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मायावती ने मुस्लिमों के जख्मों को कुरेदा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 12 Sep 2016 01:08 AM IST
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दिल्ली रोड पर बीएसपी की रैली में नाचते गाते जाते समर्थक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने रैली में अपने डेढ़ घंटे के भाषण में मुस्लिमों को खासी तवज्जो दी। मायावती ने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आई है, मुस्लिमों पर सांप्रदायिकता और गौरक्षा के नाम पर जुल्म-ज्यादती हो रही हैं।
मुजफ्फरनगर दंगे के लिए सपा को दोषी ठहराते हुए मायावती ने कहा कि पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिला। माया ने मुस्लिमों को भाजपा का डर दिखाते हुए यह भी कहा कि सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को ताले में बंद कर दिया है।
माया ने अल्पसंख्यक वोटबैंक को साधने की पहल करते हुए खुद को हितैषी होने के तमाम दावे किए। मिशन 2017 के लिए वोटरों के बीच बसपा ही एकमात्र विकल्प होने का आधार खड़ा करने के लिए माया ने कई तरह के गणित समझाए। मुस्लिम वोटबैंक लुभाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र छेड़कर उन्होंने मुस्लिमों की दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश की। माया ने कहा कि दंगा पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है। दंगे के लिए माया ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
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बहनजी ने कहा कि मुसलमान मुजफ्फरनगर, हासिमपुरा और बदायुं के दंगों के दर्द को नहीं भूल सकते। दंगे होते नहीं, कराए जाते हैं। नेता खड़े होकर तमाशा देखते हैं, राजनीति करते हैं। बहनजी ने यूपी के दंगों के लिए सपा, भाजपा और कांग्रेस को कसूरवार ठहराया। माया ने यह भी कहा कि केंद्र में जब से भाजपा की सरकार आई है मुस्लिमों पर जुल्म-ज्यादती बढ़ी गई हैं।
गौरक्षा के मुद्दे को भी मायावती ने उठाया। उन्होंने कहा कि गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों का उत्पीड़न किया जा रहा है। दादरी के बिसाहड़ा और गुजरात के ऊना कांड का भी माया ने नाम लिया। बसपा सुप्रीमो ने मुसलमानों को भाजपा का डर भी दिखाया और कहा कि सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को ताले में बंद कर दिया है।
माया ने कांग्रेस को भी यह कहते हुए लपेटा कि अयोध्या कांड में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, केंद्र को तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए था। बाद में दंगे हुए, जिनमें पश्चिम यूपी के मुसलमानों का बहुत नुकसान हुआ। बहनजी लोगों को यह भी आगाह कर गईं कि आने वाले समय में भाजपा और सपा फिर से दंगा करा सकती हैं।
मायावती के भाषण का अधिकांश हिस्सा मुस्लिमों पर फोकस था। यह इसलिए भी हो सकता है कि रैली में दलितों के मुकाबले मुसलिमों की तादाद काफी कम नजर आ रही थी। बसपा से मुंह मोड़ चुके नेताओं के नुकसान पर माया खामोश रहीं, उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि बाहर जाने वालों का कोई वजूद नहीं।
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मुजफ्फरनगर दंगे के लिए सपा को दोषी ठहराते हुए मायावती ने कहा कि पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिला। माया ने मुस्लिमों को भाजपा का डर दिखाते हुए यह भी कहा कि सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को ताले में बंद कर दिया है।
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माया ने अल्पसंख्यक वोटबैंक को साधने की पहल करते हुए खुद को हितैषी होने के तमाम दावे किए। मिशन 2017 के लिए वोटरों के बीच बसपा ही एकमात्र विकल्प होने का आधार खड़ा करने के लिए माया ने कई तरह के गणित समझाए। मुस्लिम वोटबैंक लुभाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र छेड़कर उन्होंने मुस्लिमों की दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश की। माया ने कहा कि दंगा पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिला है। दंगे के लिए माया ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
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बहनजी ने कहा कि मुसलमान मुजफ्फरनगर, हासिमपुरा और बदायुं के दंगों के दर्द को नहीं भूल सकते। दंगे होते नहीं, कराए जाते हैं। नेता खड़े होकर तमाशा देखते हैं, राजनीति करते हैं। बहनजी ने यूपी के दंगों के लिए सपा, भाजपा और कांग्रेस को कसूरवार ठहराया। माया ने यह भी कहा कि केंद्र में जब से भाजपा की सरकार आई है मुस्लिमों पर जुल्म-ज्यादती बढ़ी गई हैं।
गौरक्षा के मुद्दे को भी मायावती ने उठाया। उन्होंने कहा कि गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों का उत्पीड़न किया जा रहा है। दादरी के बिसाहड़ा और गुजरात के ऊना कांड का भी माया ने नाम लिया। बसपा सुप्रीमो ने मुसलमानों को भाजपा का डर भी दिखाया और कहा कि सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को ताले में बंद कर दिया है।
माया ने कांग्रेस को भी यह कहते हुए लपेटा कि अयोध्या कांड में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, केंद्र को तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए था। बाद में दंगे हुए, जिनमें पश्चिम यूपी के मुसलमानों का बहुत नुकसान हुआ। बहनजी लोगों को यह भी आगाह कर गईं कि आने वाले समय में भाजपा और सपा फिर से दंगा करा सकती हैं।
मायावती के भाषण का अधिकांश हिस्सा मुस्लिमों पर फोकस था। यह इसलिए भी हो सकता है कि रैली में दलितों के मुकाबले मुसलिमों की तादाद काफी कम नजर आ रही थी। बसपा से मुंह मोड़ चुके नेताओं के नुकसान पर माया खामोश रहीं, उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि बाहर जाने वालों का कोई वजूद नहीं।