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नगरायुक्त ने पूजा के गलत कदम उठाने की आशंका जताई
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी सहारनपुर के सीईओ / नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने उन पर और सीएफओ (मुख्य वित्त अधिकारी) पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली स्मार्ट सिटी की कंपनी की सचिव पूजा वर्मा को पुलिस अभिरक्षा में रखने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी और अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि वह मन में आत्महत्या के भाव आने की बात सोशल मीडिया पर कह रही है।
कंपनी की सचिव पूजा वर्मा ने राज्य महिला आयोग को पत्र भेजकर सीईओ ज्ञानेंद्र सिंह और सीएफओ राजीव कुशवाहा पर मानसिक उत्पीड़न और फाइलों पर नियम विरुद्ध हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाने और वेतन रोकने का आरोप लगाया। इस संबंध में पूजा वर्मा ने मंडलायुक्त राजामौलि को भी शिकायत पत्र दिया। इसके बाद मंडलायुक्त ने तीन पीसीएस अधिकारियों की एक जांच समिति गठित की।
पूरे प्रकरण को लेकर स्मार्ट सिटी सहारनपुर के सीईओ / नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया कि कंपनी की सचिव पूजा वर्मा लंबे समय तक बिना किसी कारण के कार्यालय से अनुपस्थित रही हैं। बाद में उन्होंने केवल पांच दिन का बीएएमएस डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल दिया, इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूजा वर्मा का वेतन न देने का आरोप भी निराधार है। उनका मार्च, अप्रैल और मई माह का वेतन पांच जून को ही उनके खाते में भेजा जा चुका है।
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पूजा वर्मा द्वारा लगाए कथित भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताते हुए ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले नौ महीने से स्मार्ट सिटी की किसी परियोजना संबंधी ऐसा कोई भुगतान ही नहीं हुआ, जिसमें भ्रष्टाचार की बात सामने आए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी में खर्च हुए एक-एक पैसे का ऑडिट केंद्र सरकार की एजेंसी कैग द्वारा किया जाता है, इसलिए किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं उठता।
ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी एक कंपनी है और उसकी बैठक बुलाने, बैठकों में लिए गए निर्णयों का अनुपालन कराने, विधि अनुसार सब कार्यों की निगरानी करने और उनसे स्मार्ट सिटी बोर्ड को अवगत कराने, समस्त रिकॉर्ड का रखरखाव करने, बजट को अंतिम रूप देने, ऑडिट कराने तथा वित्त संबंधी सभी फाइलों को चेक करने, उन्हें फाइनल करने, समय समय पर एमआईएस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व कंपनी सचिव का है, लेकिन कंपनी की सचिव की ओर से कोई भी कार्य ढंग से नहीं किया गया। नतीजा स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर पिछड़ता चला गया।
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कंपनी की सचिव पूजा वर्मा ने राज्य महिला आयोग को पत्र भेजकर सीईओ ज्ञानेंद्र सिंह और सीएफओ राजीव कुशवाहा पर मानसिक उत्पीड़न और फाइलों पर नियम विरुद्ध हस्ताक्षर कराने के लिए दबाव बनाने और वेतन रोकने का आरोप लगाया। इस संबंध में पूजा वर्मा ने मंडलायुक्त राजामौलि को भी शिकायत पत्र दिया। इसके बाद मंडलायुक्त ने तीन पीसीएस अधिकारियों की एक जांच समिति गठित की।
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पूरे प्रकरण को लेकर स्मार्ट सिटी सहारनपुर के सीईओ / नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया कि कंपनी की सचिव पूजा वर्मा लंबे समय तक बिना किसी कारण के कार्यालय से अनुपस्थित रही हैं। बाद में उन्होंने केवल पांच दिन का बीएएमएस डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल दिया, इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूजा वर्मा का वेतन न देने का आरोप भी निराधार है। उनका मार्च, अप्रैल और मई माह का वेतन पांच जून को ही उनके खाते में भेजा जा चुका है।
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पूजा वर्मा द्वारा लगाए कथित भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को झूठ का पुलिंदा बताते हुए ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले नौ महीने से स्मार्ट सिटी की किसी परियोजना संबंधी ऐसा कोई भुगतान ही नहीं हुआ, जिसमें भ्रष्टाचार की बात सामने आए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी में खर्च हुए एक-एक पैसे का ऑडिट केंद्र सरकार की एजेंसी कैग द्वारा किया जाता है, इसलिए किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं उठता।
ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी एक कंपनी है और उसकी बैठक बुलाने, बैठकों में लिए गए निर्णयों का अनुपालन कराने, विधि अनुसार सब कार्यों की निगरानी करने और उनसे स्मार्ट सिटी बोर्ड को अवगत कराने, समस्त रिकॉर्ड का रखरखाव करने, बजट को अंतिम रूप देने, ऑडिट कराने तथा वित्त संबंधी सभी फाइलों को चेक करने, उन्हें फाइनल करने, समय समय पर एमआईएस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व कंपनी सचिव का है, लेकिन कंपनी की सचिव की ओर से कोई भी कार्य ढंग से नहीं किया गया। नतीजा स्मार्ट सिटी योजना में सहारनपुर पिछड़ता चला गया।