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न नई तकनीक, न प्रशिक्षित चिकित्सक, पुरानी पद्धति से हो रही सर्जरी

Tue, 31 May 2022 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 11:57 PM IST
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Neither new technology, nor trained doctors, surgery being done by old method
सहारनपुर। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिससे सेवाओं में काफी सुधार भी आया है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली सर्जरी की पद्धति आज भी वही है जो अस्पताल की स्थापना के समय 68 साल पहले थी। इसमें मरीज के शरीर में चीरा देकर सर्जरी की जाती है। इस पद्धति में एक ओर जहां सर्जन को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, वहीं यह मरीजों के लिए भी जोखिम भरा रहता है।
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एसबीडी जिला अस्पताल में हर माह 300 से 350 सर्जरी होती है। इनमें आंखों की सर्जरी, सामान्य सर्जरी और नाक, कान और गले की सर्जरी शामिल हैं। सामान्य ऑपरेशन में गुर्दे की पथरी, हार्निया, पित्त की थैली, गदूद, रसोली, आंत आदि की सर्जरी शामिल हैं, जो मरीज के शरीर में चीरा देकर की जाती है। अस्पताल की स्थापना के समय से यही पद्धति चल रही है, जबकि निजी अस्पतालों में इन सभी की सर्जरी दूरबीन (लेप्रोस्कोपी) से होती है, जिसमें शरीर में छोटे से छिद्र कर सर्जरी कर दी जाती है। दूरबीन से सर्जरी में दो टांकों की सर्जरी होती है, जिसमें मरीज को 24 घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन चीरे वाली सर्जरी में मरीज को सात से आठ दिन तक भर्ती रहना पड़ता है। दूरबीन की सर्जरी में मरीज का घाव जल्दी भर जाता है और वह सामान्य रूप से कामकाज करने लगता है, जबकि चीरे की सर्जरी में मरीज का घाव भरने में समय लगता है, जिससे उसके समय की भी बर्बादी होती है। खास बात यह है कि मिशन कायाकल्प में भी पद्धति में सुधार नहीं हो सका है, जबकि कायाकल्प में ऑपरेशन थियेटर पर लाखों रुपया खर्च किया गया है। इसी तरह नाक, कान और गले की सर्जरी भी चीरा देकर की जाती है, जबकि निजी अस्पतालों में माइक्रोस्कोपिक विधि से सर्जरी हो रही हैं।
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सभी सर्जन प्रशिक्षित नहीं
आंखों की सर्जरी या आंखों में लेंस डालने के लिए एसबीडी जिला अस्पताल के आंखों के ऑपरेशन थिएटर में आधुनिक पद्धति मौजूद है। इसके लिए मशीन है, जिसमें फेको विधि से लेंस डाले जाते हैं, लेकिन सभी सर्जन मशीन चलाना नहीं जानते हैं। ऐसे में वह अपने हाथों से आंखों में चीरा देकर लेंस डाल रहे हैं। केवल एक या दो सर्जन को ही उक्त मशीन चलाना आता है।
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जिला अस्पताल में कुल सात सर्जन
एसबीडी जिला अस्पताल में तीन सामान्य सर्जन हैं, जबकि आंखों की सर्जरी के लिए चार और नाक, कान और गले की सर्जरी के लिए तीन सर्जन तैनात हैं। इस प्रकार अस्पताल में कुल सात सर्जन कार्यरत हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर सर्जरी सफल रहती हैं, जिससे सर्जन की योग्यता और विश्वसनीयता बनी हुई है।

जिला अस्पताल में सर्जरी पुरानी पद्धति पर ही होती है, क्योंकि अस्पताल के पास सर्जरी के लिए नई तकनीक नहीं है, लेकिन यहां हर माह 300 से अधिक सर्जरी होती हैं, जो सफल रहती हैं। प्रदेश के सभी जनपदों में सहारनपुर का अस्पताल काफी बेहतर कार्य कर रहा है। प्रयास यही रहता है कि जो भी सुविधाएं अस्पताल में हैं वह यहां आने वाले प्रत्येक मरीज तक पहुंचे और मरीज ठीक होकर अपने घर लौटे।
डॉ. रमेश चंद्रा, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल
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