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लापरवाही : खुले में डाल रहे बायो मेडिकल वेस्ट

Thu, 16 Jul 2020 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 11:48 PM IST
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Negligence: Bio medical waste being thrown out in the open
जिला अस्पताल के पीछे डाले गए बायो मेडिकल वेस्ट में नजर आ रही सिरिंज और अन्य कचरा। - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल के पीछे बने कूड़ाघर पर लंबे समय से बायो मेडिकल वेस्ट डालकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। पता होने के बावजूद चिकित्सा विभाग के द्वारा अभी तक किसी अस्पताल पर कार्रवाई नहीं की गई है।
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अमर उजाला ने करीब आठ माह पहले अस्पताल के पीछे डाले जा रहे बायो मेडिकल वेस्ट का समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद करीब छह माह पहले नोडल अधिकारी वीएस पुंडीर ने एक निजी अस्पताल के कर्मचारी को उक्त कूड़ाघर पर बायो मेडिकल वेस्ट डालते हुए पकड़ा था, जिसकी वीडियोग्राफी भी की गई थी। संबंधित अस्पताल को नोटिस जारी कर मामला रफा दफा कर दिया गया। नतीजा कुछ और निजी अस्पतालों ने भी बायो मेडिकल वेस्ट खुले में डालना शुरू कर दिया। बृहस्पतिवार को भी कूड़ाघर पर बायो मेडिकल वेस्ट पड़ा मिला। जिसमें इस्तेमाल की गईं सुइयां, खून से सने कपड़े, खून और ग्लूकोज की खाली बोतलें आदि कचरा शामिल है।
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सिनर्जी कंपनी उठाती है कचरा
जिले में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का ठेका मेरठ की सिनर्जी कंपनी पर है। यही कंपनी एसबीडी जिला अस्पताल, राजकीय मेडिकल कॉलेज और तमाम सीएचसी व पीएचसी से कचरा उठाती है। निजी अस्पताल को भी उक्त कंपनी को कचरा देने के निर्देश हैं। इसकी एवज में कंपनी निजी अस्पतालों से शुल्क लेती है। मगर कुछ अस्पताल सिनर्जी कंपनी को कचरा देने की बजाय खुले में कचरा डालकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
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कोविड अस्पतालों ने की व्यवस्था
बेहट/फतेहपुर/सरसावा। जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी, ग्लोकल मेडिकल कॉलेज मिर्जापुर और सीएचसी फतेहपुर में कोविड अस्पताल बनाए गए हैं। फतेहपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. नवदीप गुप्ता ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट के लिए सीएचसी में तीन कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें कचरा अलग-अलग रखा जाता है। सिनर्जी कंपनी की गाड़ी प्रतिदिन कचरा उठाती है। ग्लोकल मेडिकल कॉलेज में कोविड अस्पताल के इंचार्ज डॉ. कपिलदेव ने बताया कि कोविड अस्पताल का कचरा सिनर्जी कंपनी को जाता है। कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखे गए हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि कोविड अस्पताल का कचरा सिनर्जी को दिया जा रहा है।
बायो मेडिकल वेस्ट के खतरे
बायो मेडिकल वेस्ट में एसचेरीशिया, सेलमोनीला, विबरियो हेपेटाइटिस के कीटाणु सक्रिय रहते हैं। कीटाणु बेहद संक्रामक होते हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. कलीम अहमद के अनुसार बायो मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आने या संक्रमित व्यक्ति को लगी सुई चुभ जाने से व्यक्ति को एचआईवी, वायरल, हेपेटाइटिस, क्षय रोग, श्वास नली, आमाशय व आंत की सूजन, त्वचा एवं नेत्र रोग, न्यूमोनिया, अस्थमा, खांसी, दमा, ब्रांकाइटिस और फेफड़े से संबंधित रोग हो सकते हैं।
बायो मेडिकल वेस्ट खुले में डालने की जानकारी नहीं है। यदि कोई अस्पताल ऐसा कर रहा है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। कौन अस्पताल ऐसा का रहा है पता लगवाकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वीएस पुंडीर, नोडल अधिकारी।

बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में डाला जाना दंडनीय अपराध है। आसपास के सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर अलर्ट किया जाएगा। यदि किसी अस्पताल की शिकायत मिलती है तो कठोर कार्रवाई कराई जाएगी।- एसआर मौर्या, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

सीएचसी फतेहपुर में बायो मेडिकल वेस्ट रखने को बनाए गए कक्ष।

सीएचसी फतेहपुर में बायो मेडिकल वेस्ट रखने को बनाए गए कक्ष।- फोटो : SAHARANPUR

गलोकल केज कोविड अस्पताल में कचरा लेने पहुंची सिनेर्जी कंपनी का गतड़ी।

गलोकल केज कोविड अस्पताल में कचरा लेने पहुंची सिनेर्जी कंपनी का गतड़ी।- फोटो : SAHARANPUR

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