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लापरवाही: मेडिकल वार्ड में बेड खाली फिर भी बरामदे में बेंचों पर लिटाए जा रहे मरीज
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जगदीप कुमार,
सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतर गई हैं। मेडिकल वार्ड में बेड खाली हैं उसके बाद भी मरीजों को बरामदे में बेंचों पर लिटाया जा रहा है। इससे मरीज और तीमारदारों को परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड दस बेड का है। इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन यानी 24 घंटे में 250 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 80 फीसदी मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, उल्टी और दस्त के बताए जा रहे हैं। इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने बताया कि प्रतिदिन 100 से अधिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। चूंकि इमरजेंसी वार्ड मात्र दस बेड का है। ऐसे में मरीजों को बरामदे तक में बेंचों पर लेटाना पड़ रहा है। उधर जब बेड की उपलब्धता की पड़ताल की तो अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में मूर्ति के ऊपर बने मेडिकल वार्ड में बिस्तर खाली मिले। सवाल यह है कि जब मेडिकल वार्ड में बिस्तर खाली हैं, तो मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में बेंचों पर बरामदे में क्यों डाला गया है? इससे व्यवस्थापकों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। संवाद
यह बताई जा रही वजह
- एक चिकित्सक ने बताया कि ज्यादातर चिकित्सकों को कोविड-19 की ड्यूटी में लगाया गया है। जिससे चिकित्सकों की कमी हो गई है। चूंकि इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक और स्टाफ 24 घंटे तैनात रहता है। ऐसे में मरीजों को वहीं पर भर्ती किया जा रहा है।
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संक्रमण फैलने का खतरा
कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है। मगर दस बेड के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों की भरमार की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। मरीजों के साथ ही तीमारदार भी वार्ड के भीतर और बरामदे में डेरा डाले हैं। जिससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है।
गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए कई बार इमरजेंसी वार्ड में ही रखना पड़ता है। सामान्य स्थिति होने पर उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। यदि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को बेंचों पर लिटाया जा रहा है तो इसे दिखवाया जाएगा।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।
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सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतर गई हैं। मेडिकल वार्ड में बेड खाली हैं उसके बाद भी मरीजों को बरामदे में बेंचों पर लिटाया जा रहा है। इससे मरीज और तीमारदारों को परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड दस बेड का है। इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन यानी 24 घंटे में 250 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 80 फीसदी मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, उल्टी और दस्त के बताए जा रहे हैं। इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने बताया कि प्रतिदिन 100 से अधिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। चूंकि इमरजेंसी वार्ड मात्र दस बेड का है। ऐसे में मरीजों को बरामदे तक में बेंचों पर लेटाना पड़ रहा है। उधर जब बेड की उपलब्धता की पड़ताल की तो अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में मूर्ति के ऊपर बने मेडिकल वार्ड में बिस्तर खाली मिले। सवाल यह है कि जब मेडिकल वार्ड में बिस्तर खाली हैं, तो मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में बेंचों पर बरामदे में क्यों डाला गया है? इससे व्यवस्थापकों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। संवाद
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यह बताई जा रही वजह
- एक चिकित्सक ने बताया कि ज्यादातर चिकित्सकों को कोविड-19 की ड्यूटी में लगाया गया है। जिससे चिकित्सकों की कमी हो गई है। चूंकि इमरजेंसी वार्ड में चिकित्सक और स्टाफ 24 घंटे तैनात रहता है। ऐसे में मरीजों को वहीं पर भर्ती किया जा रहा है।
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संक्रमण फैलने का खतरा
कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है। मगर दस बेड के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों की भरमार की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। मरीजों के साथ ही तीमारदार भी वार्ड के भीतर और बरामदे में डेरा डाले हैं। जिससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है।
गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए कई बार इमरजेंसी वार्ड में ही रखना पड़ता है। सामान्य स्थिति होने पर उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। यदि इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को बेंचों पर लिटाया जा रहा है तो इसे दिखवाया जाएगा।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।