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Saharanpur News: मनरेगा का बकाया 5.75 करोड़ अब वीबी जी राम जी के जिम्मे
Thu, 08 Jan 2026 12:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:39 AM IST
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सहारनपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा कानून लाया गया था। सरकार ने इसे बदलकर अब विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) कर दिया है। इसके तहत जिले में कुल 5.75 करोड़ रुपये बकाया है।
मजदूरों का पारिश्रमिक और निर्माण सामग्री मुहैया कराने वाली फर्मों की राशि इस मद में बकाया है। इसमें मजदूरों के 39 लाख तो फर्म और व्यापारियों के 5.24 करोड़ रुपये बकाया है।
अब जब सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है, तो फर्मों को अपनी बकाया राशि फंसती हुई दिखाई दे रही है। भुगतान के फंसने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी रफ्तार नहीं मिल पा रही है। इसमें भी सबसे अधिक परेशानी पक्के निर्माण के कार्यों को लेकर होती है।
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कच्चे निर्माण के लिए भुगतान केंद्र सरकार की ओर से एक से दो महीने में आ जाता है। पुंवारका ब्लॉक की ग्राम पंचायत गदनपुरा के प्रधान संजय वालिया ने बताया कि पक्के निर्माण की बकाया राशि साल भर के बाद ही प्राप्त होती है। उन्होंने गांव में स्कूल के चारों ओर दीवार का निर्माण कराया था। इस पर करीब 1.90 लाख रुपये खर्च हुए थे। इसका भुगतान भी साल भर से नहीं हुआ है।
इसी तरह नकुड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत रनियाला दयालपुर के ग्राम प्रधान सुभाष चौधरी ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र में निर्माण कराए। इस पर पांच लाख रुपये खर्च हुए।
सालभर से अधिक समय हो चुका है, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया है। इसी तरह गांव सुल्तानपुर के प्रधान राजेश कश्यप ने बताया कि मनरेगा मजदूरी तो समय पर आ जाती है, लेकिन पक्के निर्माण के बकाए का भुगतान में काफी देर होता है। यह स्थिति तकरीबन हर ब्लॉक में हैं। अभी तक नए कानून को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है।
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मजदूरों का पारिश्रमिक और निर्माण सामग्री मुहैया कराने वाली फर्मों की राशि इस मद में बकाया है। इसमें मजदूरों के 39 लाख तो फर्म और व्यापारियों के 5.24 करोड़ रुपये बकाया है।
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अब जब सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है, तो फर्मों को अपनी बकाया राशि फंसती हुई दिखाई दे रही है। भुगतान के फंसने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी रफ्तार नहीं मिल पा रही है। इसमें भी सबसे अधिक परेशानी पक्के निर्माण के कार्यों को लेकर होती है।
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कच्चे निर्माण के लिए भुगतान केंद्र सरकार की ओर से एक से दो महीने में आ जाता है। पुंवारका ब्लॉक की ग्राम पंचायत गदनपुरा के प्रधान संजय वालिया ने बताया कि पक्के निर्माण की बकाया राशि साल भर के बाद ही प्राप्त होती है। उन्होंने गांव में स्कूल के चारों ओर दीवार का निर्माण कराया था। इस पर करीब 1.90 लाख रुपये खर्च हुए थे। इसका भुगतान भी साल भर से नहीं हुआ है।
इसी तरह नकुड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत रनियाला दयालपुर के ग्राम प्रधान सुभाष चौधरी ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र में निर्माण कराए। इस पर पांच लाख रुपये खर्च हुए।
सालभर से अधिक समय हो चुका है, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया है। इसी तरह गांव सुल्तानपुर के प्रधान राजेश कश्यप ने बताया कि मनरेगा मजदूरी तो समय पर आ जाती है, लेकिन पक्के निर्माण के बकाए का भुगतान में काफी देर होता है। यह स्थिति तकरीबन हर ब्लॉक में हैं। अभी तक नए कानून को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है।