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बास्तम गांव में बुखार के 100 से ज्यादा मरीज
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सहारनपुर/ देवबंद। देवबंद के कई गांवों में बुखार बेकाबू हो रहा है। गांव बस्तम में तो बुखार के 100 से ज्यादा मरीज हैं और तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। परिजन भी मौत का कारण बुखार होना बता रहे हैं, मगर चिकित्सा विभाग मानने को तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि बुखार से ग्रसित मरीज और उनके परिजन अनहोनी की आशंका को लेकर दहशत में हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बास्तम में रविंद्र त्यागी (65) को बुखार होने पर 16 अक्तूबर को मुजफ्फरनगर के मेडिकल कॉलेज मे भर्ती कराया था। प्लेटलेट्स बेहद कम होने की वजह से उसी दिन रविंद्र की मौत हो गई। 50 वर्षीय मीरा पत्नी विनोद की मौत भी बुखार के चलते हुई। पिछले दिनों बारिश ज्यादा होने से तालाब में पानी भरने से मच्छर पैदा हुए। इसके बाद भी बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
उधर, गांव सुल्तानपुर, रणखंडी और दिवालहेड़ी में भी बुखार पीड़ितों की तादात अचानक बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। सीएचसी की ओर से उक्त गांवों में टीमें भेजकर जांच कराई जा रही है। मच्छरों के खात्मे के लिए एंटी लारवा का छिड़काव और फॉगिंग कराई।
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बजरंग दल के प्रांत संयोजक विकास त्यागी का कहना है कि गांव बास्तम में 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनमें से करीब 50-60 लोग तो मेरठ, मुजफ्फरनगर, देवबंद व सहारनपुर के अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। गांव रणखंडी निवासी ठाकुर अनिल सिंह ने बताया कि उनके गांव में 30 से 40 लोग बुखार से ग्रसित हैं। चिकित्सा विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी हैं। गांव में कैंप लगाकर जांच और दवा वितरित होनी चाहिए। - जनप्रतिनिधियों की बात
गांव सुलतानपुर के प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि उनके गांव के हर घर में बुखार पीड़ित हैं। दो बार कैंप लग चुका है। इनमें करीब 80 से अधिक लोगों का उपचार किया। अब भी कई लोग बीमार हैं, जो इलाज करा रहे हैं।
गांव बास्तम के प्रधान कुलदीप कुमार ने बताया कि गांव में बुखार के मरीज हर घर में हैं। तीन बार शिविर लगाया गया है। उसके बाद से कुछ राहत है, मगर बुखार से हुई मौतों की वजह से लोग दहशत में हैं।
गांव बास्तम और सुल्तानपुर में 289 घरों में डेंगू का सर्वे कराया गया। बुखार पीड़ित 61 मरीजों का उपचार किया। जबकि मलेरिया की 12 स्लाइड बनाई। डेंगू का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। वायरल बुखार से अधिक लोग पीड़ित हैं। स्वास्थ्य टीम भेजकर गांव में बुखार पीड़ितों का कराया जा रहा उपचार। - डॉ. अजय कुमार त्यागी, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी देवबंद।
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ग्रामीणों ने बताया कि बास्तम में रविंद्र त्यागी (65) को बुखार होने पर 16 अक्तूबर को मुजफ्फरनगर के मेडिकल कॉलेज मे भर्ती कराया था। प्लेटलेट्स बेहद कम होने की वजह से उसी दिन रविंद्र की मौत हो गई। 50 वर्षीय मीरा पत्नी विनोद की मौत भी बुखार के चलते हुई। पिछले दिनों बारिश ज्यादा होने से तालाब में पानी भरने से मच्छर पैदा हुए। इसके बाद भी बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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उधर, गांव सुल्तानपुर, रणखंडी और दिवालहेड़ी में भी बुखार पीड़ितों की तादात अचानक बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। सीएचसी की ओर से उक्त गांवों में टीमें भेजकर जांच कराई जा रही है। मच्छरों के खात्मे के लिए एंटी लारवा का छिड़काव और फॉगिंग कराई।
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बजरंग दल के प्रांत संयोजक विकास त्यागी का कहना है कि गांव बास्तम में 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनमें से करीब 50-60 लोग तो मेरठ, मुजफ्फरनगर, देवबंद व सहारनपुर के अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। गांव रणखंडी निवासी ठाकुर अनिल सिंह ने बताया कि उनके गांव में 30 से 40 लोग बुखार से ग्रसित हैं। चिकित्सा विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी हैं। गांव में कैंप लगाकर जांच और दवा वितरित होनी चाहिए। - जनप्रतिनिधियों की बात
गांव सुलतानपुर के प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि उनके गांव के हर घर में बुखार पीड़ित हैं। दो बार कैंप लग चुका है। इनमें करीब 80 से अधिक लोगों का उपचार किया। अब भी कई लोग बीमार हैं, जो इलाज करा रहे हैं।
गांव बास्तम के प्रधान कुलदीप कुमार ने बताया कि गांव में बुखार के मरीज हर घर में हैं। तीन बार शिविर लगाया गया है। उसके बाद से कुछ राहत है, मगर बुखार से हुई मौतों की वजह से लोग दहशत में हैं।
गांव बास्तम और सुल्तानपुर में 289 घरों में डेंगू का सर्वे कराया गया। बुखार पीड़ित 61 मरीजों का उपचार किया। जबकि मलेरिया की 12 स्लाइड बनाई। डेंगू का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। वायरल बुखार से अधिक लोग पीड़ित हैं। स्वास्थ्य टीम भेजकर गांव में बुखार पीड़ितों का कराया जा रहा उपचार। - डॉ. अजय कुमार त्यागी, चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी देवबंद।