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राष्ट्रीय घुडसवारी प्रतियोगिता में मयंक ने जीता सोना
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घुड़सवार मयंक
- फोटो : SAHARANPUR
राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में मयंक ने जीता सोना
सहारनपुर। भारतीय घुड़सवारी महासंघ की ओर से जयपुर में कराई गई राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में सहारनपुर के मयंक कुमार ने स्वर्ण पदक जीतकर जिले के साथ ही उत्तर प्रदेश का भी नाम रोशन किया है। खेल प्रेमियों ने पदक जीतने पर मयंक को बधाई दी है।
मयंक मूल रूप से सुक्खुपुरा बेरीबाग के रहने वाले हैं। मयंक एनसीसी कैडेट रहे हैं। एनसीसी में रहते हुए ही उन्होंने घुड़सवारी सीखी थी। यहीं से उनके भीतर घुड़सवारी को लेकर दिलचस्पी पैैदा हुई। इसके बाद उन्होंने घुड़सवारी में ही करियर बनाने का निर्णय लिया तथा घुड़सवारी की और बारीकियां सीखने के लिए जयपुर चले गए। जयपुर की एक एकेडमी से घुड़सवारी सीखी और अब उसी एकेडमी में कोच के रूप में काम कर रहे हैं। मयंक ने बताया कि वह अभी तक तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। पहली दो प्रतियोगिताओं में रजत पदक जीते थे, लेकिन इस बार 13 और 14 फरवरी को जयपुर में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है। उसका सपना एशियन खेलों में देश के लिए पदक जीतना है। उसका कहना है कि इंसान किसी भी क्षेत्र में अपना करियर बना सकता है, लेकिन इसके लिए उसके अंदर जुनून होना जरूरी है। बेटे की इस उपलब्धि से पिता राकेश कुमार और मां गीता रानी बेहद खुश हैं।
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सहारनपुर। भारतीय घुड़सवारी महासंघ की ओर से जयपुर में कराई गई राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में सहारनपुर के मयंक कुमार ने स्वर्ण पदक जीतकर जिले के साथ ही उत्तर प्रदेश का भी नाम रोशन किया है। खेल प्रेमियों ने पदक जीतने पर मयंक को बधाई दी है।
मयंक मूल रूप से सुक्खुपुरा बेरीबाग के रहने वाले हैं। मयंक एनसीसी कैडेट रहे हैं। एनसीसी में रहते हुए ही उन्होंने घुड़सवारी सीखी थी। यहीं से उनके भीतर घुड़सवारी को लेकर दिलचस्पी पैैदा हुई। इसके बाद उन्होंने घुड़सवारी में ही करियर बनाने का निर्णय लिया तथा घुड़सवारी की और बारीकियां सीखने के लिए जयपुर चले गए। जयपुर की एक एकेडमी से घुड़सवारी सीखी और अब उसी एकेडमी में कोच के रूप में काम कर रहे हैं। मयंक ने बताया कि वह अभी तक तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं। पहली दो प्रतियोगिताओं में रजत पदक जीते थे, लेकिन इस बार 13 और 14 फरवरी को जयपुर में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है। उसका सपना एशियन खेलों में देश के लिए पदक जीतना है। उसका कहना है कि इंसान किसी भी क्षेत्र में अपना करियर बना सकता है, लेकिन इसके लिए उसके अंदर जुनून होना जरूरी है। बेटे की इस उपलब्धि से पिता राकेश कुमार और मां गीता रानी बेहद खुश हैं।
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