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बैंकों पर लटके ताले, एटीएम में लगी कतारें

Mon, 21 Nov 2016 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Mon, 21 Nov 2016 12:46 AM IST
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Locks hanging on banks, engaged in ATM queues
एटीएम पर लगी लाइनें। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में 500 और 1000 का नोट बंद होने के बाद ग्राहकों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को अवकाश के कारण बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे।
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वहीं एटीएम पर उपभोक्ताओं की दिनभर लंबी लाइनें रही लेकिन एटीएम से धनराशि नहीं निकलने के कारण उपभोक्ताओं केे निराश लौटना पड़ा। पुराने नोट बंद होने के बाद नई करेंसी को लेकर परेशानी हर दिन बढ़ती ही जा रही है। बैंकों में करेंसी न मिलने के कारण ग्राहक परेशान हैं।
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आक्रोशित ग्राहक हर दिन जनपद की विभिन्न बैंक शाखाओं में हंगामा कर रोष जता रहे हैं। रविवार को बैंकों में अवकाश रहा। जिसके चलते ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने एटीएम ही एकमात्र विकल्प रहा। शहर से लेकर देहात तक लगे एटीएम में उपभोक्ताओं की भारी भीड़ रही लेकिन अधिकांश एटीएम से धनराशि नहीं निकलने के कारण उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में लगने के बाद भी मायूस होना पड़ा। 

जनपद के बैंक एक दिन के अवकाश के बाद सोमवार को खुलेंगे। बैंक शाखाओं में भारी मारामारी मचने की उम्मीद है। ऐसे में बैंक शाखाओं में सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। 

जिन घरों में शादी है। उनसे जुड़े ग्राहकों को धनराशि निकालने में परेशानी नहीं होगी। भारतीय स्टेट बैंक के सहायक महाप्रबंधक महेंद्र सिंह ने बताया कि इस संदर्भ में आरबीआई से दिशा निर्देश आ गए हैं।

जिन घरों में शादी है। उनके खाता धारक पैन नंबर और शादी के कार्ड के साथ ढाई लाख रुपये की धनराशि ले सकते हैं। पहचान पत्र आदि भी साथ लेकर आना होगा। क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण न होने से बुआई प्रभावित

नोटबंदी से हुई परेशानी को लेकर किसान अमी सिंह, नैन सिंह, भरत सिंह, समय सिंह, नेपाल सिंह आदि शनिवार को यूनियन बैंक शाखा के प्रबंधक से मिले। बताया कि जब किसान बैंकों को ब्याज दे रहा है तो उन्हें बिना वजह क्यों परेशान किया जा रहा है।


अगर किसी किसान का एक लाख रुपये का कृषि कार्ड बना है। अब उसके नवीनीकरण का समय आ गया है तो उसे एक बार में केवल 49 हजार रुपये ही जमा कराने को कहा जा रहा है। साथ ही यदि वह कर्ज की रकम निकालता है तो एक बार में मात्र बीस हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। इसके चलते किसान गेहूं की बुआई भी नहीं कर पा रहे हैं। 
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