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हर माह तीन हजार से अधिक लोगों पर कुत्तों का हमला

Sat, 28 Sep 2019 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 12:15 AM IST
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More than three thousand people attack dogs every month
जिला अस्पताल में एंटी रेबिज इंजेक्शन लगवाने को बना कक्ष - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जनपद में कुत्तों का आतंक किस कदर है इसका अंदाजा सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन पहुंचने वाले कुत्तों के हमले में घायलों से लगाया जा सकता है। जानकर हैरानी होगी कि जिला अस्पताल समेत जनपद की तमाम सीएचसी और पीएचसी में हर माह तीन हजार से अधिक कुत्तों के हमले के घायल पहुंचते हैं।
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एसबीडी जिला अस्पताल में शुक्रवार को कुत्ता काटने के 56 लोग पहुंचे, जिनको एंटी रेबीज इंजेक्शन दिए गए। प्रत्येक माह यहां एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वाले नए लोगों की संख्या 1500 से 1800 के बीच रहती है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर सतीश कुमार ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जिले के सीएचसी और पीएचसी पर भी प्रतिमाह कुत्ता काटने के 2000 से अधिक मामले पहुंचते हैं। नागल स्थित सीएचसी पर सप्ताह में 40 से 50 मामले आते हैं। यहां सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। बड़गांव पीएचसी से मरीजों को नानौता सीएचसी भेजा जाता है। गंगोह सीएचसी पर सप्ताह में 30 से 40 मामले आते हैं। यहां सोमवार और बृहस्पतिवार को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। गागलहेड़ी सीएचसी पर प्रतिदिन 10 से अधिक मामले आते हैं। नकुड़ सामुदायिक केंद्र पर सप्ताह में 40 से 50 मामले कुत्ता काटने के आते हैं। सोमवार और बृहस्पतिवार केे टीके लगाए जाते हैं। रामपुर मनिहारान और नकुड़ सीएचसी के साथ ही अंबेहटा पीएचसी पर भी कुत्ता काटने के मामले बराबर आते रहे हैं।
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- क्या है रेबीज
रेबीज एक बीमारी है जो रेबीज नामक विषाणु से होती है। यह मुख्य रूप से पशुओं की बीमारी है, लेकिन संक्रमित पशुओं द्वारा मनुष्यों में भी आ सकती है। यह विषाणु संक्रमित पशुओं की लार में रहता है। जब पशु किसी मनुष्य को काटता है तो संक्रमित लार मनुष्य में संक्रमित हो जाता है। इस बीमारी के लक्षण कई महीनों या कई वर्ष में सामने आ सकते हैं। मगर सामान्य तौर पर एक से तीन माह में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। आलस के साथ निद्रा की स्थिति रहना और कई बार चिड़चिड़ापन आना इसके प्रारंभिक लक्षण हैं।
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रेबीज के मुख्य लक्षण
- जिस जगह पशु ने काटा उस जगह सनसनाहट रहना।
- विषाणु के मस्तिष्क में पहुंचने पर दर्द के साथ थकावट होना।
- बुखार आना और मांसपेशियों में जकड़न होना।
- मरीज का घूमना-फिरना और अजोबो-गरीब विचार आना।
- लार और आंसुओं का बहना और मुंह में झाग बनना।
- तेज रोशनी या आवाज से चिढ़न होना।
- बोलने में तकलीफ होना और अचानक किसी पर आक्रमण करना।
- सभी चीजें दो दिखाई देने लगती हैं।
पशुओं से हो सकता है रेबीज
बहुत सारे पशु ऐसे होते हैं, जिनसे रेबीज मनुष्यों में फैल सकता है। जंगली जानवर रेबीज विषाणु को फैलाने का कार्य अधिक करते हैं जैसे चमगादड़, लोमड़ी आदि। पालतू पशु जैसे कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस और दूसरे पशु भी रेबीज को लोगों में फैलाते हैं। कुत्ता, बिल्ली, घोड़े आदि को रेबीज का टीकाकरण किया जाता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को इन पशुओं ने काट लिया है तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
रेबीज से बचाने उपाय
अगर आप एक जिम्मेदार पशुपालक हों तो अपने कुत्ते, बिल्लियों का टीकाकरण सही समय पर कराते रहना चाहिए। टीकाकरण केवल अपने पशुओं के लिए ही लाभदायक नहीं होता, बल्कि आप भी सुरक्षित रहते हैं। यदि आपके पशु को किसी अन्य पशु ने काटा है तो अपने पशु का इलाज कराएं। साथ ही गली मोहल्लों और सड़कों पर मंडराने वाले पशुओं से सावधान रहें।

- रेबीज का उपचार
यदि किसी व्यक्ति को किसी पशु ने काटा है तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क कर डॉक्टर की सलाह से एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए, जहां इसकी सुविधा निशुल्क है। यदि सरकारी अस्पताल दूर है तो अच्छे निजी चिकित्सक से भी इंजेक्शन लगवा सकते हैं। टीका लगवाने में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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