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मनरेगा में घट रही मजदूरों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:45 AM IST
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सहारनपुर। मनरेगा से ज्यादातर पुरुष मजदूर दूरी बनाए हुए हैं। वर्ष 2015-16 की तुलना 2014-15 से की जाए तो इसमें काफी कमी आई है। ऐसे हालात बनने की प्रमुख वजह योजना के तहत मिलने वाली दिहाड़ी यानी मजदूरी का सामान्य मजदूरी से आधे से भी कम होना है। यही वजह है कि पुरुष मजदूर योजना से किनारा करते आ रहे हैं।
योजना के तहत एक व्यक्ति को अधिकतम सौ दिन का रोजगार मिलता है। इसमें प्रतिदिन 174 रुपये मजदूरी निर्धारित है। मजदूरी कम होने की वजह से मजदूर खासकर पुरुष मजदूर हमेशा से इससे किनारा करते रहे हैं।
यही वजह है कि वर्ष 2014 से अब तक योजना के तहत काम करने वालों की संख्या घटी है। वर्ष 2014-15 में योजना के तहत मजदूरों को 18 करोड़ 50 लाख रुपये की मजदूरी के तौर पर खर्च हुआ। वर्ष 2015-16 में यह घटकर 17 करोड़ पांच लाख रह गया। यानी सीधा सा फंडा है कि लागत घटी है तो मजदूरों की संख्या भी घटी होगी। विभागीय सूत्रों ने बताया है कि वर्ष 2016-17 का ब्योरा अभी कलेक्ट किया जा रहा है।
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योजना के तहत एक व्यक्ति को अधिकतम सौ दिन का रोजगार मिलता है। इसमें प्रतिदिन 174 रुपये मजदूरी निर्धारित है। मजदूरी कम होने की वजह से मजदूर खासकर पुरुष मजदूर हमेशा से इससे किनारा करते रहे हैं।
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यही वजह है कि वर्ष 2014 से अब तक योजना के तहत काम करने वालों की संख्या घटी है। वर्ष 2014-15 में योजना के तहत मजदूरों को 18 करोड़ 50 लाख रुपये की मजदूरी के तौर पर खर्च हुआ। वर्ष 2015-16 में यह घटकर 17 करोड़ पांच लाख रह गया। यानी सीधा सा फंडा है कि लागत घटी है तो मजदूरों की संख्या भी घटी होगी। विभागीय सूत्रों ने बताया है कि वर्ष 2016-17 का ब्योरा अभी कलेक्ट किया जा रहा है।
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