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Saharanpur News: नगर निगम की बड़ी चूक, 50 गज के मकान पर 147 करोड़ का गृहकर
Wed, 05 Aug 2026 01:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:42 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया था। पिछले दिनों सपा नेता फरहाद आलम गाड़ा को 22 करोड़ रुपये गृहकर का बिल भेजा गया था, अब नगर निगम ने 50 गज में बने एक मकान पर 147 करोड़ का गृहकर बकाया दर्शाते हुए नोटिस जारी किया है। हैरत की बात यह है कि अधिकारी ने भी आंख बंद करके नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए।
दरअसल, जीआईएस सर्वे शुरू से सवालों के घेरे में रहा है। हजारों भवन स्वामी सर्वे आधारित गृहकर को नकार चुके हैं, जिसके बाद निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनानी पड़ी। जिन लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरे उनका तो गृहकर कम हुआ है बाकी पर सर्वे आधारित गृहकर थोपा गया है। अब नगर निगम वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिल जारी कर रहा है, जिनमें सर्वे में बरती गई घोर लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी उजागर हो रही है।
हाल ही में नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग की तरफ से कमेला कॉलोनी निवासी गुलफाम अहमद के 50 वर्ग गज में बने मकान (संपत्ति संख्या 11/5878/2) को नोटिस जारी किया है। इसमें 1466119657.42 (एक अरब 46 करोड़ 61 लाख 19 हजार 657 रुपये और 42 पैसे) का गृहकर दर्शाया गया है। न तो गृहकर का प्रिंट निकालने वाले लिपिक ने बिल को गौर से देखा और न ही हस्ताक्षर करने वाले कर अधीक्षक ने। नोटिस हाथ में आने के बाद से भवन स्वामी परेशान है।
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बता दें, कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता फरहाद आलम गाड़ा के मल्हीपुर रोड स्थित मकान का गृहकर 22 करोड़ दर्शाते हुए बिल भेजा था। आपत्ति दर्ज कराने के बाद निगम अधिकारियों में हड़कंप है। उद्यमी और व्यापारी पहले ही अनेक प्रतिष्ठानों पर 100 गुना तक का गृहकर बढ़ाने का आरोप लगा चुके हैं।
गृहकर के दायरे में संपत्तियां
कुल संपत्ति : 2.13 लाख
व्यावसायिक : 38 हजार
आवासीय : 1.43 लाख
अन्य : 32 हजार
13 हजार लोग नकार चुके
नगर निगम ने सबसे पहले 38 हजार व्यावसायिक भवनों को जीआईएस सर्वे आधारित बिल भेजे थे, जिन्हें लेकर विरोध हुआ था। इसके बाद निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनानी पड़ी। करीब छह लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर अपनी मर्जी का गृहकर जमा किया। इसके बाद 72000 आवासीय संपत्तियों के बिल जारी किए गए। इनमें से भी करीब सात हजार लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरे हैं।
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यह बोले अधिकारी
इस मामले में कर अधीक्षक आशुतोष गुप्ता का कहना है की नोटिस पर हस्ताक्षर उनके नहीं है और और न ही इस नंबर की कोई संपत्ति है।
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दरअसल, जीआईएस सर्वे शुरू से सवालों के घेरे में रहा है। हजारों भवन स्वामी सर्वे आधारित गृहकर को नकार चुके हैं, जिसके बाद निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनानी पड़ी। जिन लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरे उनका तो गृहकर कम हुआ है बाकी पर सर्वे आधारित गृहकर थोपा गया है। अब नगर निगम वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिल जारी कर रहा है, जिनमें सर्वे में बरती गई घोर लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी उजागर हो रही है।
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हाल ही में नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग की तरफ से कमेला कॉलोनी निवासी गुलफाम अहमद के 50 वर्ग गज में बने मकान (संपत्ति संख्या 11/5878/2) को नोटिस जारी किया है। इसमें 1466119657.42 (एक अरब 46 करोड़ 61 लाख 19 हजार 657 रुपये और 42 पैसे) का गृहकर दर्शाया गया है। न तो गृहकर का प्रिंट निकालने वाले लिपिक ने बिल को गौर से देखा और न ही हस्ताक्षर करने वाले कर अधीक्षक ने। नोटिस हाथ में आने के बाद से भवन स्वामी परेशान है।
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बता दें, कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता फरहाद आलम गाड़ा के मल्हीपुर रोड स्थित मकान का गृहकर 22 करोड़ दर्शाते हुए बिल भेजा था। आपत्ति दर्ज कराने के बाद निगम अधिकारियों में हड़कंप है। उद्यमी और व्यापारी पहले ही अनेक प्रतिष्ठानों पर 100 गुना तक का गृहकर बढ़ाने का आरोप लगा चुके हैं।
गृहकर के दायरे में संपत्तियां
कुल संपत्ति : 2.13 लाख
व्यावसायिक : 38 हजार
आवासीय : 1.43 लाख
अन्य : 32 हजार
13 हजार लोग नकार चुके
नगर निगम ने सबसे पहले 38 हजार व्यावसायिक भवनों को जीआईएस सर्वे आधारित बिल भेजे थे, जिन्हें लेकर विरोध हुआ था। इसके बाद निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली अपनानी पड़ी। करीब छह लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर अपनी मर्जी का गृहकर जमा किया। इसके बाद 72000 आवासीय संपत्तियों के बिल जारी किए गए। इनमें से भी करीब सात हजार लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरे हैं।
यह बोले अधिकारी
इस मामले में कर अधीक्षक आशुतोष गुप्ता का कहना है की नोटिस पर हस्ताक्षर उनके नहीं है और और न ही इस नंबर की कोई संपत्ति है।