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Saharanpur News: गृहकर के फर्जीवाड़े की नगर निगम ने कराई जांच
Tue, 06 May 2025 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 06 May 2025 12:41 AM IST
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सहारनपुर। नवाबगंज चौक के एक भवन पर लगे टैक्स में कथित तौर पर फर्जीवाड़े को लेकर अमर उजाला ने सोमवार को प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद नगर निगम ने कर अधीक्षक से भवन का भौतिक सत्यापन कराया है। इसके बाद टैक्स को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
दरअसल, भवन स्वामी को पहले 642 रुपये का टैक्स का बिल भेजा गया था। उसके 12 दिन बाद 1,62,613 रुपये का बिल भेज दिया गया था। इसके करीब पांच महीने बाद नगर निगम ने भवन स्वामी को 13,838 रुपये का बिल भेजा था। एक ही भवन के टैक्स में इतने अंतर को लेकर सुभाष ने नगर निगम में शिकायत की। अमर उजाला ने सोमवार के संस्करण में ''टैक्स निर्धारण पर सवाल, 1.62 लाख का टैक्स हो गया 13 हजार रुपये'' शीर्षक से प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया। अपर नगर आयुक्त राजेश यादव ने समाचार का संज्ञान लेते हुए कर अधीक्षक सुधीर शर्मा को भवन के भौतिक सत्यापन के लिए मौके पर भेजा।
सुधीर शर्मा ने बताया कि 642 रुपये का टैक्स 2015 के निर्धारण के आधार पर लगा हुआ था, जो गलत लगा हुआ था। इसके बाद कर अधीक्षक सुरेंद्र सिंह और राजस्व निरीक्षक अशोक भवन का सत्यापन करने पहुंचे तो नीचे व्यावसायिक भवन पाया गया। ऊपरी मंजिल का भवन व्यावसायिक है या आवासीय। यह जानने के लिए निगम की टीम जब मौके पर गई तो भवन स्वामी ने सहयोग नहीं किया और टीम को लौटा दिया। ऐसे में निगम ने भूतल और प्रथम तल दोनों को व्यावसायिक मानते हुए 1,62,613 रुपये का टैक्स लगा दिया था। इसके बाद भवन स्वामी को परेशानी हुई तो उसने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद निगम ने जांच कराई तो प्रथम तल आवासीय पाया गया, जिसके बाद टैक्स कम होकर 13,838 रुपये किया गया।
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दरअसल, भवन स्वामी को पहले 642 रुपये का टैक्स का बिल भेजा गया था। उसके 12 दिन बाद 1,62,613 रुपये का बिल भेज दिया गया था। इसके करीब पांच महीने बाद नगर निगम ने भवन स्वामी को 13,838 रुपये का बिल भेजा था। एक ही भवन के टैक्स में इतने अंतर को लेकर सुभाष ने नगर निगम में शिकायत की। अमर उजाला ने सोमवार के संस्करण में ''टैक्स निर्धारण पर सवाल, 1.62 लाख का टैक्स हो गया 13 हजार रुपये'' शीर्षक से प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया। अपर नगर आयुक्त राजेश यादव ने समाचार का संज्ञान लेते हुए कर अधीक्षक सुधीर शर्मा को भवन के भौतिक सत्यापन के लिए मौके पर भेजा।
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सुधीर शर्मा ने बताया कि 642 रुपये का टैक्स 2015 के निर्धारण के आधार पर लगा हुआ था, जो गलत लगा हुआ था। इसके बाद कर अधीक्षक सुरेंद्र सिंह और राजस्व निरीक्षक अशोक भवन का सत्यापन करने पहुंचे तो नीचे व्यावसायिक भवन पाया गया। ऊपरी मंजिल का भवन व्यावसायिक है या आवासीय। यह जानने के लिए निगम की टीम जब मौके पर गई तो भवन स्वामी ने सहयोग नहीं किया और टीम को लौटा दिया। ऐसे में निगम ने भूतल और प्रथम तल दोनों को व्यावसायिक मानते हुए 1,62,613 रुपये का टैक्स लगा दिया था। इसके बाद भवन स्वामी को परेशानी हुई तो उसने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद निगम ने जांच कराई तो प्रथम तल आवासीय पाया गया, जिसके बाद टैक्स कम होकर 13,838 रुपये किया गया।
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