब रेलवे ट्रैक बिछाने की देरी है।
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डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़े कनिष्ठ परियोजना प्रबंधक उधम सिंह सोलंकी ने बताया कि अंबाला से लेकर यमुनानगर तक रेलवे ट्रैक बिछाकर पूरी तरह तैयार कर दिया गया है। यमुनानगर के समीप नहर के ऊपर एक छोटा ब्रिज निर्माणाधीन है जिसके जल्दी पूरा होने की आशा है। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से यमुना ब्रिज को तो पूरी तरह से तैयार कर भी दिया गया है।
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42 करोड़ में बना ब्रिज, चार साल में तैयार हुआ
2018 में आरंभ हुए ब्रिज का निर्माण चार साल के कठिन परिश्रम के उपरांत पूरा हो गया है। यमुना नदी के ऊपर बने 427 मीटर लंबे इस ब्रिज को बनाने में 2900 टन स्टील तथा करीब 42 करोड़ रुपये की लागत आई है।
फाउंडेशन तैयार, सिर्फ ट्रैक बिछाने की देरी
कनिष्ठ परियोजना प्रबंधक उधम सिंह सोलंकी ने बताया कि यमुनानगर में नहर के ऊपर पुल बनने के साथ ही न्यू पिलखनी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दिया जाएगा। ट्रैक के लिए फाउंडेशन पूरी तरह तैयार हो चुकी है सिर्फ ट्रैक बिछाने की देरी है। जिसे जल्द बिछाया जाएगा। इसके बाद मालगाड़ी का सीधा संचालन आरंभ हो जाएगा। अभी तक मालगाड़ी को सामान्य रेलवे ट्रैक से लाकर न्यू पिलखनी यार्ड के ट्रैक पर लाया जा रहा है।

रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए तैयार की गई फाउंडेशन- फोटो : SAHARANPUR