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श्ाब्बीरपुर बवाल ः न जाने कब तक झेलना होगा दहशत का दंश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2017 01:19 AM IST
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शब्बीरपुर की गलियों में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर। शब्बीरपुर में दहशत का दंश लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहा है। कालोनियां सुनसान हो चुकीं हैं, लोगों ने महिलाओं और बच्चों को अपनी रिश्तेदारियों में भेज दिया है। गांव के लोगों को अब दहशत और नफरत को मिटाने वाला चाहिए। उनकी पीड़ा समझ सके और गांव में अमन चैन कायम करा सके।
शब्बीरपुर के दलित समाज के लोगों में पांच मई की घटना की दहशत अभी भी बनी हुई है। बस्तियां सुनसान हैं, लोग दहशत में घरों की बजाय खेतों में ही हैं, महिलाओं और बच्चों को दूसरे गांवों में अपनी रिश्तेदारियों में भेज दिया गया है। दहशत का दंश इतना अधिक है कि अब रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होने लगे हैं, खेतों की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
बच्चे अपने घर आने को छटपटा रहे हैं, लेकिन गांव में बने माहौल के कारण उनकी हिम्मत नहीं हो पा रही है। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोगों का का कहना है कि गांव को न जाने किसकी नजर लग गई है। दलित बस्ती के सुनील कहते हैं कि उनके घर के लोग अभी तक सहमे हुए हैं। गांव में आएं या न आएं, इस पर भी सोच रहे हैं। गांव पूरी तरह बदनाम हो चुका है। बस्ती के लोग घर से बेघर हो चुके है। लेकिन गांव को छोड़कर जाएं भी तो कहां।
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शब्बीरपुर के दलित समाज के लोगों में पांच मई की घटना की दहशत अभी भी बनी हुई है। बस्तियां सुनसान हैं, लोग दहशत में घरों की बजाय खेतों में ही हैं, महिलाओं और बच्चों को दूसरे गांवों में अपनी रिश्तेदारियों में भेज दिया गया है। दहशत का दंश इतना अधिक है कि अब रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होने लगे हैं, खेतों की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
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बच्चे अपने घर आने को छटपटा रहे हैं, लेकिन गांव में बने माहौल के कारण उनकी हिम्मत नहीं हो पा रही है। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोगों का का कहना है कि गांव को न जाने किसकी नजर लग गई है। दलित बस्ती के सुनील कहते हैं कि उनके घर के लोग अभी तक सहमे हुए हैं। गांव में आएं या न आएं, इस पर भी सोच रहे हैं। गांव पूरी तरह बदनाम हो चुका है। बस्ती के लोग घर से बेघर हो चुके है। लेकिन गांव को छोड़कर जाएं भी तो कहां।
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