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साक्षरता से संवार रहे दिव्यांग और कूड़ा बीनने वालों का जीवन

Tue, 08 Sep 2020 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 11:42 PM IST
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Lives of Divyang and Garbage Pickers who are literate
उड़ान स्कूल में कूड़ा बीनने वाले बच्चे। - फोटो : SAHARANPUR
साक्षरता से संवार रहे दिव्यांग और कूड़ा बीनने वालों का जीवन
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सहारनपुर। जिले में कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी सुख सुविधाओं में कमी कर समाज के उस तबके को साक्षर बनाने का बीड़ा उठाया है, जिसकी ओर आम आदमी देखना तक पसंद नहीं करता है। उड़ान और संकल्प इन्हीं संस्थाओं में से हैं, जो कूड़ा बीनने वाले बच्चों और दिव्यांग बच्चों को साक्षर बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास कर रहीं हैं। पेश है दोनों संस्थाओं द्वारा किए गए कार्यों पर रिपोर्ट।
कबाड़ का बोरा छोड़, स्कूल बैग थामा
सहारनपुर। कचरा बीनते बच्चों की बस्ती से 27 फरवरी 2011 को शुरू हुआ उड़ान स्कूल पहले मंदिर की छत पर चलता था। उड़ान संस्था के संस्थापक अजय सिंघल ने बताया कि शुरू में मात्र 32 बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया। अभी तक 100 से अधिक बच्चे उड़ान स्कूल से उत्तीर्ण होकर सरकारी स्कूलों में दाखिला पा चुके हैं। 30 बच्चे 10वीं कक्षा पास कर चुके हैं। लगभग 400 बच्चे कचरा बीनना छोड़ चुके हैं। बच्चों को किताबें, बैग, स्टेशनरी, ड्रेस आदि भी संस्था के द्वारा ही मुहैया कराई जा रही हैं। वर्तमान में 150 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं, मगर कोरोना के चलते फिलहाल स्कूल बंद है। बच्चों को प्रत्येक दिन पौष्टिक आहार जैसे चना, फल, गुड़, गजक, बिस्कुट खाने के लिए दिए जाते हैं। रविवार को सभी छात्रों को स्पेशल भोजन कराया जाता है। शिक्षा के अलावा बच्चों को डांस, कंप्यूटर, आर्ट सिखाई जाती है।
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दिव्यांग बच्चों का भविष्य संवार रहा संकल्प
सहारनपुर। मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर, लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया। यह पंक्तियां संकल्प विकलांग केंद्र की संचालिका रेेेखा कुमार के जीवन पर सटीक बैठती हैं। दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जीवन के 21 साल लगा दिए। उनके प्रयास अब भी जारी हैं। पति डॉ. राकेश कुमार के अलावा ऑस्ट्रेलिया और बंगलूरू में रह रहे रेखा के बच्चे भी उनकी मुहिम से जुड़े हुए हैं। संस्था के सहयोगियों में कई आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अफसर शामिल हैं। वर्ष 1994 में हकीकतनगर में संकल्प नाम से विकलांग केंद्र खोला। यहां मानसिक कमजोर और बधिर बच्चों को रखकर उनको शिक्षित करना शुरू किया। संकल्प केंद्र के पास अपना भवन नहीं था। ऐसे में रेेखा के ससुर ब्रिगेडियर पीपी कुमार ने भवन निर्माण के लिए धन दिया। 21 साल में संस्था से कई हजार दिव्यांग बच्चे हुनरमंद और शिक्षित बनकर निकल चुके हैं, जो समाज में सम्मान के साथ जीवन-यापन कर रहे हैं।

उड़ान स्कूल में पढ़ाई करते कूड़ी बीनने वाले बच्चे।

उड़ान स्कूल में पढ़ाई करते कूड़ी बीनने वाले बच्चे।- फोटो : SAHARANPUR

उड़ान स्कूल में बच्चों के साथ अजय सिंघल।

उड़ान स्कूल में बच्चों के साथ अजय सिंघल।- फोटो : SAHARANPUR

उड़ान स्कूल में पढ़ते कूड़ा बीनने वाले बच्चे।

उड़ान स्कूल में पढ़ते कूड़ा बीनने वाले बच्चे।- फोटो : SAHARANPUR

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