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10 साल में 6 प्रतिशत बढ़ी साक्षरता, अभी कमियां हैं कई
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सहारनपुर। आज विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। तरक्की के लिए शिक्षा का अहम महत्व है, लेकिन अभी सहारनपुर जिले में साक्षरता की दर बहुत अच्छी नहीं है। वर्ष 2011 की जनगणना में 70.55 प्रतिशत साक्षरता दर थी, जिसमें करीब 6 प्रतिशत का इजाफा होने का अनुमान है। यानि अभी जिले की आबादी का बड़ा हिस्सा साक्षर नहीं हो सका है, जिसके लिए कारगर रणनीति की दरकार है।
दरअसल, हर व्यक्ति साक्षर होना चाहिए। इस परिकल्पना को साकार होने में सहारनपुर अभी बहुत पीछे है। क्योंकि जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ी है, उस लिहाज से साक्षरता दर नहीं बढ़ पाई है। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान जिले की आबादी करीब 34 लाख थी, जिसके अब 40 लाख के पार पहुंचने का अनुमान है। वहीं, साक्षरता दर की बात करें तो यह अभी 76.55 फीसदी के आसपास है, जबकि 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 70.55 थी।
कई प्रधान और जिला पंचायत सदस्य भी निरक्षर
जिले में निरक्षरों की स्थिति का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि 12 से ज्यादा ग्राम प्रधान और इतने ही जिला पंचायत सदस्य भी निरक्षर हैं। वहीं, ग्राम प्रधान पदों के लिए नामांकन करने वाले प्रत्याशियों में ही 400 से ज्यादा निरक्षर शामिल थे।
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चिह्नित हुए 15 साल से ऊपर के 7500 निरक्षर
वर्ष 2020 में ही प्रदेश सरकार ने पढ़ना लिखना अभियान चलाया, जिसमें 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को चिह्नित कराया गया। उसके लिए ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी नोडल बनाए गए। उन्होंने शिक्षकों के माध्यम से निरक्षरों का चिह्नांकन कराया। इसमें जिले भर में 7500 निरक्षर चिह्नित किए गए। इस अभियान के तहत डीएलएड और बीटीसी के प्रशिक्षुओं को लक्ष्य दिया गया, जिसमें प्रत्येक प्रशिक्षु को 10 लोगों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी दी। इनके द्वारा चिह्नित लोगों में से 25 प्रतिशत यानी करीब 1800 लोगों को साक्षर किया गया।
2011 की जनगणना के मुताबिक साक्षरता
साक्षरता कुल -- 70.55 प्रतिशत
साक्षरता पुरुष -- 78.28 प्रतिशत
साक्षरता महिला -- 61.74 प्रतिशत
विद्यालयों की संख्या
1438 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें 1.83 लाख बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या एक हजार से ज्यादा है, तो सीबीएसई के भी 100 से अधिक विद्यालय हैं। वहीं, माध्यमिक विद्यालय 350 हैं। उच्च शिक्षा के लिए 7 कॉलेज राजकीय, पांच एडेड और 40 से ज्यादा निजी डिग्री कॉलेज हैं। दो यूनिवर्सिटी भी हैं।
साक्षरता दर बढ़ाने के लिए काफी प्रयास हुए हैं, जिसका प्रभाव भी दिखा है और बीते वर्ष ही पढ़ना लिखना अभियान भी शुरू हुआ है। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को शिक्षित बनाने के लिए दाखिला जरूर कराएं। -- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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दरअसल, हर व्यक्ति साक्षर होना चाहिए। इस परिकल्पना को साकार होने में सहारनपुर अभी बहुत पीछे है। क्योंकि जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ी है, उस लिहाज से साक्षरता दर नहीं बढ़ पाई है। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान जिले की आबादी करीब 34 लाख थी, जिसके अब 40 लाख के पार पहुंचने का अनुमान है। वहीं, साक्षरता दर की बात करें तो यह अभी 76.55 फीसदी के आसपास है, जबकि 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 70.55 थी।
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कई प्रधान और जिला पंचायत सदस्य भी निरक्षर
जिले में निरक्षरों की स्थिति का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि 12 से ज्यादा ग्राम प्रधान और इतने ही जिला पंचायत सदस्य भी निरक्षर हैं। वहीं, ग्राम प्रधान पदों के लिए नामांकन करने वाले प्रत्याशियों में ही 400 से ज्यादा निरक्षर शामिल थे।
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चिह्नित हुए 15 साल से ऊपर के 7500 निरक्षर
वर्ष 2020 में ही प्रदेश सरकार ने पढ़ना लिखना अभियान चलाया, जिसमें 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को चिह्नित कराया गया। उसके लिए ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी नोडल बनाए गए। उन्होंने शिक्षकों के माध्यम से निरक्षरों का चिह्नांकन कराया। इसमें जिले भर में 7500 निरक्षर चिह्नित किए गए। इस अभियान के तहत डीएलएड और बीटीसी के प्रशिक्षुओं को लक्ष्य दिया गया, जिसमें प्रत्येक प्रशिक्षु को 10 लोगों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी दी। इनके द्वारा चिह्नित लोगों में से 25 प्रतिशत यानी करीब 1800 लोगों को साक्षर किया गया।
2011 की जनगणना के मुताबिक साक्षरता
साक्षरता कुल -- 70.55 प्रतिशत
साक्षरता पुरुष -- 78.28 प्रतिशत
साक्षरता महिला -- 61.74 प्रतिशत
विद्यालयों की संख्या
1438 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें 1.83 लाख बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या एक हजार से ज्यादा है, तो सीबीएसई के भी 100 से अधिक विद्यालय हैं। वहीं, माध्यमिक विद्यालय 350 हैं। उच्च शिक्षा के लिए 7 कॉलेज राजकीय, पांच एडेड और 40 से ज्यादा निजी डिग्री कॉलेज हैं। दो यूनिवर्सिटी भी हैं।
साक्षरता दर बढ़ाने के लिए काफी प्रयास हुए हैं, जिसका प्रभाव भी दिखा है और बीते वर्ष ही पढ़ना लिखना अभियान भी शुरू हुआ है। अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को शिक्षित बनाने के लिए दाखिला जरूर कराएं। -- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी