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गणित बिगाड़ने में सबसे आगे निर्दलीय
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 19 Jan 2017 11:58 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo pic
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सहारनपुर विधानसभा चुनावों में जहां प्रत्याशी जीतने के लिए दमखम दिखा रहे हैं, वहीं उनका खेल बिगाड़ने के लिए निर्दलीय भी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। 2012 के विधानसभा चुनावों में चार सीटों पर निर्दलियों ने ऐसा गणित बिगाड़ा कि जीतते-जीतते उम्मीदवार हार गए।
अधिकांश निर्दलियों की मंशा जीतने की बजाय गणित बिगाड़ने में अधिक रही है। सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलियों की बड़ी भूमिका रही है।
खासकर गंगोह, बेहट और नकुड़ सीट पर निर्दलियों ने 2012 के विधानसभा सीटों पर न सिर्फ गणित बिगाड़ा बल्कि चुनाव परिणाम ही बदल डाला। सबसे बड़ा उलटफेर गंगोह सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे नाहिद हसन के कारण हुआ था।
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यहां पर विजयी हुए कांग्रेस के प्रदीप चौधरी और दूसरे नंबर पर रहे चौधरी रुद्रसेन के बीच सिर्फ चार हजार की वोटों का ही अंतर रह गया था। प्रदीप को लगभग 65 हजार और चौधरी रुद्रसेन को लगभग 61 हजार वोट मिले थे।
लेकिन नाहिद हसन ने 33 हजार 288 वोट हासिल कर पासा ही पलट डाला। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष ने भी यहां काफी वोट बटोरे। बेहट में तो मुकाबला सबसे रोचक रहा था।
इस सीट पर विजयी हुए बसपा के महावीर राणा और दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के नरेश सैनी के लगभग 500 वोटों का अंतर रहा। यहां पर निर्दलीय नाथीराम ने 1774 वोट हासिल किए कम्युनिस्ट पार्टी के धर्म सिंह ने भी लगभग 2300 वोट हासिल कर परिणाम ही बदल दिया था।
नकुड़ सीट पर भी निर्दलीय ने सारे समीकरण बिगाड़ डाले थे। यहां बसपा के टिकट पर लड़े धर्म सिंह सैनी को 88 हजार 824 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के इमरान मसूद को 84 हजार 498 वोट मिले।
लगभग 4500 वोटों के अंतर से रही इस हार जीत में सबसे बड़ा कारण निर्दलीय मैदान में उतरे गोविंद चौधरी रहे, जिन्होंने 14 हजार 207 वोट ले लिए थे।इस बार भी प्रत्याशियों की नजर निर्दलीय उम्मीदवारों पर लगी हैं।
कुछ उम्मीदवार दूसरे दल की वोटों को काटने के लिए ही निर्दलियों को मैदान में उतार रहे हैं, जबकि कुछ पार्टी से टिकट न मिलने की नाराजगी में खेल बिगाड़ने पर आमादा हैं।
भाजपा से टिकट न मिलने से क्षुब्ध आदित्य प्रताप राणा ने तो बेहट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान भी कर दिया है। ऐसे में चुनावों के दौरान पार्टी प्रत्याशियों को निर्दलीय उम्मीदवारों से पार पाना भी चुनौती रहेगा।
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अधिकांश निर्दलियों की मंशा जीतने की बजाय गणित बिगाड़ने में अधिक रही है। सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलियों की बड़ी भूमिका रही है।
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खासकर गंगोह, बेहट और नकुड़ सीट पर निर्दलियों ने 2012 के विधानसभा सीटों पर न सिर्फ गणित बिगाड़ा बल्कि चुनाव परिणाम ही बदल डाला। सबसे बड़ा उलटफेर गंगोह सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे नाहिद हसन के कारण हुआ था।
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यहां पर विजयी हुए कांग्रेस के प्रदीप चौधरी और दूसरे नंबर पर रहे चौधरी रुद्रसेन के बीच सिर्फ चार हजार की वोटों का ही अंतर रह गया था। प्रदीप को लगभग 65 हजार और चौधरी रुद्रसेन को लगभग 61 हजार वोट मिले थे।
लेकिन नाहिद हसन ने 33 हजार 288 वोट हासिल कर पासा ही पलट डाला। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष ने भी यहां काफी वोट बटोरे। बेहट में तो मुकाबला सबसे रोचक रहा था।
इस सीट पर विजयी हुए बसपा के महावीर राणा और दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के नरेश सैनी के लगभग 500 वोटों का अंतर रहा। यहां पर निर्दलीय नाथीराम ने 1774 वोट हासिल किए कम्युनिस्ट पार्टी के धर्म सिंह ने भी लगभग 2300 वोट हासिल कर परिणाम ही बदल दिया था।
नकुड़ सीट पर भी निर्दलीय ने सारे समीकरण बिगाड़ डाले थे। यहां बसपा के टिकट पर लड़े धर्म सिंह सैनी को 88 हजार 824 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के इमरान मसूद को 84 हजार 498 वोट मिले।
लगभग 4500 वोटों के अंतर से रही इस हार जीत में सबसे बड़ा कारण निर्दलीय मैदान में उतरे गोविंद चौधरी रहे, जिन्होंने 14 हजार 207 वोट ले लिए थे।इस बार भी प्रत्याशियों की नजर निर्दलीय उम्मीदवारों पर लगी हैं।
कुछ उम्मीदवार दूसरे दल की वोटों को काटने के लिए ही निर्दलियों को मैदान में उतार रहे हैं, जबकि कुछ पार्टी से टिकट न मिलने की नाराजगी में खेल बिगाड़ने पर आमादा हैं।
भाजपा से टिकट न मिलने से क्षुब्ध आदित्य प्रताप राणा ने तो बेहट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान भी कर दिया है। ऐसे में चुनावों के दौरान पार्टी प्रत्याशियों को निर्दलीय उम्मीदवारों से पार पाना भी चुनौती रहेगा।